कोरोना इंसानों के लिए ही नहीं, बेजुबान जानवरों और पंछियों के लिए भी काल!

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नई दिल्लीः कोरोना वायरस हम इंसानों पर ही नहीं बेजुबान जानवरों और पंछियों पर भी क़हर ढा रहा हैं। देश भर में जारी लॉकडाउन की वजह से बेजुबान जानरों और पंछीयों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। खास कर के ये समस्या उन जानवरों के सामने उतपन्न हुई है जो पालतू नहीं हैं और उन मुक्त विचरण करने के बावजूद निवाले के लिए हम इंसानों पर निर्भर हैं।

कोरोना के प्रकोप से बचने के लिए इन दिनों देश भर में लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में आम आदमी घर में बंद हैं और बाहर जानवर और परिेंदे भूख प्यास से बेहाल हैं। इन बेजुबानों को कोई दाना-पानी देने वाला भी नहीं हैं। जिन चौक-चौराहों पर अक्सर सैकड़ों कबूतर दाना चुगते दिखाई देते थे, वहां इन दिनों कोई भी परिंदा नहीं दिखाई दे रहा।

कमोबेश यही हाल विभिन्न शहरों की सड़कों पर लवारीश विचरण करने वाली गाय, बंदर और स्ट्रीट डॉग का भी है। होटल या अन्य दुकानों के साथ हम इंसानों के घर में बंद हो जाने से उन्हे भी इन दिनों खाने-पिने की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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हरियाणा को सोहना क्षेत्र में तो भूखे रहने के कारण बंदरों का मिजाज भी बदल गया है। सुबह और शाम में कुछ बंदर आबादी क्षेत्र में नजर आते हैं और रास्ते में पैदल जाने वालों पर खीझते हैं। कई बार तो मकानों के छज्जों पर बैठे बंदर दरवाजा खोलने के साथ ही झपट पड़ते हैं। हालांकि, वे खाने की तलाश में इन दिनों जंगल की तरफ जाते हुए भी देखे जा रहे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन की घोषणा के बाद गुड़गांव के सोहना क्षेत्र स्थित अनाज मंडी से लगते मंदिर के पास तीन दिन में चार बंदरों की मौत हो चुकी है। ऐसा माना जा रहा है कि उन बंदरों की मौत भोजन नहीं मिलने के कारण हुई है। कुल मिलाकर कोरोना इंसानों के लिए ही नही बल्कि जानवरों के लिए भी काल बन रहा है।

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