Saturday, March 21, 2026

नीतीश ने जलाई लालटेन तो BJP को चिराग से रौशनी की उम्मीद

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नई दिल्लीः बिहार NDA में लंबे समय से जारी सियासी अंतर्कलह का बुधवार को अंत हो गया, जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर महागठबंधन का दामन थाम लिया। नीतीश ने 8वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है साथ में RJD नेता तेजस्वी यादव भी उप-मुख्यमंत्री बन गए हैं। इस बीच BJP के सूत्रों के हवाले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खबर है कि जिस तरह से नीतीश ने लालटेन जलाई है, वैसे ही अब BJP भी चिराग से अपने घर को रौशन करने की तैयारी कर रही है।

ऐसा कहा जा रहा है कि बिहार की सत्ता से बेदखल होने के बाद BJP का केन्द्रीय नैतृत्व चिराग पासवान से लगातार संपर्क में है और अंदर ही अंदर किसी बड़ी रणनीति पर काम कर रहा है। संभवना है कि LJP (रामविलास) चीफ चिराग पासवान जल्द ही NDA में वापसी करेंगे और मजबूत स्तंभ के तौर पर उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

नीतीश के धुर विरोधी हैं चिराग पासवान

पूर्व केन्द्रीय मंत्री सह LJP संस्थापक दिवंगत रामविलास पासवान के बेटे सांसद चिराग पासवान को नीतीश का धुर विरोधी समझा जाता है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश की पार्टी JDU के खिलाफ सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार कर चिराग ने उन्हें भारी क्षति पहुँचाई थी। उस चुनाव में चिराग ने भाजपा के भी कुछ नेताओं को LJP के सिंबल पर चुनाव लड़ाया था, हालांकि 1 सिट को छोड़कर कोई भी विजयी नहीं हुआ था। लेकिन BJP की अपेक्षा नीतीश की सीटें कम गई थीं। इसका ठीकरा JDU ने सीधे तौर पर चिराग के मत्थे फोड़ा था।

कहा जाता है कि चिराग के इस स्टैप के पीछे BJP का मास्टर प्लान था। हालांकि BJP ने खुद को इससे अलग बताने के लिए उन सभी नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, जिन्हों ने LJP के सिंबल पर पार्टी लाईन से अलग जाकर चुनाव लड़ा था।

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अभी उस मुद्दे पर सियासी बहस चल ही रही थी कि LJP में भी टूट हो गई। चिराग के चााचा पशुपति पारस ने 4 अन्य सांसदों संग एक अलग खेमा बना लिया और खुद संसदिय दल का नेता बनकर चिराग को बंगले से बाहर का रास्ता दिखा दिया। तब से लेकर अभी तक चिराग LJP के बंगले पर अपने मालिकाना हक के लिए लड़ाई रहे हैं और इसके लिए सीधे-सीधे नीतीश को जिम्मेदार मान रहे हैं।

आलम यह है कि चिराग, नीतीश पर हमला करने का एक भी मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहते। हाल के दिनों में भी उनके बयान से नीतीश के प्रति उनकी नाराज़गी साफ तौर पर छलकी है। तेजस्वी को डिप्टी सीएम बनाए जाने की बधाई देते हुए चिराग ने एक ट्वीट किया था, जिसमें नीतीश को लेकर उनकी मंशा सामने आई थी।

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चिराग ने नीतीश को लेकर तेजस्वी को चेताया

चिराग ने ट्वीट में लिखा था, “बिहार सरकार के उप-मुख्यमंत्री बनने पर तेजस्वी यादव जी आपको ढेरों शुभकामनाएं। बिहार आपसे विकास की उम्मीद रखता है। आप के नए सहयोगी से अभी तक बिहारवासियों को विकास में निराशा ही प्राप्त हुई है। आप को एक बार पुनः बधाई।”

इससे पहले मंगलवार को भी चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा था। उन्होंने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर दी थी। चिराग ने कहा था, “कैसे कोई ऐसे मुख्यमंत्री पर विश्वास रखेगा जो खुद अपने शब्दों पर नहीं टिकते। इसलिए मैं चाहता हूं कि बिहार को चुनाव में जाना चाहिए। बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू होना चाहिए, ये जोड़ तोड़ की सरकार बनाना सही नहीं है, आपकी कोई नीति, विचारधारा, सिद्धांत है कि नहीं? आज के बाद मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता शून्य है। जिस जंगल राज का विकल्प बनकर आए थे उसी के साथ सरकार बना ली। लोकतंत्र के मंदिर में खड़े होकर शपथ लिया कि मिट्टी में मिल जाऊंगा पर बीजेपी के साथ नहीं जाऊंगा उसी बीजेपी के साथ 2017 में ये चले गए।”

बिहार में BJP की सहयोगी के नाम पर केवल पशुपति पारस की पार्टी

बता दें, बिहार जहां जातिवादी राजनीति के सहारे जीत-हार तय होती है। बिहार के अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग जाति का वर्चस्व है। ऐसे मे नीतीश, तेजस्वी और जीतन राम मांझी जब एक साथ हैं तो बिहार के सियासी रण में अकेले बीजेपी के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी। यह बात अलग है कि बीजेपी के पास अभी बिहार में लोकसभा की 17 और विधानसभा की 77 सीटें है, लेकिन JDU, HAM और VIP का साथ छुट जाने के बाद बिहार में सहयोगी के नाम पर केवल पशुपति पारस की राष्ट्रीय LJP ही उसके साथ रह गई हैं, जिसके लोकसभा में 6 सांसद हैं लेकिन विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यह समय बताएगा कि पारस BJP के लिए बिहार में कितने उपयोगी है क्योंकि पशुपति पारस अभी तक रामविलास पासवान की राजनीति के सहारे हैं। बिहार में राजनीति उन्होंने अभी तक की नहीं है। ऐसे में BJP के लिए फिलहाल चिराग पासवान ही उम्मीद की किरण हैं।

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