कोलकाताः एक मंच, माइक और चेतावनी—“अगर पेन ड्राइव खोल दी, तो देश के होश उड़ जाएंगे।” बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह वाक्य अब सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक सियासी धमकी बन चुका है। सवाल यह नहीं कि उन्होंने यह कहा, सवाल यह है कि वह किसे डरा रही हैं? और आखिर उस पेन ड्राइव में ऐसा क्या है, जिसे लेकर पूरे देश के होश उड़ने की बात कही जा रही है? फिलहाल पेन ड्राइव बंद है, लेकिन Mamata Banerjee Pen drive threat के बाद राजनीति खुलकर सामने आ चुकी है।
संयोग नहीं, सीधा जवाब
ममता बनर्जी का यह आक्रामक रुख किसी सामान्य राजनीतिक भाषण का हिस्सा नहीं है। यह बयान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया कार्रवाई के ठीक बाद आया है। कोलकाता में कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री सड़कों पर उतरीं और सीधे केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
उन्होंने पहली बार इस टकराव में गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा कि कोयला घोटाले से जुड़े अहम सबूत उनके पास सुरक्षित हैं।
पेन ड्राइव का दावा, लेकिन पर्दा नहीं उठा
ममता बनर्जी का कहना है कि उनके पास ऐसे डिजिटल सबूत हैं जो यह दिखा सकते हैं कि कोयला तस्करी से निकला पैसा कहां-कहां पहुंचा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह अब तक संवैधानिक पद की मर्यादा में चुप हैं, लेकिन दबाव बढ़ा तो “सब कुछ बाहर आ जाएगा।”
लेकिन यहीं से सवाल और गहरे हो जाते हैं—
- ये पेन ड्राइव किसकी हैं?
- इनमें क्या सिर्फ आरोप हैं या ठोस रिकॉर्ड भी?
- क्या ये कभी किसी जांच एजेंसी या अदालत को दिखाई गई हैं?
इन सवालों का जवाब अभी तक कहीं नहीं मिला है।
पुरानी फाइल, नया सस्पेंस
बंगाल का कोयला तस्करी मामला वर्षों पुराना है। ED और CBI पहले ही कई आरोपियों को घेर चुकी हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की ‘पेन ड्राइव’ वाली एंट्री ने इस केस को एक बार फिर राजनीतिक युद्ध का मैदान बना दिया है। यह पहली बार है जब ममता बनर्जी ने इस मामले में “ऊपर तक कड़ी” जाने का दावा इतनी खुलकर किया है।
ईडी पर पलटवार, एजेंसियों पर सवाल
ममता बनर्जी ने ईडी को विपक्ष को डराने का औज़ार बताया। उन्होंने कहा कि कोयला तस्करी रोकने में केंद्रीय एजेंसियां नाकाम रहीं, लेकिन राजनीतिक वक्त आते ही वही एजेंसियां अचानक सक्रिय हो जाती हैं।
उन्होंने BSF और CISF पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सीमा और औद्योगिक सुरक्षा में चूक नहीं होती, तो तस्करी इतनी दूर तक जाती ही नहीं।
सियासत तेज, सबूत धीमे
ममता बनर्जी का बयान राजनीतिक तौर पर जितना विस्फोटक है, उतना ही कानूनी तौर पर अधूरा भी है। पेन ड्राइव की बात ने माहौल गरमा दिया है, लेकिन जब तक उसके अंदर का डेटा सामने नहीं आता, तब तक यह सबूत से ज़्यादा संकेत बना रहेगा।
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फिलहाल इतना साफ है कि ईडी की कार्रवाई ने मुख्यमंत्री को बैकफुट पर नहीं, बल्कि फुल फ्रंटफुट मोड में ला दिया है। अब सवाल यही है— क्या पेन ड्राइव कभी खुलेगी? या फिर यह भी बंगाल की राजनीति का एक और अधूरा धमाका बनकर रह जाएगी?