22 दिनों से लापता बिहारी युवक को नहीं ढूंढ पाई दिल्ली पुलिस, बच्चे संग पत्नी बेसहारा

अभय पाण्डेय
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नई दिल्लीः ये सच है कि कोरोना संकट को रोकने में पुलिसवाले एक योद्धा की तरह जी जान से जुटे हुए हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उसे आम आदमी की दूसरी समस्याओं की परवाह ही नहीं रहे। मामला नर्थ इस्ट दिल्ली के खजुरी खास थाने का है। यहां पिछले 22 दिनों से लापता एक बिहारी युवक की गुमशुदगी की रिपोर्ट फाईलों में धुल फाँक रही है, पुलिस वाले बे-परवाह हैं और परिजन किसी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं।

दरअसल बिहार के किशनगंज जिले का रहने वाला राहुल चौहान दिल्ली के गांधी नगर इलाके में एक कपड़े की दुकान में काम करता है। वह अपनी पत्नी पुजा चौहान और 2 साल के बच्चे के साथ खजुरी खास थाना क्षेत्र के करावल नगर में  किराए के मकान में रहता है। 27 तारिख को लॉकडाउन की घोषणा के बाद वह बगल की दवा दुकान से पेट दर्द की दवा लेने गया, लेकिन काफी वक्त गुजर जाने के बाद भी घर नहीं लौटा।

इधर 2 साल के बच्चे को गोद में लिए उसकी पत्नी पूरा दिन, पूरी रात उसके आने का इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं आया। इस बीच उसने अपने सभी जानने वालों से फोन पर बात की और पति के बारे में पूछती रही। जब कहीं से कुछ भी पता नहीं चल पाया, तो अगले दिन यानी 28 मार्च को उसने खजुरी खास थाने में अपने पति के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस अब तक उसका कोई शुराग नहीं जुटा पाई है।

कई दिन गुजर जाने के बाद भी राहुल का कोई पता नहीं चल पाने से दिल्ली में अपने 2 साल के बच्चे के साथ अकेली रह रही पत्नी पुजा का रो रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में राहुल के परिजन किसी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं। पुजा और उसके परिजनों की माने तो रिपोर्ट दर्ज कराने से लेकर अब तक वे कई बार थाने से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता है ‘हम कोशिश कर रहे हैं’। कई बार तो पुलिस द्वारा ये भी कहा गया कि परिजन स्वयं ही उसे ढूढ़ने की कोशिश करें।

परिजनों की व्यथा सूनकर जब हमने इस बाबत केस के आईओ (IO) विक्रम सिंह से बात की, तो उनका जवाब हतप्रभ कर देने वाला था। उन्होंने कहा कि ‘वे अब इस मामले में जवाब देते-देते थक चुके हैं। पुलिस को जो कार्रवाई करनी थी वो सब कर ली गई है, अगर आप कुछ प्रयास कर सकते हो तो करो।’

सवाल ये उठता है कि क्या राहुल का पता लगानें में दिल्ली पुलिस नाकाम हो गई है और ये काम अब उसके परिजनों और मीडिया को ही करना पड़ेगा। अगर ऐसा है, तो कोरोना संकट से जुझते देश में लॉकडाउन की घोषाणा के साथ सरकार ने आम आदमी और प्रशासन के लिए जो निर्देश जारी किए हैं क्या उसे ताक पर दिया जाना चाहिए।

थाने में दर्ज कराई गई सूचना
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आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।
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