एक युग का अंत: दरभंगा रियासत की अंतिम महारानी ‘माईजी’ का निधन

News Stump

पटनाः दरभंगा रियासत की अंतिम महारानी, स्नेह और सम्मान से ‘माईजी’ कही जाने वाली महारानी कामसुंदरी देवी का आज सोमवार 12 जनवरी को निधन हो गया (maayaji nidhan)। 96 वर्ष की आयु में उन्होंने कल्याणी निवास, दरभंगा में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही न सिर्फ एक राजपरिवार की वरिष्ठतम सदस्य विदा हुईं, बल्कि मिथिला के शाही इतिहास की अंतिम जीवित साक्षी भी मौन हो गईं। यह केवल एक निधन नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अवसान है।

- Advertisement -

दरभंगा राज की अंतिम महारानी

महारानी कामसुंदरी देवी, दरभंगा रियासत के अंतिम महाराजा महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं। जब भारत आज़ाद हुआ, जब रियासतें समाप्त हुईं और लोकतंत्र ने राजतंत्र की जगह ली—माईजी उन चंद लोगों में थीं जिन्होंने राजसी वैभव से लेकर सामान्य नागरिक जीवन तक का परिवर्तन अपनी आंखों से देखा।

दरभंगा राज, जिसे कभी भारत की सबसे समृद्ध रियासतों में गिना जाता था, उसकी अंतिम महारानी के रूप में माईजी इतिहास का जीवित अध्याय थीं।

सादगी में छुपा था राजसी व्यक्तित्व

हालाँकि वे शाही परिवार से थीं, लेकिन माईजी की पहचान सादगी, संयम और गरिमा से थी। कल्याणी निवास में उनका जीवन बेहद अनुशासित और शांत रहा। राजसी ठाठ-बाट से दूर, वे धार्मिक आस्था, परंपरा और परिवारिक मूल्यों से जुड़ी रहीं।

मिथिला की परंपराओं, पूजा-पाठ और लोक-संस्कृति से उनका गहरा लगाव था। राजमहल के भीतर वे केवल महारानी नहीं, बल्कि परिवार की मार्गदर्शक और संरक्षक थीं।

इतिहास की साक्षी, राजनीति से दूरी

माईजी ने सक्रिय राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखी। उन्होंने कभी मंच नहीं चुना, न ही सत्ता की आकांक्षा रखी। लेकिन दरभंगा राज और मिथिला की विरासत को लेकर उनकी चुप्पी भी बहुत कुछ कहती थी। वे उन विरले व्यक्तित्वों में थीं, जिनकी मौजूदगी ही इतिहास की याद दिलाती थी।

लंबे समय से थीं अस्वस्थ

बताया जा रहा है कि महारानी कामसुंदरी देवी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। उम्र से जुड़ी परेशानियों के कारण वे चिकित्सा निगरानी में थीं। आज सुबह उनका शांतिपूर्वक निधन हो गया। राजपरिवार और निकट संबंधियों की मौजूदगी में उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।

श्यामा माई मंदिर परिसर में होगा अंतिम संस्कार

राजपरिवार की परंपरा के अनुसार, माईजी का अंतिम संस्कार श्यामा माई मंदिर परिसर में किया जाएगा। इस अवसर पर राजपरिवार के सदस्य, मिथिला के गणमान्य लोग और शुभचिंतक उपस्थित रहेंगे।

मिथिला की स्मृति में हमेशा रहेंगी ‘माईजी’

दरभंगा राज भले ही इतिहास बन चुका हो, लेकिन महारानी कामसुंदरी देवी के साथ जुड़ी स्मृतियाँ मिथिला के जनमानस में हमेशा जीवित रहेंगी।

वे उस दौर की प्रतिनिधि थीं, जब सत्ता नहीं—संस्कार राज करते थे। उनके निधन के साथ ही यह कहावत सच हो गई—“इतिहास अब किताबों में है, क्योंकि उसकी आख़िरी गवाह भी चली गईं।”

Sponsored
Share This Article
Follow:
With the system... Against the system