Saturday, March 14, 2026

बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट फेल, Chirag Paswan की पार्टी में शुरू हो गया खेल

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पटनाः चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास में अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। उनका नारा बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट फेल होता दिख रहा है क्योंकि पार्टी में कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह चिराग पासवान से अंदर ही अंदर नाराज चल रहा है। नाराजगी इस बात को लेकर है कि जो कार्यकर्ता बुरे वक्त में उनके साथ चट्टान की तरह डटे रहे, लोकसभा चुनाव में चिराग ने उन्हें ही नज़रअंदाज कर दिया। पार्टी ने एक भी वैसे कार्यकर्ता को टिकट नहीं दिया, जिन्होंने चिराग की लौ को बरकरार रखने के लिए विरोधी हवाओं से पंगा ले लिया।

दरअसल, मोदी के हनुमान कहे जाने वाले चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास, NDA कोटे से मिले बिहार के 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इन पांच लोकसभा सिटों में हाजीपुर, वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और खगड़िया सीट लोजपा रामविलास को मिली हैं।

इनमें से हाजीपुर, समस्तीपुर और जमुई सुरक्षित सीट हैं। हाजिपुर सीट से खुद चिराग पासवान चुनाव लड़ रहे हैं जबकि जमुईं से उन्हों ने अपने बहनोई अरूण भारती को चुनाव मैदान में उतारा हैं। वहीं समस्तीपुर से पार्टी ने जदयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। बात दो अन्य सिटों की करें जो समान्य कोटे के उम्मीदवारों के लिए हैं तो उन पर वैशाली सीट से पार्टी ने वीणा देवी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि खगड़िया से राजेश वर्मा को उम्मीदवार घोषित किया गया है।

इनमें चिराग पासवान को छोड़कर कोई भी उम्मीदवार पार्टी का कार्यकर्ता नहीं है। शांभवी ने जहां राजनीति में अभी-अभी इंट्री ली है, वहीं वीणा देवी कुछ दिन पहले तक चिराग के धुर विरोधी रहे उनके चाचा पशुपति पारस के गुट का झंडा ढो रही थीं। अरूण भारती का भी पार्टी के उत्थान में कोई योगदान नहीं रहा है, जबकि राजेश वर्मा 2020 के विधानसभा चुनाव में भागलपुर से पार्टी के उम्मीदवार रह चुके हैं, लेकिन सक्रियता कुछ ज्यादा नहीं रही है।

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अब चिराग के सहयोगियों का कहना है कि जब 2020 में चिराग से सब कुछ छिन लिया गया। पार्टी और परिवार दोनों को तोड दिया गया तब हमने हर मोर्चे पर चिराग का साथ दिया, लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो चिराग ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मोदी ने अपने हनुमान का ख्याल रखा लेकिन चिराग ने अपनी बानरी सेना को ही नज़रअंदाज कर दिया। चिराग का नारा बिहार फ़र्स्ट, बिहारी फ़र्स्ट का अब कोई मतलब नहीं रह गया।

बता दें बाहरियों को टिकट दिए जाने से नाराज लोजपा (रा) के कद्दावर नेता और जहानाबाद से पूर्व सांसद अरूण कुमार ने पहले ही पार्टी छोड़ दी है। पार्टी के कई और बड़े नेता भी पार्टी छोड़ने का मूड बना रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नाराज नेता लोकसभा चुनाव में तो पार्टी का काम कराब करेंगे ही साथ ही 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी कुछ बड़ा गेम कर सकते हैं।

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