पटना: Rajya Sabha Election 2026 बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान होना है। इन सीटों को लेकर राज्य की राजनीति में पिछले कई दिनों से गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। सभी प्रमुख दलों और गठबंधनों में लगातार बैठकों का दौर चलता रहा और उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया गया। अब आज होने वाले मतदान के साथ ही इन सीटों की तस्वीर साफ होने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
बिहार से राज्यसभा में कुल 16 सदस्य जाते हैं। इनमें से इस बार पांच सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जिनकी जगह नए प्रतिनिधि चुने जाएंगे। इन पांच सीटों के लिए कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें NDA ने 5 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि महागठबंधन की ओर से 1 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है।
NDA के उम्मीदवार
सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से JDU से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर, BJP से नितिन नबीन और शिवेश राम, जबकि सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा उम्मीदवार हैं।
महागठबंधन के उम्मीदवार
विपक्षी गठबंधन महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रेमचंद गुप्ता उम्मीदवार हैं। विधानसभा में संख्या बल कम होने के कारण महागठबंधन के लिए मुकाबला चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
बिहार में चुनाव का राजनीतिक महत्व
राजनीतिक दृष्टि से राज्यसभा चुनाव को काफी अहम माना जाता है, क्योंकि यह केवल सांसदों के चयन की प्रक्रिया नहीं बल्कि विधानसभा में दलों की वास्तविक ताकत और राजनीतिक प्रभाव का भी संकेत देता है।
बिहार से राज्यसभा में कुल 16 सीटें हैं। आज जिन 5 सीटों के लिए मतदान होना है, वे उन सांसदों की हैं जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसी वजह से राज्य की राजनीति में इस चुनाव को काफी अहम माना जा रहा है। विधानसभा में दलों के संख्या बल के आधार पर यह तय होता है कि किस पार्टी के उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक होगी।
किन राज्यों में कितनी राज्यसभा सीटें
राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी जनसंख्या के आधार पर सीटें दी गई हैं। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 31 सदस्य राज्यसभा में जाते हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से 19, तमिलनाडु से 18, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल से 16-16 सदस्य राज्यसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसके अलावा मध्य प्रदेश और कर्नाटक से 12-12, गुजरात और आंध्र प्रदेश से 11-11, जबकि कई छोटे राज्यों से 1 से 7 सदस्य तक राज्यसभा में भेजे जाते हैं।
हर दो साल में राज्यसभा के लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उन्हीं सीटों पर चुनाव कराए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार देश के कई राज्यों की सीटों पर चुनाव हो रहा है।
आज कहां-कहां हो रहा है चुनाव
इस बार जिन प्रमुख राज्यों की सीटों पर चुनाव हो रहा है उनमें बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में कुल मिलाकर कई सीटों के लिए मतदान कराया जा रहा है।
इन चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि संसद के उच्च सदन में आने वाले वर्षों में किन दलों का प्रभाव ज्यादा रहेगा। इसलिए अलग-अलग राज्यों में हो रहे राज्यसभा चुनाव को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्यसभा क्या है और इसका महत्व
भारत की संसद दो सदनों-लोकसभा और राज्यसभा-से मिलकर बनी है। राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है और इसे राज्यों का प्रतिनिधि सदन भी माना जाता है। यह एक स्थायी सदन है, इसलिए इसे भंग नहीं किया जाता।
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। इनमें से 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित किए जाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य आम तौर पर कला, साहित्य, विज्ञान, खेल और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाले लोगों में से चुने जाते हैं।
कैसे होता है राज्यसभा सांसदों का चुनाव
राज्यसभा के सांसदों का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता। यह एक अप्रत्यक्ष चुनाव होता है जिसमें संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।
इस चुनाव में अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) और एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) का उपयोग किया जाता है। इसमें विधायक उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में वोट देते हैं।
कौन करता है मतदान
राज्यसभा चुनाव में केवल संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक (MLA) ही मतदान करते हैं। मनोनीत विधायक और विधान परिषद के सदस्य मतदान नहीं करते। बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और यही विधायक राज्यसभा चुनाव में वोट डालते हैं।
कैसे तय होता है जीत का गणित
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए जरूरी मतों की संख्या एक विशेष गणितीय फॉर्मूले से तय होती है।
फॉर्मूला:
कुल विधायक ÷ (खाली सीटें + 1) + 1
यदि बिहार में कुल 243 विधायक और 5 सीटें हैं, तो एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 41 वोट की आवश्यकता होती है।
राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल
राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव होता है।
सभापति और उपसभापति का चयन
राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं। वही सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और संसदीय नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
वहीं उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्य अपने बीच से करते हैं। इसके लिए सदन में मतदान कराया जाता है।
सभापति और उपसभापति की जिम्मेदारियां
- सदन की कार्यवाही का संचालन
- सांसदों को बोलने की अनुमति देना
- संसदीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना
- सदन में अनुशासन बनाए रखना
- विधेयकों और बहस को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना
5 पॉइंट में समझिए राज्यसभा चुनाव
- राज्यसभा सांसदों का चुनाव जनता नहीं बल्कि विधायक करते हैं।
- चुनाव में अनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली लागू होती है।
- उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में वोट दिए जाते हैं।
- सांसद का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
- हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
फैक्ट फाइल: राज्यसभा
- कुल सदस्य: 245
- निर्वाचित सदस्य: 233
- राष्ट्रपति द्वारा नामित: 12
- सांसद का कार्यकाल: 6 वर्ष
- हर 2 साल में: एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त
नजरें आज के मतदान पर
बिहार की पांचों राज्यसभा सीटों के लिए आज होने वाला मतदान राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है। सभी दलों की नजरें अपने-अपने विधायकों के समर्थन पर टिकी हुई हैं। मतदान के बाद होने वाली मतगणना से यह साफ हो जाएगा कि राज्यसभा में बिहार से कौन-कौन से नेता अगले छह वर्षों के लिए प्रतिनिधित्व करेंगे।
