Tuesday, September 15, 2026

दुनिया भर के शिव भक्तों को बुला रहा बिहार! विराट रामायण मंदिर में स्थापित हुआ विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग

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पूर्वी चंपारणः बिहार की धरती पर एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अध्याय जुड़ गया है, जिसने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड स्थित निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व का अब तक का सबसे विशाल शिवलिंग स्थापित किया गया है। यह विशाल शिवलिंग न केवल अपनी भव्यता से चकित करता है, बल्कि भारतीय आस्था, शिल्पकला और सनातन परंपरा की अद्वितीय शक्ति को भी दर्शाता है। इस ऐतिहासिक स्थापना के साथ ही बिहार वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर एक नए प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में उभरने लगा है।

आखिर कितना विशाल है यह शिवलिंग?

विराट रामायण मंदिर में स्थापित यह शिवलिंग लगभग 33 फीट ऊंचा है, जो इसे अब तक का विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बनाता है। इसका वजन करीब 210 टन है और इसे एक ही विशाल काले ग्रेनाइट पत्थर से तराशा गया है। शिवलिंग के निचले भाग में 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिसके कारण इसे ‘सहस्त्रलिंगम’ कहा जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार का शिवलिंग अत्यंत दुर्लभ होता है और इसे विशेष शास्त्रीय नियमों के अनुसार ही निर्मित किया जाता है।

2300 किलोमीटर की यात्रा: तमिलनाडु से बिहार तक कैसे पहुंचा शिवलिंग?

इस विशाल शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम क्षेत्र में किया गया, जहां कुशल शिल्पकारों ने लगभग 10 वर्षों तक लगातार मेहनत कर इसे तैयार किया। इसके बाद विशेष रूप से बनाए गए 96 पहियों वाले भारी वाहन के माध्यम से इसे करीब 2300 किलोमीटर दूर बिहार लाया गया।

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यात्रा के दौरान देश के कई राज्यों में श्रद्धालुओं ने इसके दर्शन किए और जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यह यात्रा अपने आप में एक चलता-फिरता धार्मिक उत्सव बन गई।

किन अनुष्ठानों के साथ हुई प्राण प्रतिष्ठा?

शिवलिंग की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के साथ की गई। जलाभिषेक के लिए गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, सोनपुर और कैलाश मानसरोवर जैसे पवित्र स्थलों से जल मंगाया गया।

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पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया और हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी व्यापक स्तर पर की गई थीं।

विराट रामायण मंदिर क्या बनने जा रहा है विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक परिसर?

जिस विराट रामायण मंदिर में यह शिवलिंग स्थापित किया गया है, वह लगभग 120 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यहां 18 शिखर, 22 उप-मंदिर, विशाल सभागार और रामायण से जुड़े प्रसंगों को दर्शाने वाली भव्य संरचनाएं बनाई जाएंगी।

मुख्य मंदिर की ऊंचाई लगभग 270 फीट प्रस्तावित है, जिससे यह विश्व के सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल होगा। मंदिर के पूर्ण होने पर यह स्थल अंतरराष्ट्रीय तीर्थ केंद्र के रूप में विकसित होगा।

क्या बदलेगा इससे बिहार का धार्मिक पर्यटन?

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना से बिहार के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे रोजगार, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह शिवलिंग केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान बन चुका है।

पूर्वी चंपारण के विराट रामायण मंदिर में स्थापित यह विशाल शिवलिंग भारत की आध्यात्मिक विरासत और शिल्प परंपरा का अनोखा प्रतीक है। यह उपलब्धि बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। आने वाले समय में यह स्थल देश-विदेश से आने वाले शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा।

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