पटना: खुली जीप, समर्थकों का हुजूम, नारेबाजी और 50 हजार रसगुल्ले। बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में आज 1 अक्टूबर को जो तस्वीर सामने आई, उसने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर की पुरानी राजनीतिक तल्खी को फिर चर्चा में ला दिया। मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर खड़े हैं और जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। अनुज सिंह के नामांकन के दौरान अनंत सिंह उनके साथ खुली जीप में नजर आए और नामांकन के बाद उन्हें माला पहनाकर बधाई भी दी।
यह सिर्फ चुनावी समर्थन का मामला नहीं है। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक दूरी की कहानी करीब 11 साल पुरानी है। 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव से शुरू हुई यह प्रतिद्वंद्विता 2019 के AK-47 मामले के दौरान और तीखी हुई और अब 2026 के विधान परिषद चुनाव में फिर खुलकर सामने है।
2015 में पहली सीधी भिड़ंत
2015 के विधानसभा चुनाव में JDU ने मोकामा से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। परिणाम में अनंत सिंह को 54,005 वोट मिले और नीरज कुमार को 35,657 वोट। अनंत सिंह 18,348 मतों से चुनाव जीत गए।
यही चुनाव दोनों नेताओं के बीच सीधी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का बड़ा पड़ाव बना। इसके बाद भी दोनों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी का सिलसिला जारी रहा।
2019 के AK-47 मामले ने बढ़ाई तल्खी
2019 में अनंत सिंह के पैतृक घर से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने के मामले ने विवाद को एक नया मोड़ दिया। अनंत सिंह ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए नीरज कुमार पर भी आरोप लगाए। नीरज कुमार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
इस मामले में निचली अदालत ने 2022 में अनंत सिंह को दोषी ठहराया था, लेकिन अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इसलिए नीरज कुमार पर साजिश में भूमिका का आरोप अनंत सिंह का राजनीतिक आरोप है, न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं। यही कानूनी स्थिति इस पुराने विवाद को रिपोर्ट करते समय महत्वपूर्ण है।
एक ही पार्टी में लौटे, लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई
2025 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह फिर JDU के टिकट पर मोकामा से मैदान में उतरे और जीत हासिल की। यानी दोनों नेता दोबारा एक ही राजनीतिक दल में आ गए। लेकिन सार्वजनिक रूप से सामने आए घटनाक्रम से यह नहीं कहा जा सकता कि पुरानी व्यक्तिगत तल्खी पूरी तरह खत्म हो गई थी।
2026 में JDU ने पटना स्नातक सीट से मौजूदा MLC और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को फिर उम्मीदवार बनाया। इसके बाद अनंत सिंह ने साफ तौर पर उनके खिलाफ रुख अपना लिया। उन्होंने जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने और उनके लिए प्रचार करने की बात कही। अनंत सिंह ने अपने और नीरज कुमार के बीच विवाद को व्यक्तिगत बताया है।
पार्टी का उम्मीदवार एक तरफ, अनंत का समर्थन दूसरी तरफ
मौजूदा स्थिति की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है। नीरज कुमार JDU के आधिकारिक उम्मीदवार हैं, जबकि अनंत सिंह उसी पार्टी के विधायक होते हुए उनके मुकाबले खड़े जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन कर रहे हैं।
1 अक्टूबर को यह समर्थन सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रहा। अनुज सिंह के नामांकन जुलूस में अनंत सिंह उनके साथ खुली जीप में निकले। उनके समर्थकों ने रास्ते में नारेबाजी की और नामांकन के बाद अनंत सिंह ने अनुज सिंह को माला पहनाई।
इससे पहले अनंत सिंह के आवास पर अनुज सिंह के नामांकन कार्यक्रम के लिए 50 हजार रसगुल्ले तैयार किए जाने की खबर भी सामने आई थी।
आखिर नीरज कुमार से इतनी नाराजगी क्यों?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो अनंत सिंह की नाराजगी को किसी एक घटना से जोड़ना आसान नहीं है। इसके पीछे कम से कम तीन प्रमुख पड़ाव दिखाई देते हैं—2015 का सीधा चुनावी मुकाबला, 2019 का AK-47 प्रकरण और उसके बाद जारी राजनीतिक बयानबाजी।
अनंत सिंह इस विवाद को व्यक्तिगत बताते हैं और नीरज कुमार पर पुराने आरोप लगाते रहे हैं। दूसरी ओर, नीरज कुमार इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते। इसलिए मौजूदा टकराव को सिर्फ पार्टी के भीतर की सामान्य नाराजगी कहना भी पूरे घटनाक्रम को नहीं समझाता।
2026 में स्थिति यह है कि पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब फिर चुनावी मैदान में दिखाई दे रही है। फर्क यह है कि इस बार मुकाबला मोकामा विधानसभा सीट पर नहीं, बल्कि पटना स्नातक विधान परिषद सीट पर है—जहां नीरज कुमार JDU के उम्मीदवार हैं और अनंत सिंह उनके प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय हैं।
बिहार विधान परिषद के इस चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है। अब इस चुनाव में सिर्फ उम्मीदवारों की राजनीतिक लड़ाई ही नहीं, बल्कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच करीब 11 साल से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का मौजूदा अध्याय भी चर्चा में है।
