भोजपुरः चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण के करीब तीन महीने बाद शनिवार को डीएम मनेश कुमार मीणा और एसपी अवधेश दीक्षित बिलौटी गांव पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने भरत तिवारी के पैतृक आवास पर उनके माता-पिता और अन्य परिजनों से मुलाकात की। करीब आधे घंटे तक अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से बातचीत की, उनकी कुशलक्षेम जानी और उन्हें हरसंभव प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया।
परिवार की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने दिया भरोसा
भरत तिवारी के परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने उनके घर पर पुलिस गार्ड तैनात किया है। मुलाकात के दौरान परिजनों ने सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा परिवार को बदनाम करने और परेशान किए जाने की शिकायत भी अधिकारियों से की। डीएम-एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शाहपुर थानाध्यक्ष को लिखित शिकायत लेकर प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया।
परिजनों ने भरत तिवारी की स्मृति में स्मारक निर्माण, आवास परिसर एवं आसपास मिट्टी भराने तथा विस्थापित बिलौटी गांव के सरकारी सहायता से वंचित बाढ़ पीड़ितों के नाम सूची में जोड़ने की मांग भी रखी। अधिकारियों ने इन मांगों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया। साथ ही सीओ को बुलाकर परिवार से जुड़ी कागजी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया गया।
17 जून को पुलिस कार्रवाई में हुई थी मौत
भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की ओर से फायरिंग की गई, जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
वहीं, परिजनों ने पुलिस के इस दावे को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ गया था।
घटना के बाद कई दिनों तक मचा रहा बवाल
भरत तिवारी की मौत के विरोध में स्थानीय लोगों और समर्थकों ने प्रदर्शन किया था। आरा-बक्सर फोरलेन पर सड़क जाम कर विरोध जताया गया। घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी।
पांच पुलिसकर्मी निलंबित, अधिकारियों पर FIR
विवाद के बाद तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। भरत तिवारी की मां के आवेदन पर तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई।
मामले की जांच के लिए बिहार सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। आयोग घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
शनिवार को डीएम और एसपी के परिजनों से मिलने के बाद एक बार फिर इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर परिवार के साथ खड़े रहने का संदेश सामने आया है। वहीं, घटना की न्यायिक जांच जारी है और अब उसकी रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।
