Sunday, September 13, 2026

BRICS Summit 2026: पहलगाम से पश्चिम एशिया तक, नई दिल्ली में क्या-क्या हुआ? जानिए 10 बड़ी बातें

18वें BRICS Summit में आतंकवाद, पश्चिम एशिया, वैश्विक व्यापार और स्थानीय मुद्राओं में भुगतान से लेकर भारत-चीन और भारत-रूस संबंधों तक कई मुद्दे चर्चा में रहे.

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नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति, आतंकवाद, व्यापार, पश्चिम एशिया के संकट और Global South की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। 12 सितंबर से शुरू हुए सम्मेलन में BRICS नेताओं ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच बहुपक्षवाद, कूटनीति और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया। BRICS Summit 2026 के दौरान ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ को अपनाया गया, जिसमें आतंकवाद से लेकर पश्चिम एशिया के संघर्ष और वैश्विक व्यापार तक कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों की सामूहिक स्थिति सामने आई।

1. पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा

भारत के लिए BRICS Summit का सबसे महत्वपूर्ण संदेश आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रुख रहा। BRICS देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की जरूरत पर जोर दिया। यह भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आतंकवाद के मुद्दे को एक बड़े बहुपक्षीय मंच पर सामूहिक समर्थन मिला।

2. पश्चिम एशिया के युद्ध पर चिंता, अधिकतम संयम की अपील

न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई। BRICS देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचने और विवादों का समाधान बातचीत, कूटनीति और बहुपक्षीय प्रयासों के जरिए करने का आह्वान किया।

3. एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों का विरोध

BRICS ने वैश्विक व्यापार में बढ़ते एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताई। सदस्य देशों का कहना है कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

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4. BRICS की अपनी करेंसी पर अभी कोई फैसला नहीं

BRICS Summit से पहले साझा मुद्रा को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन भारत ने साफ किया कि फिलहाल BRICS की कोई साझा करेंसी शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि सदस्य देशों के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल और सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा जारी है।

यानी BRICS फिलहाल डॉलर को हटाने के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान के विकल्प बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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5. मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर

सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को लेकर बातचीत की। शी ने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझा विकास की बात कही, जबकि भारत की ओर से सीमा पर शांति और पूर्व में हुए समझौतों के पालन को महत्वपूर्ण बताया गया।

यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण रही क्योंकि दोनों देशों के संबंध लंबे समय से सीमा विवाद और रणनीतिक अविश्वास के कारण चुनौतीपूर्ण रहे हैं।

6. मोदी-पुतिन की मुलाकात से भारत-रूस रिश्तों को मजबूती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। दोनों देशों ने रणनीतिक संबंधों, व्यापार और वैश्विक परिस्थितियों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन की अनौपचारिक गर्मजोशी भी चर्चा में रही।

7. Global South की आवाज मजबूत करने पर जोर

BRICS ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक संस्थाओं में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रभावी भागीदारी की वकालत की। भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थाओं में सुधार और Global South की अधिक प्रतिनिधित्व वाली भूमिका की मांग करता रहा है।

8. सिर्फ राजनीति नहीं, डिजिटल से लेकर स्वास्थ्य तक सहयोग

भारत की BRICS अध्यक्षता में इस बार एजेंडा को सिर्फ भू-राजनीति तक सीमित नहीं रखा गया। डिजिटल कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, MSME, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स, जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा और युवाओं के कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग पर जोर दिया गया।

9. BRICS के 20 साल पूरे, स्मारक डाक टिकट जारी

2026 BRICS के लिए विशेष वर्ष है, क्योंकि संगठन के गठन को 20 साल पूरे हो रहे हैं। इसी अवसर पर नई दिल्ली में ‘BRICS: Two Decades of Cooperation, 2006–2026’ थीम के साथ दो स्मारक डाक टिकट जारी किए गए। यह BRICS की दो दशक की यात्रा और सहयोग को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।

10. भारत का संदेश—BRICS टकराव का मंच नहीं, सहयोग का मंच

नई दिल्ली सम्मेलन का व्यापक संदेश यह रहा कि BRICS को किसी एक देश या समूह के खिलाफ भू-राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखने के बजाय बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक विकास और Global South की आवाज मजबूत करने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ाया जाए। भारत ने व्यावहारिक सहयोग, स्थिरता और संवाद पर जोर देकर BRICS को अधिक परिणामोन्मुख बनाने की कोशिश की।

क्या निकला BRICS Summit का बड़ा संदेश?

नई दिल्ली से निकला सबसे बड़ा संदेश यही है कि दुनिया तेजी से बदल रही है और BRICS इस बदलाव में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहता है। आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक आवाज, पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान की अपील, व्यापारिक संरक्षणवाद का विरोध, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान और Global South को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग—ये सभी संकेत बताते हैं कि BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है।

हालांकि, सदस्य देशों के बीच रणनीतिक मतभेद भी मौजूद हैं। ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विविध हितों वाले देशों को एक साझा एजेंडे पर साथ रखते हुए BRICS को व्यावहारिक और प्रभावी मंच बनाया जाए। नई दिल्ली घोषणा इसी दिशा में भारत की कूटनीतिक कोशिश का महत्वपूर्ण परिणाम मानी जा रही है।

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