पटनाः चंपारण सत्याग्रह के महानायक पंडित राजकुमार शुक्ल की 151वीं जयंती के मौके पर सुप्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी को कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पं. राजकुमार शुक्ल शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करने के बाद कल्पना पटवारी ने पंडित राजकुमार शुक्ल और चंपारण सत्याग्रह से अपने पुराने जुड़ाव का जिक्र किया और कहा कि आने वाले दिनों में वह चंपारण सत्याग्रह पर एक नई योजना के तहत काम करेंगी।
पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित 151वीं जयंती समारोह में कला के अलावा साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया। डॉ. दिवाकर राय को साहित्य, पुष्यमित्र को पत्रकारिता और गोपाल कृष्ण मोदी को समाजसेवा के क्षेत्र में पं. राजकुमार शुक्ल शिखर सम्मान प्रदान किया गया।
2017 में चंपारण पहुंचीं, वहीं से शुरू हुआ नया सफर
सम्मान समारोह में कल्पना पटवारी ने कहा कि पंडित राजकुमार शुक्ल और चंपारण सत्याग्रह से उनका गहरा नाता रहा है। उन्होंने बताया कि 2017 में चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के दौरान वह पंडित राजकुमार शुक्ल के गांव गई थीं।
चंपारण की धरती और वहां के संघर्ष की कहानी ने उन्हें इस ऐतिहासिक विषय पर काम करने के लिए प्रेरित किया। कल्पना पटवारी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें देश के इतिहास से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर काम करने का अवसर मिला।
उन्होंने पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश भट्ट के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि संस्थान लगातार चंपारण सत्याग्रह और उससे जुड़े इतिहास को सामने लाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
कल्पना पटवारी ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में चंपारण सत्याग्रह पर एक नई योजना के तहत काम करेंगी। उनके इस ऐलान ने सम्मान समारोह को महज पुरस्कार वितरण से आगे एक नए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रयास की संभावना से जोड़ दिया।
कला के साथ इतिहास से भी जुड़ी कल्पना पटवारी
कल्पना पटवारी भोजपुरी और देश की विभिन्न भाषाओं के लोक संगीत के लिए जानी जाती हैं। चंपारण सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक विषय से उनका जुड़ाव यह बताता है कि लोककला के माध्यम से इतिहास और सामाजिक सरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा सकती है।
पंडित राजकुमार शुक्ल के नाम से मिला सम्मान उनके लिए इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उनके अनुसार चंपारण सत्याग्रह पर काम करने की प्रेरणा उन्हें स्वयं चंपारण की धरती तक पहुंचने के बाद मिली थी।
साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा में भी सम्मान
समारोह में डॉ. दिवाकर राय को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पं. राजकुमार शुक्ल शिखर सम्मान दिया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में पुष्यमित्र और समाजसेवा के क्षेत्र में गोपाल कृष्ण मोदी को सम्मानित किया गया।
चारों सम्मान कला, साहित्य, पत्रकारिता और समाजसेवा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करते हैं।
शुक्ल की विरासत से जुड़ने की कोशिश
पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि पंडित शुक्ल के नाम से अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हस्तियों को जोड़ा गया। इससे चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक विरासत को साहित्य, कला, पत्रकारिता और सामाजिक कार्यों के जरिए आगे ले जाने का संदेश मिला।
कल्पना पटवारी का आने वाले दिनों में चंपारण सत्याग्रह पर नई योजना के तहत काम करने का ऐलान इस समारोह की सबसे महत्वपूर्ण बातों में रहा। इससे संकेत मिलता है कि पंडित राजकुमार शुक्ल और चंपारण की कहानी अब सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोककला और संस्कृति के माध्यम से भी उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश जारी रहेगी।
