भोजपुरः शाहपुर थाना क्षेत्र के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण के बाद भोजपुर पुलिस अब उन लोगों पर शिकंजा कसने में जुट गई है, जो इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर पुलिस और प्रशासन के खिलाफ भड़काऊ माहौल बनाने में लगे हैं। इसी कड़ी में पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकी देने और अफवाह फैलाने के आरोपी दीपक दीक्षित उर्फ दीपक पंडित (Deepak Pandit) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सोशल मीडिया पर धमकी और उकसावे का आरोप
भोजपुर पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पुलिस मुठभेड़ के बाद आरोपी लगातार सोशल मीडिया हैंडल्स और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए बयान जारी कर रहा था। इन बयानों में पुलिस अधिकारियों को तय समय के भीतर जान से मारने की खुली धमकियां दी गईं, साथ ही आम जनता में भय और भ्रम फैलाने की कोशिश भी की गई।
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अभियान का दावा
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पुलिस अधीक्षक भोजपुर समेत कई अधिकारियों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाया और बिना किसी सत्यापित आधार के गंभीर आरोप लगाए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऐसे बयान न सिर्फ कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने का माध्यम भी बन सकते हैं।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
जांच में यह भी सामने आया है कि दीपक दीक्षित का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है। उसके खिलाफ मध्य प्रदेश के विभिन्न थानों में छेड़छाड़, दुष्कर्म, फोटो-वीडियो वायरल करने और परिजनों को जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
फिलहाल भोजपुर पुलिस आरोपी के वायरल वीडियो, धमकी भरे बयानों और डिजिटल कंटेंट की तकनीकी व कानूनी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भरत तिवारी प्रकरण से बढ़ा मामला
इस नए घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भरत तिवारी प्रकरण अब केवल एक मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए चल रही बयानबाजी और पुलिस को चुनौती देने वालों पर भी प्रशासन की नजर टिकी है।
