पटना: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कांड को लेकर बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। Indian National Congress के बिहार प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कथित एनकाउंटर को हत्या करार देते हुए बिहार पुलिस और भोजपुर एसपी राज की भूमिका पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “बिहार पुलिस अब सुपारी किलर गिरोह में तब्दील हो चुकी है”, जिसकी गहनाता से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एसपी की देरी पर उठे सवाल
Asit Nath Tiwari ने कहा कि भरत तिवारी की मौत के आठ दिन बाद Bhojpur SP Raj पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, वह भी रात के अंधेरे में। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देशभर से लोग, लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेता और कई चर्चित हस्तियां परिवार से मिलने पहुंचीं, तब स्थानीय पुलिस अधीक्षक आखिर आठ दिन तक कहाँ थे।
STF बुलाने के फैसले पर घेरा
कांग्रेस प्रवक्ता ने बिहार पुलिस और Special Task Force Bihar (STF) की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर आरोपी को पकड़ना ही मकसद था, तो स्थानीय थाना पुलिस, रिजर्व फोर्स और आसपास के थानों की मदद ली जा सकती थी। उन्होंने पूछा कि पटना से एसटीएफ बुलाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी।
‘गिरफ्तारी नहीं, हत्या की थी योजना’
तिवारी ने आरोप लगाया कि यह पूरा ऑपरेशन आरोपी Bharat Tiwari को जिंदा पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे खत्म करने की सोची-समझी योजना थी। उन्होंने कहा कि अगर जिला पुलिस चाहती, तो कई थानों की संयुक्त कार्रवाई से आरोपी को काबू किया जा सकता था।
जांच एजेंसी पर ही उठे सवाल
असित नाथ तिवारी ने कहा कि इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन पर हत्या करवाने का आरोप है, उन्हीं के हाथ में जांच की जिम्मेदारी है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बताया।
जनता से दबाव बनाने की अपील
कांग्रेस प्रवक्ता ने लोगों से अपील की कि अगर इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो असली दोषियों को बचा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज अगर आवाज़ नहीं उठी, तो भविष्य में किसी और परिवार के साथ भी ऐसा हो सकता है।
अब पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और पुलिस प्रशासन पर हमलावर है। हालांकि अब तक Bihar Police या भोजपुर प्रशासन की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भरत तिवारी का कथित एंकाउंटर अब एक समान्य घटना नहीं, बल्कि बिहार में कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग और जवाबदेही पर बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है।
