Thursday, June 25, 2026

राम मंदिर ट्रस्ट मामला: याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 29 जून को फिर होगा उल्लेख

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नई दिल्लीः अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंदा संग्रह में गड़बड़ी की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह इस मामले का 29 जून को पुनः उल्लेख करे।

सुप्रीम कोर्ट में मामला किस बेंच के सामने आया

यह मामला न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष आया था। याचिकाकर्ता की ओर से आग्रह किया गया कि जनहित याचिका को जल्द से जल्द सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि इसमें सार्वजनिक धन और श्रद्धालुओं के दान के उपयोग से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में क्या मांग की गई है

यह याचिका अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि ट्रस्ट के कामकाज, प्रशासन और वित्तीय लेन-देन की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि सीबीआई की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) या किसी सक्षम जांच एजेंसी को यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनकी याचिका पंजीकृत हो चुकी है, लेकिन उसे अभी तक सुनवाई की तारीख नहीं मिली है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि याचिका में कोई तकनीकी कमी नहीं है, तो रजिस्ट्री उसे आगे की प्रक्रिया के लिए भेजेगी और सूचीबद्ध करेगी।

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कोर्ट का निर्देश

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री से संपर्क करना चाहिए। पीठ ने अंततः निर्देश दिया कि मामले का 29 जून को फिर से उल्लेख किया जाए, ताकि उस समय इसे सूचीबद्ध करने पर विचार किया जा सके।

याचिका में पारदर्शिता और ऑडिट की मांग

याचिका में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट से यह आग्रह भी किया गया है कि वे एक मजबूत नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट व्यवस्था स्थापित करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दान राशि का उपयोग पारदर्शिता के साथ हो और श्रद्धालुओं व दानदाताओं का भरोसा बना रहे।

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याचिकाकर्ताओं का तर्क

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि भले ही कथित अनियमितताओं के आरोप अभी सिद्ध न हुए हों, लेकिन ऐसी रिपोर्टों ने आम जनता और श्रद्धालुओं के बीच चिंता पैदा की है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी तरह की आशंका दूर हो सके।

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