पटनाः बिहार में सरकारी टेंडरों, अफसरशाही और कथित ‘सेटिंग’ के खेल का बड़ा चेहरा आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया है। लंबे समय से सत्ता और सिस्टम के गलियारों में चर्चित नाम रहे रिशु श्री को स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार देर रात हुई इस कार्रवाई के बाद उसे विजिलेंस कोर्ट में पेश किया गया।
रिशु श्री की गिरफ्तारी को सिर्फ एक ठेकेदार की गिरफ्तारी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार के उस कथित नेटवर्क पर बड़ी चोट के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें सरकारी टेंडर, अफसरशाही, कमीशनखोरी और संरक्षण का खेल लंबे समय से चलता रहा है।
घंटों चली छापेमारी, करोड़ों के दस्तावेज मिले
SVU की टीम ने पटना स्थित रिशु श्री के ठिकानों पर घंटों तक छापेमारी की। इस दौरान करोड़ों रुपये के जेवरात, नकदी, बैंकिंग दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई अहम कागजात बरामद किए गए। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री सरकारी टेंडरों में हेरफेर कर अपनी कंपनियों को फायदा पहुंचाता था और इसके बदले प्रभावशाली लोगों को कथित तौर पर सुविधाएं उपलब्ध कराता था।
सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियों को ऐसे कई डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच गहरे संबंधों की परतें खुल सकती हैं।
डेढ़ साल से ED के रडार पर था रिशु
रिशु श्री पिछले डेढ़ साल से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की निगरानी में था। मनी लॉन्ड्रिंग, सरकारी टेंडरों में गड़बड़ी और कथित कमीशनखोरी के आरोपों को लेकर ED लगातार उसके खिलाफ जांच कर रही थी। पिछले साल जून और नवंबर में बिहार समेत कई राज्यों में उसके ठिकानों पर छापेमारी हुई थी।
उन छापों में नकदी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले थे। जांच एजेंसियों को शक है कि सरकारी विभागों में टेंडर पहले से ‘मैनेज’ किए जाते थे और इसके एवज में बड़े स्तर पर पैसों का लेनदेन होता था।
अफसरों की विदेश यात्राओं से बढ़ी थी चर्चा
रिशु श्री का नाम सबसे ज्यादा तब चर्चा में आया, जब जांच में कुछ आईएएस अधिकारियों से उसकी कथित नजदीकियों की बातें सामने आईं। आरोप लगे कि कुछ अधिकारियों की विदेश यात्राओं, लग्जरी सुविधाओं और निजी खर्चों का इंतजाम भी रिशु श्री की ओर से किया गया।
सूत्र बताते हैं कि जांच एजेंसियां अब उन यात्राओं, खर्चों और लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं, जिनसे यह पता चल सके कि रिशु श्री की पहुंच आखिर कितनी गहरी थी और उसके नेटवर्क में कौन-कौन शामिल थे।
क्या अब बड़े नामों तक पहुंचेगी जांच?
रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद बिहार के नौकरशाही गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ ‘टेंडर किंग’ तक सीमित रहेगी, या फिर उन अफसरों और सफेदपोश चेहरों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने उसे संरक्षण दिया।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि बिना मजबूत संरक्षण के कोई भी व्यक्ति इतने बड़े स्तर पर सरकारी टेंडरों का नेटवर्क खड़ा नहीं कर सकता। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां सिर्फ एक चेहरे पर कार्रवाई कर रुक जाएंगी या फिर उस पूरे सिस्टम की परतें खोलेंगी, जिसने वर्षों तक सरकारी टेंडरों को कथित कमाई का जरिया बना रखा था।
फिलहाल SVU और ED दोनों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। क्योंकि असली सवाल रिशु श्री की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन चेहरों का है जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर पूरे खेल को ताकत देते रहे।
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