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Bihar Budget 2026-27: 12 मिनट का भाषण, 3.47 लाख करोड़ का बजट – क्या सच में बदलेगा बिहार?

पटना: विधानसभा में इस बार बजट भाषण की लंबाई से ज्यादा उसकी दिशा चर्चा में रही। Bihar budget 2026-27 के दौरान वित्त मंत्री विजेन्द्र यादव ने करीब 12 मिनट में अपना बजट भाषण पूरा किया, लेकिन इस संक्षिप्त प्रस्तुति में ₹3,47,589 करोड़ से अधिक के विशाल बजट का खाका सामने रखा गया। आकार के लिहाज़ से यह बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है, जिसे सरकार ने विकास, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक कदम बताया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर: तेज रफ्तार विकास की नींव

बजट में पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर सड़क, पुल और परिवहन ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य में पाँच नए एक्सप्रेस-वे बनाने की घोषणा की गई है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा आसान होगी और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण सड़कों के उन्नयन और शहरी कनेक्टिविटी सुधार की योजनाएँ भी शामिल हैं, जो व्यापारिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।

कृषि: किसानों की आय बढ़ाने की कोशिश

कृषि क्षेत्र को बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा मिला है। राज्य के लाखों किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है, जिससे उनकी सालाना आय समर्थन राशि में बढ़ोतरी होगी। सरकार का दावा है कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक खेती तकनीकों और कृषि रोडमैप के अगले चरण पर भी काम करने की योजना है।

महिला सशक्तिकरण: आर्थिक भागीदारी पर जोर

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की बात बजट में प्रमुखता से की गई है। सरकार का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवार और समाज दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव आएगा।

शिक्षा और स्वास्थ्य: मानव संसाधन पर निवेश

शिक्षा क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के सुधार, नए संस्थानों के विकास और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की योजनाएँ शामिल हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, नई चिकित्सा सुविधाओं के विकास और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रावधान किए गए हैं। इन कदमों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए बुनियादी निवेश माना जा रहा है।

रोजगार और उद्योग: युवाओं पर फोकस

युवाओं के लिए रोजगार सृजन को बजट का अहम लक्ष्य बताया गया है। सरकार ने बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की रूपरेखा रखी है, जिसमें सरकारी नौकरियों के साथ निजी निवेश को बढ़ावा देने की नीति शामिल है। बेहतर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक माहौल के जरिए राज्य को निवेश के अनुकूल बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

सकारात्मक संकेत

बजट का आकार और विकास पर जोर इसे महत्वाकांक्षी बनाता है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि से दीर्घकालिक विकास की संभावनाएँ मजबूत होती दिखती हैं। किसानों, महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई योजनाएँ सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम मानी जा रही हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ा खर्च भविष्य के मानव संसाधन को बेहतर बनाने की दिशा में निवेश माना जा रहा है।

चुनौतियाँ भी कम नहीं

हालाँकि बजट की घोषणाएँ बड़ी हैं, लेकिन उनका ज़मीन पर प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती रहेगा। प्रशासनिक क्षमता, पारदर्शिता और समयबद्ध खर्च सुनिश्चित करना जरूरी होगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजकोषीय संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा, खासकर अगर अनुमानित राजस्व संग्रह पूरा नहीं हुआ। विपक्षी दलों ने भी बजट को घोषणापरक बताते हुए इसके वास्तविक नतीजों पर सवाल उठाए हैं।

बदलाव की शुरुआत या सिर्फ महत्वाकांक्षी घोषणा

सिर्फ 12 मिनट के भाषण में पेश हुआ यह विशाल बजट बिहार को तेज विकास पथ पर ले जाने का रोडमैप पेश करता है। इसमें सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि योजनाएँ कागज़ से निकलकर ज़मीन पर कितनी तेजी और प्रभाव के साथ उतरती हैं। यही तय करेगा कि यह बजट बदलाव की शुरुआत है या सिर्फ एक महत्वाकांक्षी घोषणा।

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