एकतरफ़ा मोहब्बत’ और भारत रत्न: केसी त्यागी–नीतीश के बीच शिवानंद तिवारी की शायराना एंट्री

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पटनाः बिहार की राजनीति में कभी-कभी बयान नहीं, जुमले इतिहास लिखते हैं। राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने जब केसी त्यागी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रिश्ते को “एकतरफ़ा मोहब्बत” कह दिया, तो यह सिर्फ़ तंज नहीं रहा, बल्कि सियासी इज़हार बन गया। फेसबुक पर डाली गई यह पंक्ति पढ़ते ही साफ़ हो गया कि बात निजी यादों से निकलकर सीधे सत्ता और सम्मान की राजनीति तक जाने वाली है।

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शिवानंद तिवारी ने जब कहा—“केसी त्यागी नीतीश जी के आशिक़ हैं, लेकिन यह एकतरफ़ा मोहब्बत की तरह है”, तो यह महज़ एक भावनात्मक टिप्पणी नहीं रही, बल्कि सत्ता, निष्ठा और सम्मान की राजनीति पर सीधा तंज बन गई। यह टिप्पणी शिवानंद तिवारी के नाम से संचालित फेसबुक पेज पर सामने आई और देखते ही देखते सियासी बहस का केंद्र बन गई।

शिवानंद तिवारी ने पोस्ट में उन दिनों को याद किया जब नीतीश कुमार की सोच, उनका संदेश और उनका मूड—तीनों केसी त्यागी के शब्दों से पहचाने जाते थे। पत्रकारों को अगर किसी बात की पुष्टि करनी होती थी तो वे मुख्यमंत्री आवास नहीं, केसी त्यागी का नंबर डायल करते थे। संसद के केंद्रीय हॉल में केसी त्यागी की मौजूदगी हमेशा भीड़ के साथ होती थी—शेर-ओ-शायरी, पुराने राजनीतिक किस्से और खास अंदाज़ में सुनाने की कला, सब कुछ उनका ट्रेडमार्क था।

तिवारी यह भी स्वीकार करते हैं कि वे और केसी त्यागी एक-दूसरे के प्रशंसक रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार को वे “ख़ास ढांचे में बने नेता” बताते हैं। इसी क्रम में उन्होंने यह याद दिलाया कि जब उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, तो उसकी चिट्ठी भी केसी त्यागी से ही जारी करवाई गई। यह पंक्ति सिर्फ़ निजी पीड़ा नहीं, बल्कि सत्ता के संचालन के तरीके पर भी एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी मानी जा रही है।

पोस्ट का सबसे राजनीतिक और सबसे तीखा हिस्सा तब सामने आता है जब शिवानंद तिवारी, केसी त्यागी द्वारा नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर सवाल उठाते हैं। वे याद दिलाते हैं कि एक दौर में केसी त्यागी ने नीतीश कुमार के लिए कहा था—“जैसे हवा को मुट्ठी में नहीं बांधा जा सकता और फूलों की खुशबू को फैलने से रोका नहीं जा सकता, वैसे ही नीतीश कुमार के सुशासन और विचारों की गूंज को बिहार की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता।”

यह वही दौर था जब नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा था और उस शायराना कसीदे पर राजनीतिक हलकों में तालियां बजी थीं।

लेकिन शिवानंद तिवारी लिखते हैं कि भारत रत्न की बात उन्हें “हज़म नहीं हुई।” उनका सवाल साफ़ है—क्या आज यह मांग श्रद्धा है या फिर तारीफ़ के लिबास में लिपटा व्यंग्य? तिवारी यह संकेत भी देते हैं कि शायद केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न का पात्र बताकर उन पर ही सियासी कटाक्ष कर दिया हो। हालांकि, इस सवाल का जवाब वे खुद नहीं देते, बल्कि इसे केसी त्यागी पर छोड़ देते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि शिवानंद तिवारी ने पूरी पोस्ट में केसी त्यागी के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही अपमानजनक भाषा पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ़ लिखा कि केसी त्यागी के लिए जिस तरह के शब्दों का प्रयोग हो रहा है, वह उन्हें अच्छा नहीं लगा। यह टिप्पणी बताती है कि तंज के बीच भी एक सियासी मर्यादा रेखा खींची गई है।

केसी त्यागी प्रकरण पर लेटेस्ट अपडेट

विवाद गहराने के बाद केसी त्यागी ने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की बात किसी भी तरह का व्यंग्य नहीं है। उनके मुताबिक, यह नीतीश कुमार के लंबे सार्वजनिक जीवन, सामाजिक न्याय की राजनीति और सुशासन के योगदान की गंभीर राजनीतिक अभिव्यक्ति है। केसी त्यागी ने यह भी कहा कि बयान को संदर्भ से काटकर देखने की कोशिश की जा रही है।

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जेडीयू के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी फिलहाल इस मुद्दे को बढ़ाने के मूड में नहीं है, लेकिन राजद नेताओं की प्रतिक्रियाओं से महागठबंधन के भीतर छुपी असहजता एक बार फिर सतह पर आ गई है।

सियासत के मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘एकतरफ़ा मोहब्बत’ से शुरू हुई यह बहस सिर्फ़ केसी त्यागी और नीतीश कुमार के रिश्ते तक सीमित नहीं है। यह दरअसल जेडीयू-राजद के बीच भरोसे, भूमिका और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान का संकेत है। भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान को लेकर उठी यह सियासी शायरी आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और तीखे जुमलों की भूमिका तैयार कर सकती है।

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