पटनाः जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय महासचिव रहे वरिष्ठ नेता केसी त्यागी (KC Tyagi) के एक बयान ने पार्टी के भीतर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मामला इतना बढ़ गया कि पार्टी नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से यह कहना पड़ा कि केसी त्यागी के बयान से जेडीयू का कोई लेना-देना नहीं है और उनके साथ अब कोई औपचारिक संबंध नहीं रह गया है। सवाल यह है कि आखिर केसी त्यागी ने ऐसा क्या कह दिया, जिससे पार्टी के अंदर ही घमासान मच गया?
क्या है पूरा विवाद
दरअसल, केसी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग कर दी। उन्होंने नीतीश कुमार के सामाजिक न्याय, सुशासन, विकास कार्यों और बिहार के पुनर्निर्माण में योगदान का हवाला देते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के योग्य बताया।
यह मांग उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उठाई, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। केसी त्यागी का कहना था कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस बयान को संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ माना।
पार्टी क्यों हुई नाराज़
जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील और राष्ट्रीय स्तर की मांग पार्टी के आधिकारिक मंच से ही रखी जानी चाहिए थी। बिना संगठन से चर्चा किए सार्वजनिक बयान देने से पार्टी की रणनीति और गठबंधन संतुलन पर असर पड़ सकता है।
KC Tyagi के बयान पर JDU प्रवक्ताओं की सफाई
पार्टी प्रवक्ताओं ने साफ किया कि केसी त्यागी का बयान पार्टी की आधिकारिक राय नहीं है। जेडीयू का इस मांग से कोई संबंध नहीं है। केसी त्यागी के साथ पार्टी के औपचारिक रिश्ते समाप्त हो चुके हैं इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि जेडीयू अब इस मुद्दे पर किसी तरह का भ्रम नहीं रखना चाहती।
पुराने बयान भी बने वजह
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब केसी त्यागी के बयान से जेडीयू असहज हुई हो। इससे पहले भी वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं।
इन बयानों को लेकर पार्टी नेतृत्व पहले ही नाराज़ चल रहा था। भारत रत्न की मांग ने इस नाराज़गी को खुलकर सामने ला दिया।
गठबंधन और चुनावी सियासत का दबाव
जेडीयू इस समय एनडीए का हिस्सा है और आने वाले समय में बिहार की राजनीति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी ऐसे बयान से बचना चाहता है, जिससे गठबंधन सहयोगियों के साथ गलत संदेश जाए, विपक्ष को राजनीतिक हमला करने का मौका मिले और पार्टी के अंदर अनुशासन पर सवाल खड़े हों
नीतीश कुमार जैसे नेता के लिए भारत रत्न की मांग को जेडीयू नेतृत्व ने सही समय और सही मंच से जुड़ा विषय माना, न कि व्यक्तिगत पहल का।
केसी त्यागी का पक्ष
केसी त्यागी ने यह जरूर कहा कि उनका बयान उनकी निजी सोच है और इसका उद्देश्य नीतीश कुमार के योगदान को सम्मान दिलाना था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका मकसद पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व इस सफाई से संतुष्ट नहीं दिखा।
सम्मान की मांग बनी संगठनात्मक चुनौती
केसी त्यागी का बयान जेडीयू के लिए सिर्फ एक बयान भर नहीं था, बल्कि यह पार्टी अनुशासन, नेतृत्व नियंत्रण और गठबंधन राजनीति से जुड़ा गंभीर मामला बन गय भारत रत्न की मांग भले ही नीतीश कुमार के सम्मान से जुड़ी हो, लेकिन उसे उठाने का तरीका और समय पार्टी को रास नहीं आया। नतीजतन, जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया कि केसी त्यागी के बयान उनकी पार्टी लाइन का हिस्सा नहीं हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखा दिया कि जेडीयू फिलहाल किसी भी तरह की आंतरिक असहमति या सार्वजनिक भ्रम से बचना चाहती है, चाहे इसके लिए उसे अपने पुराने और वरिष्ठ नेताओं से ही दूरी क्यों न बनानी पड़े।