महागबंधन में सीटें फाइनल, कांग्रेस घुटनों पर, टूट के रास्ते पर NDA

अजय वर्मा

पटना। मुकेश सहनी की वीआईपी के लिए महागठबंधन की आस जोहना बेकार साबित हुई क्योंकि सीट शेयरिंग की घोषणा होते ही तेजस्वी का साथ छोड़ने की न केवल घोषणा की बल्कि लालू पुत्र पर पीठ में खंजर घोंप देने का आरोप लगाकर प्रेस कांफ्रेंस में हुंगामा भी किया। घोषणा ने यह भी साबित कर दिया कि कांग्रेस घुटनों पर आ गई है।

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कांग्रेस का लीलडाउन

कांग्रेस समेत सभी सहयोगी दलों ने तेजस्वी को सीएम फेस मान कर महागठबंधन का नेतृत्व सौंप दिया है। पहले कांग्रेस ही बायें—दायें कर रही थी। महागठबंधन की प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता अविनाश पांडे ने कहा है कि आंतरिक मतभेद के बावजूद कांग्रेस और राजद एकजुट है और धर्मनिरपेक्ष नीति पर चलने वाले सभी दल एक साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि 2015 में भी एनडीए के खिलाफ एक बड़ा गठबंधन बना था लेकिन धोखे से नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ सरकार बना ली। जहां तक सीटों की बात है, राजद के खाते में 144 सीटें आई है जिसमें उसे अपने खाते से जेएमएम और वीआईपी को सीट देनी होगी। कांग्रेस को 70, सीपीआई माले को 19, सीपीआई को 6 और सीपीएम को 4 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को बोनस में बाल्मीकिनगर संसदीय सीट दी गई है जहां उपचुनाव हो रहे हैं। मुकेश सहनी अधिक सीट के साथ—साथ डिप्टी सीएम का पद मांग रहे थे।

चिराग के रुख से NDA में सांसत

उधर चिराग पासवान के बगावती रुख से एनडीए सांसत में है। वे आज ही अंतिम निर्णय करना चाहते थे लेकिन रामविलास पासवान की तबीयत बिगड़ने पर बैठक रद्द कर दी गई। लेकिन राजनीतिक संकेत बता रहे हैं कि लोजपा जदयू मुक्त एनडीए के साथ रहना चाहती है। इसलिए जदयू और भाजपा में तालमेल नहीं हो सका है। दोनों अलग होकर भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

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समाचार संपादक
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