Sunday, February 8, 2026
Homeविचारअभय वाणीNEET छात्रा मौत केस: मीडिया को नसीहत देती मैथिली ठाकुर, पर सिस्टम...

NEET छात्रा मौत केस: मीडिया को नसीहत देती मैथिली ठाकुर, पर सिस्टम की गंभीरता का क्या?

पटनाः शंभु गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की रहस्यमय मौत का मामला इन दिनों पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी कड़ी में अलीनगर की नवनिर्वाचित विधायक मैथिली ठाकुर का मीडिया को दिया गया बयान भी सुर्खियों में है। NEET Student Death Case को लेकर हर तरफ से यह कहा जा रहा है कि मामला “बेहद संवेदनशील” है, लेकिन बड़ा सवाल यही है: क्या ज़मीनी कार्रवाई भी उतनी ही गंभीर है, जितनी गंभीरता की बातें की जा रही हैं?

क्या कहा था मैथिली ठाकुर ने?

जब पत्रकारों ने मैथिली ठाकुर से पूछा कि एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते वह इस घटना को किस रूप में देखती हैं, तो उन्होंने सीधे मीडिया की कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि पत्रकारों को पीड़ित परिवार के बारे में सोचते हुए “संजीदगी” से बात करनी चाहिए, और हर किसी के सामने माइक बढ़ाकर सवाल पूछना इस मामले को “हल्का” बना रहा है।

नसीहत मीडिया को, जवाबदेही किससे?

NEET Student Death Case को लेकर विधायक मैथिली ठाकुर की यह बात अपनी जगह सही है कि किसी भी दुखद घटना की रिपोर्टिंग संवेदनशील होनी चाहिए। परिवार की गरिमा, तथ्यों की पुष्टि और भाषा की मर्यादा – ये पत्रकारिता के मूल सिद्धांत हैं।

Read also: सियासी चुप्पी की शर्मनाक परंपरा: UGC से पटना हॉस्टल कांड तक सवालों से भागते नेता

लेकिन यहाँ मूल सवाल यह है कि मीडिया को गंभीरता का पाठ पढ़ाने से पहले क्या सत्ता और प्रशासन ने अपनी गंभीरता ठोस कदमों से साबित की है?

एक माह बाद भी अनुत्तरित हैं ये अहम सवाल

छात्रा की मौत को एक महीना बीत चुका है, लेकिन अभी भी कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं। घटना के हालात को लेकर स्पष्ट और आधिकारिक विवरण का अभाव है। जांच की दिशा और प्रगति पर पारदर्शिता की कमी साफ झलक रही है। हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने को लेकर चुप्पी छाई हुई है। छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई तात्कालिक ठोस घोषणा नहीं की जा सकी है।

जैसा कि मैथिली ठाकुर ने कहा – “मामला संवेदनशील है।” अगर मामला वास्तव में बेहद संवेदनशील है, तो कार्रवाई की रफ्तार भी उसी स्तर की दिखाई देनी चाहिए।

अगर सरकार और सिस्टम की तरह ही मीडिया भी चुप रहता तो?

यह पहलू भी कम महत्वपूर्ण नहीं कि यह मामला व्यापक चर्चा में कैसे आया। स्थानीय स्तर की एक घटना को मीडिया की लगातार कवरेज ने राज्यस्तरीय मुद्दा बना दिया। मीडिया की सक्रियता के कारण छात्रा की मौत को सामान्य या निजी मामला बताकर दबाया नहीं जा सका। प्रशासन को सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देनी पड़ी। राजनीतिक नेतृत्व से सवाल पूछे गए। जांच प्रक्रिया पर जननिगरानी बनी।

Read also: NEET छात्रा केस में CBI की एंट्री! बिहार के पुराने मामलों से उठते नए सवाल

अक्सर छात्रावासों या निजी संस्थानों से जुड़े मामलों में शुरुआती लापरवाही को “आंतरिक मामला” कहकर सीमित करने की कोशिश होती है। लेकिन जब कैमरे और सवाल लगातार बने रहते हैं, तब मामले दब नहीं पाते।

संवेदनशीलता बनाम असहज सवाल

यह समझना बेहद जरूरी है कि असहज सवाल पूछना असंवेदनशीलता नहीं है। असंवेदनशीलता तब होती है जब बिना पुष्टि के बातें फैलाई जाएँ, सनसनीखेज प्रस्तुति की जाए या परिवार की निजी पीड़ा को सार्वजनिक प्रदर्शन बना दिया जाए।

लेकिन यह पूछना कि – मौत किन परिस्थितियों में हुई? जिम्मेदारी किसकी बनती है? सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी क्यों थे? जांच कब तक पूरी होगी? – ये सवाल लोकतांत्रिक जवाबदेही के दायरे में आते हैं।

सरकार की गंभीरता की असली परीक्षा

सरकार और जनप्रतिनिधियों की गंभीरता बयानों से नहीं, फैसलों और कार्रवाई से साबित होती है। इस मामले में असली कसौटी होगी – समयबद्ध और निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार पक्षों पर स्पष्ट कार्रवाई, राज्य के छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, और जांच की प्रगति पर नियमित व पारदर्शी जानकारी।

जब तक ये कदम ज़मीन पर नज़र नहीं आते, तब तक “मामला संवेदनशील है” एक औपचारिक वाक्य भर लगता रहेगा।

नसीहतों से आगे, कार्रवाई की जरूरत

कुल मिलाकर, NEET Student Death Case में मैथिली ठाकुर ने मीडिया को गंभीर रहने की नसीहत दी है। मीडिया को निश्चित रूप से संवेदनशील और मर्यादित रहना चाहिए। लेकिन उतना ही आवश्यक है कि जनप्रतिनिधि और सरकार भी यह दिखाएँ कि उनकी गंभीरता सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार और न्याय सुनिश्चित करने की ठोस कार्रवाई में भी है।

Read also: पटना हॉस्टल कांड: दरिंदगी के बाद सवालों के कटघरे में पुलिस, डॉक्टर और पूरा सिस्टम

क्योंकि यह बहस मीडिया बनाम नेता की नहीं है – यह बहस है एक छात्रा की संदिग्ध मौत, सच्चाई तक पहुँचने की ज़रूरत, और न्याय की उम्मीद की। और जब तक जवाब स्पष्ट नहीं होते, सवाल उठते रहना ही लोकतंत्र की असली गंभीरता है।

अभय पाण्डेय
अभय पाण्डेय
आप एक युवा पत्रकार हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को बतौर संवाददाता अपनी सेवाएं दे चुके अभय ने वर्ष 2004 में PTN News के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। इनकी कई ख़बरों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं।

Must Read

spot_img