Saturday, April 4, 2026

बिहार में 17 अप्रैल से शुरू होगी स्व-गणना, जानिए पूरी प्रक्रिया और देशभर में स्थिति

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पटनाः देश में स्व-गणना 2027 (Self-Enumeration 2027) की शुरुआत हो चुकी है। बिहार में 17 अप्रैल से स्व-गणना (Self Enumeration) की शुरुआत होने जा रही है। यह पहल जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके तहत आम नागरिक स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपने और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

क्या है स्व-गणना?

स्व-गणना एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसमें नागरिक खुद अपनी जनसांख्यिकीय (demographic) और सामाजिक-आर्थिक जानकारी ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से भरते हैं। इससे पारंपरिक तरीके में होने वाली त्रुटियों को कम किया जा सकता है।

देश में कब से शुरू हुई यह पहल?

भारत में स्व-गणना की अवधारणा पहली बार जनगणना 2021 के तहत लागू करने की योजना बनाई गई थी। इस प्रक्रिया का संचालन Registrar General of India के अधीन किया जाना था।

हालांकि, COVID-19 महामारी के कारण जनगणना की पूरी प्रक्रिया स्थगित हो गई, जिससे स्व-गणना भी समय पर लागू नहीं हो सकी। अब इसे जनगणना 2027 के तहत चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

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देशभर में कैसे लागू हो रही है प्रक्रिया?

Self-Enumeration 2027 पूरे देश में एक साथ लागू नहीं की जा रही है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 30 दिन का हाउस-टू-हाउस सर्वे होगा, जिससे पहले 15 दिन की स्व-गणना विंडो दी जाती है।

यानी, कुछ राज्यों में यह प्रक्रिया 1 अप्रैल से ही शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ में अलग-अलग तारीखों-जैसे 16 या 17 अप्रैल से शुरू हो रही है। वहीं, कई स्थानों पर इसकी शुरुआत अभी बाकी है। शुरुआती चरण में अंडमान-निकोबार, कर्नाटक और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों/क्षेत्रों में स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है।

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बिहार में क्या है योजना?

बिहार सरकार ने 17 अप्रैल से इस प्रक्रिया को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को सीधे जनगणना प्रक्रिया से जोड़ना और अधिक सटीक डेटा संग्रह करना है।

यह पहल राज्य में डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत डेटा आधार तैयार करेगी।

अन्य राज्यों में स्थिति

देशभर में स्व-गणना अभी एक साथ लागू नहीं हुई है। कई राज्य अभी तैयारी और तकनीकी ढांचे के विकास के चरण में हैं, जबकि कुछ स्थानों पर इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

अधिकांश राज्यों में फिलहाल पारंपरिक जनगणना पद्धति ही लागू है। हालांकि, केंद्र सरकार भविष्य में इसे पूरे देश में पूरी तरह लागू करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल और नागरिक-केन्द्रित बनाया जा सके।

स्व-गणना की प्रक्रिया

स्व-गणना में भाग लेने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

  1. पंजीकरण (Registration): आधिकारिक पोर्टल- https://se.census.gov.in/ या ऐप पर मोबाइल नंबर या अन्य पहचान माध्यम से रजिस्ट्रेशन करें।
  2. लॉगिन (Login): OTP या पासवर्ड के जरिए लॉगिन करें।
  3. जानकारी भरना:
  • परिवार के सभी सदस्यों का विवरण
  • नाम, आयु, लिंग, शिक्षा, व्यवसाय
  • आवास और सुविधाओं से संबंधित जानकारी
  1. सत्यापन (Verification): आवश्यकता होने पर दस्तावेज़ अपलोड या जानकारी की पुष्टि करें।
  1. सबमिशन: सभी विवरण जांचकर फॉर्म जमा करें और संदर्भ संख्या प्राप्त करें।

नागरिक कैसे निभाएं भागीदारी?

  • समय पर पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज करें
  • सही और पूरी जानकारी दें
  • परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक करें
  • डिजिटल सुविधा न होने पर सहायता केंद्रों की मदद लें

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

  • डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी
  • समय और संसाधनों की बचत होगी
  • नागरिकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी
  • डिजिटल इंडिया की दिशा में मजबूती मिलेगी

बिहार में 17 अप्रैल से शुरू हो रही स्व-गणना केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता को बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। यदि लोग इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो यह न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में डिजिटल जनगणना प्रणाली के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।

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