नई दिल्लीः आज से से देश में ATM और डिजिटल बैंकिंग से जुड़े नए नियम लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की वित्तीय आदतों पर पड़ रहा है (ATM transaction charges India)। अब कैश निकालना पहले जितना आसान और बिना सोचे किया जाने वाला काम नहीं रह गया है, क्योंकि हर ट्रांजैक्शन के साथ फ्री लिमिट और चार्ज का हिसाब जुड़ गया है।
फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट की नई व्यवस्था
नए नियमों के अनुसार ग्राहक अपने बैंक के ATM से आमतौर पर महीने में 5 ट्रांजैक्शन तक मुफ्त लेन-देन कर सकते हैं (ATM transaction charges India)। इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर शुल्क देना होगा। वहीं, दूसरे बैंक के ATM की बात करें तो यहां फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा शहर के आधार पर तय की गई है। मेट्रो शहरों में ग्राहकों को 3 मुफ्त ट्रांजैक्शन मिलते हैं, जबकि नॉन-मेट्रो यानी छोटे शहरों और कस्बों में यह सीमा 5 ट्रांजैक्शन तक रहती है।
फ्री लिमिट के बाद कितना चार्ज लगेगा
फ्री लिमिट समाप्त होने के बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर करीब ₹21 से ₹23 तक शुल्क लिया जाता है, जिस पर GST भी अलग से जोड़ा जाता है। ऐसे में कुल खर्च ₹25 या उससे अधिक तक पहुंच सकता है। यानी अगर कोई ग्राहक बार-बार ATM का इस्तेमाल करता है, तो महीने के अंत में उसे अतिरिक्त शुल्क के रूप में अच्छी-खासी रकम चुकानी पड़ सकती है।
पुराने नियमों से क्या बदला
अगर पुराने नियमों से तुलना करें तो फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर लगने वाला शुल्क पहले करीब ₹20 + GST था, जिसे अब बढ़ाकर ₹21 से ₹23 तक कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी भले ही मामूली लगे, लेकिन बार-बार उपयोग करने पर इसका असर साफ नजर आएगा।
UPI को शामिल करने से बढ़ेगा असर
इस बार सबसे बड़ा बदलाव UPI को लेकर हुआ है। अब UPI के जरिए ATM से की गई कैश निकासी को भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में शामिल कर दिया गया है। यानी अब कार्ड और UPI दोनों के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन मिलाकर गिने जाएंगे, जिससे ग्राहकों की फ्री लिमिट पहले की तुलना में जल्दी समाप्त हो सकती है।
आम लोगों की जेब पर क्या असर पड़ेगा
इन सभी बदलावों का असर साफ तौर पर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। खासकर मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां फ्री ट्रांजैक्शन की सीमा कम है। वहीं, नॉन-मेट्रो क्षेत्रों में थोड़ी राहत जरूर बनी हुई है, लेकिन UPI को शामिल किए जाने से वहां भी ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़ सकते हैं।
सीमित रखें ATM का इस्तेमाल
कुल मिलाकर, ये नए नियम एक बड़े बदलाव की ओर संकेत करते हैं, जहां बैंकिंग सिस्टम लोगों को कैश के बजाय डिजिटल लेन-देन की ओर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अब समझदारी इसी में है कि ATM का इस्तेमाल सीमित रखा जाए और हर ट्रांजैक्शन सोच-समझकर किया जाए।
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