नई दिल्लीः मौजूदा वर्ष 2026 के अप्रैल–मई का समय ज्योतिषीय दृष्टि से सामान्य नहीं प्रतीत होता। इस दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर ग्रहों के चौंकाने वाले संकेत मिल रहे हैं। यह कहना है राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं को समयचक्र, ग्रह-गोचर और ऊर्जा-पैटर्न के आधार पर समझने एवं व्याख्या करने वाले ज्योतिष एवं न्यूमरोलॉजी के गंभीर साधक डॉ. राहुल सिंह का।
ग्रहों की स्थिति क्या कहती है?
डॉ. राहुल के अनुसार, वैदिक ज्योतिष में जब मंगल, शनि, राहु और सूर्य जैसे उग्र ग्रह एक साथ संवेदनशील बिंदुओं को सक्रिय करते हैं, तो विश्व में तनाव, सीमा विवाद, सैन्य हलचल, आक्रामक बयानबाज़ी और अचानक संकट की आशंका बढ़ जाती है। वर्तमान ग्रह-गोचर को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह अवधि भारत-पाकिस्तान संबंधों के लिए अत्यंत संवेदनशील और प्रतिक्रियात्मक हो सकती है।
उग्र ग्रहों का प्रभाव क्यों खतरनाक माना जाता है?
वैदिक सिद्धांत के अनुसार, मंगल युद्ध, सेना, आक्रमण और त्वरित कार्रवाई का कारक है। शनि दबाव, दीर्घकालिक संघर्ष, तनाव और कठोर परिणामों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु अचानक घटनाओं, भ्रम, छद्म रणनीतियों, अस्थिरता और अप्रत्याशित परिस्थितियों को जन्म देता है। जब ये ग्रह आपस में टकरावपूर्ण संबंध बनाते हैं, तब घटनाएँ तेजी से बदलती हैं और नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है। यही कारण है कि अप्रैल–मई का यह काल केवल सामान्य राजनीतिक तनाव का नहीं, बल्कि ऐसे संकेत देता है जहाँ कोई छोटी घटना भी बड़े सामरिक तनाव में परिवर्तित हो सकती है।
इतिहास से मिलते-जुलते संकेत
यदि भारत-पाकिस्तान के पूर्व संघर्षों पर दृष्टि डालें, तो 1965, 1971 और 1999 जैसे समयों में भी उग्र ग्रहों की सक्रियता—विशेषकर मंगल का प्रभाव, शनि का दबाव और राहु की अस्थिरता—स्पष्ट रूप से देखी गई थी। यही पैटर्न आज पुनः एक भिन्न रूप में उभरता प्रतीत हो रहा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूर्ण युद्ध निश्चित है, किंतु यह अवश्य संकेत करता है कि सीमा पर उकसावे, आतंकी गतिविधियाँ, जवाबी कार्रवाई, सैन्य तैयारी, कूटनीतिक टकराव या सीमित सैन्य अभियान जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
क्या बरतनी होगी अतिरिक्त सतर्कता?
ज्योतिष अंतिम निर्णय नहीं देता, लेकिन समय की प्रकृति का संकेत अवश्य करता है। वर्तमान समय की प्रकृति यह दर्शाती है कि भारत और समूचे दक्षिण एशिया को अतिरिक्त सतर्कता, रणनीतिक धैर्य और सुरक्षा-सचेतता की आवश्यकता है। यदि राजनीतिक संयम और कूटनीतिक संतुलन कमजोर पड़ता है, तो अप्रैल–मई 2026 का यह काल क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बन सकता है।
डॉ. राहुल सिंह ज्योतिष और न्यूमरोलॉजी के गंभीर साधक हैं, जो राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं को समयचक्र, ग्रह-गोचर और ऊर्जा-पैटर्न के आधार पर समझते और उनकी व्याख्या करते हैं। भारत सहित विदेशों से भी अनेक लोग उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।
