पटनाः बिहार की सियासत में इन दिनों एक तस्वीर तेजी से चर्चा में है। तस्वीर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी कुर्सी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव उनके सामने खड़े नजर आ रहे हैं। तस्वीर सार्वजनिक होते ही इस पर राजनीतिक टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष इस तस्वीर को लेकर सरकार पर लगातार चुटकी ले रहा है और अलग-अलग अंदाज में सवाल उठा रहा है।
किसी की टिप्पणी में NDA सरकार में ‘कुर्सियों की कमी’ को स्कूलों की बदहाली से जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है, तो कोई इसे रामकृपाल यादव के राजनीतिक कद से जोड़कर देख रहा है। कुछ लोगों का दावा है कि तस्वीर में उन्हें जानबूझकर खड़ा रखा गया ताकि उनका कद कमतर दिखे। हालांकि, सिर्फ तस्वीर के आधार पर इस दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती।
तस्वीर में आखिर ऐसा क्या दिखा?
वायरल तस्वीर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक कुर्सी पर बैठे हैं। उनके बगल में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी बैठे नजर आ रहे हैं। वहीं सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव पास में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यही दृश्य अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि तीनों ही बिहार सरकार के मंत्री हैं और कार्यक्रम भी शिक्षा से जुड़ा हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में कैमरे में कैद हुआ यह छोटा-सा क्षण अब सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
विपक्ष ने पकड़ा ‘कुर्सी’ वाला मुद्दा
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी खेमे की ओर से तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। तंज कसने वालों ने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम स्कूल से जुड़ा है और सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बात करती है, तो क्या मंच पर मंत्रियों के लिए भी कुर्सियां कम पड़ गईं?
इसी बहाने कुछ टिप्पणियों में स्कूलों में संसाधनों और बदहाल व्यवस्थाओं का मुद्दा भी जोड़ दिया गया। यानी एक तस्वीर को विपक्ष ने सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक कटाक्ष का मौका बना लिया।
रामकृपाल यादव को लेकर भी उठे सवाल
दूसरी तरफ, तस्वीर का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा रामकृपाल यादव का खड़े रहना है। रामकृपाल यादव बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में दानापुर से विधायक होने के साथ बिहार सरकार में सहकारिता मंत्री हैं। सम्राट चौधरी सरकार में उन्हें सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसे में उनके समर्थक या राजनीतिक पर्यवेक्षक यह सवाल उठा सकते हैं कि क्या इतने वरिष्ठ राजनीतिक चेहरे के लिए मंच पर बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं थी?
हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि तस्वीर में दिखाई दे रहे इस दृश्य से यह साबित नहीं होता कि रामकृपाल यादव को जानबूझकर खड़ा रखा गया था।
क्या महज संयोग है या सियासत को मिला नया मुद्दा?
किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में एक क्षण के लिए कोई व्यक्ति खड़ा हो सकता है। संभव है कि उस वक्त बातचीत चल रही हो, बैठने की व्यवस्था बदली जा रही हो या रामकृपाल यादव स्वयं खड़े हों।
लेकिन राजनीति में तस्वीर का अपना संदेश होता है। और यही वजह है कि यह तस्वीर अब महज एक कार्यक्रम की तस्वीर नहीं रह गई है। एक तरफ विपक्ष इसे सरकार पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, तो दूसरी तरफ रामकृपाल यादव के राजनीतिक कद को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
कुर्सी पर बैठे चेहरे और खड़ा एक सवाल
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री बैठे हैं, जबकि सहकारिता मंत्री खड़े हैं। तस्वीर का यही फ्रेम सोशल मीडिया पर बहस का कारण बना हुआ है।
क्या यह सिर्फ एक सामान्य क्षण था? क्या कार्यक्रम की व्यवस्था ऐसी ही थी? या फिर इस तस्वीर को राजनीतिक चश्मे से देखने की वजह कुछ और है? इन सवालों का जवाब तस्वीर अकेले नहीं देती। लेकिन इतना जरूर है कि एक कुर्सी ने बिहार की सियासत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। और अब चर्चा इस बात की कम है कि कार्यक्रम में क्या हुआ, चर्चा इस बात की ज्यादा है कि उस तस्वीर में कौन बैठा था और कौन खड़ा था।

