लखनऊः उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 48 घंटे से जारी भारी बारिश और तेज आंधी ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के बीच मकान और दीवार गिरने, पेड़ उखड़ने तथा अन्य हादसों में 15 लोगों की मौत और पांच लोगों के घायल होने की सूचना है। राहत आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सबसे अहम बात यह है कि बारिश का असर किसी एक इलाके तक सीमित नहीं रहा। प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
11 जिलों में 15 लोगों की मौत
बारिश और आंधी से हुई जनहानि की सबसे अधिक घटनाएं लखीमपुर खीरी में सामने आई हैं, जहां चार लोगों की मौत दर्ज की गई। अयोध्या में दो लोगों की जान गई, जबकि अमेठी, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, फतेहपुर, हमीरपुर, हरदोई और कानपुर नगर में एक-एक मौत की सूचना है। हादसों में मकान या दीवार गिरने के अलावा आंधी के दौरान पेड़ गिरने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं।
हरदोई में बारिश के दौरान पेड़ के मकान पर गिरने से 11 वर्षीय बच्ची की मौत हुई। वहीं कई अन्य जगहों पर कच्चे मकानों और दीवारों के गिरने से लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। राहत एजेंसियों के मुताबिक बारिश से संबंधित घटनाओं में चार पशुओं की भी मौत हुई है।
117 मकानों को नुकसान, बांदा और जालौन सबसे प्रभावित
भारी बारिश और तेज हवाओं का असर कमजोर और कच्चे मकानों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार 117 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें बांदा में 32, जालौन में 21 और हरदोई में 14 मकानों को नुकसान पहुंचा है। औरैया और पीलीभीत में सात-सात, जबकि बहराइच और सुल्तानपुर में पांच-पांच मकान क्षतिग्रस्त बताए गए हैं।
यानी शुरुआती सुर्खियों में भले ही 117 मकानों के “गिरने” की बात कही जा रही हो, लेकिन उपलब्ध सरकारी आंकड़ा 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने का है। यह अंतर खबर की सटीकता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
24 घंटे में सामान्य से 19 गुना ज्यादा बारिश
बारिश की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान सामान्य से करीब 19 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। फर्रुखाबाद में सामान्य से करीब 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना और कन्नौज, कानपुर देहात तथा हरदोई में करीब 130 गुना अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि पूरे प्रदेश में बारिश एक जैसी नहीं रही। कुछ जिलों में सामान्य बारिश हुई, जबकि बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ जैसे कुछ जिलों में उस अवधि में बारिश दर्ज नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।
धान और खरीफ फसलों पर भी संकट
बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई इलाकों में पकने के करीब पहुंच चुकी धान की फसल खेतों में गिर गई, जबकि काटकर रखी गई फसल पानी में भीग गई। गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, सीतापुर और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों से धान और दूसरी खरीफ फसलों को नुकसान की प्रारंभिक सूचनाएं सामने आई हैं। हालांकि फसल नुकसान के प्रतिशत से जुड़े ये आंकड़े प्रारंभिक स्थानीय आकलन हैं और अंतिम नुकसान का निर्धारण सर्वे के बाद होगा।
पूर्वी यूपी में बढ़ी बाढ़ की चिंता
बारिश के साथ ही नेपाल में हो रही भारी वर्षा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है। सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ाने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।
27 सितंबर तक मौसम को लेकर चेतावनी
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश की संभावना दर्ज की गई है। 27 सितंबर को भी पूर्वी यूपी में भारी और पश्चिमी यूपी में बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इसके बाद 28 सितंबर से इन दोनों उपखंडों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।
प्रशासन अलर्ट, प्रभावित परिवारों को राहत के निर्देश
भारी बारिश और आकस्मिक बाढ़ की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को प्रभावित इलाकों में खुद पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को जनहानि और मकान क्षति का तत्काल आकलन करने तथा पात्र प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।
फिलहाल मौसम की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। 26 और 27 सितंबर को बारिश का दौर जारी रहने की चेतावनी के बीच प्रशासन की निगाहें कमजोर मकानों, जलभराव वाले इलाकों और पूर्वी यूपी की नदियों के जलस्तर पर टिकी हैं।





