Saturday, September 26, 2026

दहासील से तेंदुआ शिव मंदिर तक, रोहतास में पर्यटन की नई संभावना; अतिक्रमण पर प्रशासन सख्त

नोखा दहासील पोखरा और ऐतिहासिक शिव मंदिर के विकास की संभावनाएं तलाशने पहुंचे डीएम, विधायक और डीएफओ; जलकुंभी हटाने की भी तैयारी

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रोहतासः दहासील पोखरा की विशाल जलराशि, किनारे बसा तेंदुआ का पुराना शिव मंदिर और आसपास मौजूद सरकारी जमीन—इन सबको जोड़कर नोखा में एक नए पर्यटन क्षेत्र की संभावना तलाशी जा रही है। इसी कड़ी में शनिवार को प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की टीम तेंदुआ पहुंची। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्र, विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी और शाहाबाद के डीएफओ स्टालिन फिडल ने पूरे इलाके का मुआयना किया। मौके पर पोखर की स्थिति से लेकर मंदिर परिसर और आसपास की जमीन तक को देखा गया।

निरीक्षण के दौरान सबसे अहम बात सरकारी जमीन को लेकर सामने आई। स्थानीय लोगों और मंदिर कमेटी ने अधिकारियों को बताया कि मंदिर के आसपास काफी सरकारी जमीन है, लेकिन इसके कुछ हिस्से पर अतिक्रमण किए जाने की शिकायत भी है। डीएम ने मामले को लेकर तत्काल सीओ पुष्पा कुमारी को जमीन की मापी कराने का निर्देश दिया। मापी में अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई कर जमीन खाली कराने को कहा गया है।

पोखर की जलकुंभी भी बनी विकास की राह में रोड़ा

दहासील पोखरा का जायजा लेते समय उसकी एक बड़ी समस्या भी सामने आई। पोखर के बड़े हिस्से में जलकुंभी फैली हुई है। डीएफओ स्टालिन फिडल ने मौके पर इसकी स्थिति देखी और जलकुंभी हटाने की जरूरत बताई। इसे हटाने के साथ पोखर की सफाई कराने की तैयारी है।

दरअसल, किसी पर्यटन स्थल की पहली तस्वीर उसके आसपास के माहौल से बनती है। ऐसे में पोखर से जलकुंभी हटना केवल सफाई तक सीमित नहीं होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के स्वरूप को बदलने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

विधानसभा से लेकर जमीन तक, विकास की कोशिश

तेंदुआ के ऐतिहासिक शिव मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग नई नहीं है। विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी के मुताबिक उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया है। अब प्रशासनिक स्तर पर स्थल का निरीक्षण होने के बाद इस दिशा में उम्मीदें बढ़ी हैं।

विधायक ने कहा कि ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस स्थल पर लंबे समय से अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। मंदिर और पोखर के आसपास विकास की काफी गुंजाइश है और इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

मंदिर और पोखर को एक साथ विकसित करने की तैयारी

निरीक्षण के दौरान सिर्फ मंदिर की स्थिति पर ही चर्चा नहीं हुई। अधिकारियों ने पोखर और उससे लगी जमीन को भी देखा। भविष्य में यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए किस तरह की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं, इसे लेकर संभावनाएं तलाशी गईं।

अगर सरकारी जमीन की स्थिति स्पष्ट होती है, अतिक्रमण हटता है और पोखर की सफाई का काम आगे बढ़ता है तो मंदिर-पोखर परिसर को एक व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो सकती है।

लोगों को अब जमीन पर काम शुरू होने का इंतजार

स्थानीय लोगों के लिए शनिवार का निरीक्षण महज अधिकारियों के दौरे से ज्यादा उम्मीद लेकर आया। ग्रामीणों का मानना है कि दहासील पोखरा और ऐतिहासिक शिव मंदिर दोनों की अपनी पहचान है। जरूरत है तो इसे सुविधाओं और बेहतर रखरखाव से जोड़ने की।

सरकारी जमीन की मापी, अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और पोखर से जलकुंभी हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ती है तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर बदल सकती है।

निरीक्षण के दौरान 20 सूत्री कमेटी के अध्यक्ष, जदयू प्रखंड अध्यक्ष रूपेश चंद्रवंशी, अरविंद पटेल, माल बाबू शर्मा, अनिल सिंह, समरेंद्र कुमार, बिंदे लाल कुशवाहा समेत कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।

शशि कान्त
शशि कान्तhttps://www1.newsstump.com
संवाददाता- रोहतास
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