अभय वाणीः राष्ट्रीय राजमार्ग-922 को चार लेन करने का उद्देश्य सिर्फ वाहनों के आवागमन के लिए सड़क को चौड़ा करना नहीं था। इसका मकसद यात्रा को सुरक्षित, सुगम और निर्बाध बनाना भी था। लेकिन NH-922 पर कुल्हड़िया टोल प्लाजा से कोईलवर की ओर बढ़ते ही सड़क की तस्वीर इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करती दिखाई देती है।
National Highway-922 पर जगह-जगह सड़क किनारे अतिक्रमण, कुल्हड़िया और कोइलवर के बीच ट्रकों की लंबी कतार, बेतरतीब खड़े भारी वाहन और जाम से बचने के लिए रॉन्ग साइड में जाते छोटे वाहन—ये परिस्थितियां किसी एक दिन की समस्या नहीं बताई जातीं। स्थानीय लोगों और नियमित वाहन चालकों के मुताबिक, इस मार्ग पर लंबे समय से ऐसी स्थिति बनी हुई है। सवाल यह है कि जिस हाईवे के उपयोग के लिए वाहन चालक टोल चुका रहा है, वहां सुरक्षित और सुगम यातायात की जिम्मेदारी किसकी है?
कुल्हड़िया टोल पर शुल्क बढ़ा, सड़क पर परेशानी कायम
कुल्हड़िया टोल प्लाजा NH-922 के कोइलवर-भोजपुर सेक्शन पर स्थित है। आधिकारिक दस्तावेजों में इसे इस सेक्शन के लिए शुल्क वसूली केंद्र के रूप में दर्ज किया गया है।
अगस्त 2026 से कुल्हड़िया टोल प्लाजा पर नई दरें लागू होने की जानकारी सामने आई। कार,जीप और वैन के लिए एक तरफ का शुल्क 110 रुपये और बस और ट्रक के लिए 370 रुपये किया गया है, जबकि बड़े एक्सल वाले भारी वाहनों के लिए शुल्क इससे अधिक है।
यानी टोल वसूली का सिस्टम निर्धारित है और शुल्क की दर भी समय-समय पर संशोधित होती है। लेकिन इसके समानांतर सड़क पर यातायात प्रबंधन कितना प्रभावी है, यह सवाल अब भी बना हुआ है।
ट्रकों की कतार और उसके बीच रॉन्ग साइड ड्राइविंग
कुल्हड़िया टोल प्लाजा और कोईलवर के बीच भारी वाहनों का दबाव कई बार सड़क की क्षमता और यातायात व्यवस्था दोनों को चुनौती देता है। ट्रकों की कतार जब लंबी होती है तो छोटे वाहन चालकों के सामने रास्ता निकालने की समस्या पैदा होती है। इसी स्थिति में अक्सर वाहन रॉन्ग साइड में जाते दिखाई देते हैं।
यह सिर्फ यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं है। फोरलेन हाईवे पर विपरीत दिशा से आने वाला वाहन सामने से आ रहे वाहन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। खासकर जब दूसरी ओर भारी वाहन खड़े हों और दृश्यता सीमित हो, तब कुछ सेकंड की गलती भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
NH-922 के अन्य हिस्सों में भी जाम के दौरान वाहनों के रॉन्ग साइड जाने की स्थिति सामने आने की खबरें प्रकाशित हुई हैं।
कमोबेश यही तस्वीर निर्माणाधीन NH-922 के कोइलवर से बक्सर तक के कई हिस्सों में भी दिखाई देती है, जहां निर्माण कार्य, भारी वाहनों का दबाव, अस्थायी डायवर्जन, अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात कई जगह सुरक्षित एवं सुगम आवागमन के लिए चुनौती बनते नजर आते हैं।
ऐसे में सवाल सिर्फ कुल्हड़िया-कोईलवर के एक हिस्से का नहीं रह जाता। सवाल यह है कि कोइलवर से बक्सर तक निर्माणाधीन पूरे कॉरिडोर में यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के लिए एक समन्वित व्यवस्था आखिर कहां है?
अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग पर भी सवाल
राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देश और अभियान चलाए हैं।
ऐसे में NH-922 पर सवाल और गंभीर हो जाता है। अगर सड़क किनारे अतिक्रमण और भारी वाहनों की बेतरतीब पार्किंग यातायात को प्रभावित कर रही है, तो उसे हटाने और दोबारा कब्जा रोकने की नियमित व्यवस्था कहां है?
‘वसूली’ के आरोप की भी होनी चाहिए जांच
इस पूरे मामले में स्थानीय स्तर पर एक और गंभीर आरोप चर्चा में है। कुछ वाहन चालकों और स्थानीय लोगों की ओर से यह आरोप लगाया जाता है कि ट्रकों की आवाजाही और जांच के नाम पर स्थानीय पुलिस स्तर पर कथित अवैध वसूली होती है।
इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। लेकिन यदि वाहन चालक लगातार ऐसी शिकायत कर रहे हैं, तो यह जांच का विषय जरूर है। सवाल सीधा है—क्या ट्रकों की कतार और पुलिस जांच की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्डेड और पारदर्शी है?
यदि जांच वैध दस्तावेजों और यातायात नियमों के अनुपालन के लिए होती है तो उसकी प्रक्रिया और कार्रवाई का रिकॉर्ड होना चाहिए। वहीं यदि अवैध वसूली की शिकायतें हैं तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और वरीय पदाधिकारियों को इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
टोल के साथ सुरक्षित सफर का सवाल क्यों?
टोल शुल्क को सीधे ‘सुरक्षा शुल्क’ नहीं कहा जा सकता। यह राष्ट्रीय राजमार्ग के उपयोग के लिए लिया जाने वाला User Fee है। लेकिन राजमार्ग के संचालन और रखरखाव में यातायात को सुरक्षित एवं सुगम बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
कुल्हड़िया टोल प्लाजा से संबंधित उपलब्ध जानकारी में रूट पेट्रोल, एंबुलेंस और क्रेन जैसी आपात सेवाओं के संपर्क भी दर्ज हैं।
ऐसे में सवाल यह नहीं है कि टोल लिया क्यों जा रहा है। सवाल यह है कि टोल वाले हाईवे पर यातायात प्रबंधन, आपात सहायता और सड़क सुरक्षा की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है।
सड़क चार लेन, लेकिन व्यवस्था कितनी लेन की?
NH-922 पर समस्या को केवल वाहन चालकों की गलती बताकर खत्म नहीं किया जा सकता। रॉन्ग साइड चलना निश्चित रूप से नियमों का उल्लंघन है, लेकिन यह भी देखना होगा कि जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और निर्माण के दौरान बने डायवर्जन जैसी परिस्थितियां पैदा क्यों होती हैं और उन्हें नियंत्रित करने के लिए संबंधित एजेंसियां क्या कर रही हैं।
टोल प्लाजा पर शुल्क वसूली के लिए व्यवस्था स्पष्ट है। फिर सड़क पर जाम नियंत्रित करने की व्यवस्था भी उतनी ही स्पष्ट क्यों नहीं दिखाई देती?
- अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी किसकी है?
- ट्रकों को व्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
- रॉन्ग साइड चलने से पहले यातायात को नियंत्रित करने वाला सिस्टम कहां है?
- और सबसे महत्वपूर्ण— अगर स्थानीय स्तर पर अवैध वसूली की शिकायतें हैं तो उनकी जांच कौन करेगा?
राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ कंक्रीट और डामर की सड़क नहीं होता। यह रोजाना हजारों लोगों की जिंदगी, समय और कारोबार से जुड़ा बुनियादी ढांचा है। इसलिए इसकी सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जा सकती कि सड़क कितनी चौड़ी है या टोल कितना वसूला जा रहा है।
सवाल यह है कि उस सड़क पर आम आदमी सुरक्षित पहुंच भी रहा है या नहीं। NH-922 पर अब जरूरत किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई की नहीं, बल्कि हादसे से पहले जवाबदेही तय करने की है।








