G-RAM-G के साथ मैदान में उतरे नीतीन नबीन, कोयंबटूर में दिखा एक्शन मोड

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तमिलनाडुः कोयंबटूर के अचंकुलम गांव में रविवार को भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीन नबीन पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आए। गांव के चौपाल से ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘विकसित भारत – G-RAM-G पहल’ की विस्तार से जानकारी दी और बताया कि यह योजना गांवों की तस्वीर बदलने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर गांवों की परिकल्पना

नीतीन नबीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व में तैयार की गई G-RAM-G पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना, स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ाना और गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना कृषि, पशुपालन, कुटीर उद्योग, स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण उद्यमिता को एक समग्र ढांचे में जोड़ती है।

स्किल डेवलपमेंट से रोजगार, पलायन पर लगेगी लगाम

उन्होंने बताया कि G-RAM-G योजना के तहत गांवों में स्किल डेवलपमेंट, माइक्रो एंटरप्राइज, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे युवाओं को अपने ही गांव में स्थायी आजीविका मिलेगी और शहरों की ओर पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी सहायता के जरिए ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ा जाएगा।

ग्रामीणों से सीधा संवाद, जमीनी मुद्दों पर फोकस

कार्यक्रम के दौरान Nitin Nabin लगातार ग्रामीणों से संवाद करते दिखे। उन्होंने स्थानीय समस्याएं सुनीं, सुझाव लिए और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार गांवों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का सक्रिय भागीदार बनाना चाहती है।

एक्शन मोड में भाजपा, दक्षिण भारत में बढ़ी सक्रियता

नीतीन नबीन की सक्रियता और जमीनी जुड़ाव से यह साफ संदेश गया कि भाजपा संगठन स्तर पर भी विकसित भारत विजन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में है। अचंकुलम गांव का यह कार्यक्रम दक्षिण भारत के ग्रामीण इलाकों में पार्टी की रणनीति को नई धार देता नजर आ रहा है।

G-RAM-G योजना: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती का रोडमैप

G-RAM-G (ग्रामीण रोजगार, आत्मनिर्भरता और मॉडल गांव पहल) केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत’ परिकल्पना का अहम हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य गांवों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके तहत कृषि आधारित उद्योग, पशुपालन, कुटीर एवं लघु उद्योग, स्वयं सहायता समूहों और स्टार्ट-अप मॉडल को एकीकृत किया जाता है। योजना में स्किल डेवलपमेंट, वित्तीय सहायता, डिजिटल कनेक्टिविटी और मार्केट लिंकज पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि ग्रामीण युवा और महिलाएं अपने ही गांव में आजीविका अर्जित कर सकें और पलायन की समस्या पर प्रभावी रोक लगे।

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