पटनाः बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के घर उस वक्त हाई टेंशन माहौल उत्पन्न हो गया जब देर रात पटना पुलिस की टीम आवास पर दबिश देने पहुंची। पुलिस और सांसद के समर्थकों के बीच बहस और झड़प का दृश्य वहां मौजूद मीडिया कर्मियों ने देखा, लेकिन पुलिस ने मीडिया को तस्वीरें और वीडियो लेने से रोक दिया।
30 साल पुराना मामला बना गिरफ्तारी की वजह
पुलिस ने यह कार्रवाई करीब 30 साल पुराने न्यायिक मामले में अदालत के गिरफ्तारी आदेश के आधार पर की। हालांकि पप्पू यादव ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा कि उनके खिलाफ जीवन को खतरा डालने की कोशिश की जा रही है। गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए पुलिस ने कहा कि सांसद को अदालत में पेश करने के लिए हिरासत में लिया गया है।
पप्पू यादव ने घटनास्थल पर मीडिया से कहा, “मैं अदालत में खुद पेश होने को तैयार हूँ। लेकिन यह कार्रवाई मुझे डराने और मुझे खत्म करने की साजिश है।”
पुलिस और मीडिया में नोक-झोक, समर्थकों में हड़कंप
घटना के दौरान सांसद के समर्थक और पुलिस के बीच तनावपूर्ण बहस और जोर-जबरदस्ती देखने को मिली। समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं। मीडिया कर्मियों को भी काफी हड़बड़ाहट का सामना करना पड़ा, क्योंकि पुलिस ने फोटो और वीडियो लेने पर रोक लगाई।
अदालत के आदेश पर कार्रवाई कर रही पुलिस
यह मामला पुराने आपराधिक/धोखाधड़ी मामलों से जुड़ा बताया जा रहा है। अदालत के आदेश के तहत पुलिस कार्रवाई कर रही है। पप्पू यादव ने बार-बार कहा कि वे खुद अदालत में पेश होंगे, लेकिन पुलिस ने पहले ही कदम उठाने का निर्णय लिया।
मामले पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
बिहार में यह घटना राजनीतिक हलचल पैदा कर रही है। विपक्ष इसे राजनीतिक निशाना बनाने की कोशिश बता रहा है, वहीं सरकार और पुलिस इसे कानूनी प्रक्रिया का पालन करार दे रहे हैं। सामाजिक मीडिया पर भी मामला ट्रेंड कर रहा है, लोग इस हाई ड्रामा को लेकर अपनी राय साझा कर रहे हैं और बिहार की राजनीति में इसे मॉमेन्टम बढ़ाने वाला मुद्दा माना जा रहा है।
अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है। अगले कुछ दिनों में गिरफ्तारी की पुष्टि या अस्वीकृति हो सकती है। वहीं, राजनीतिक चर्चाएँ और मीडिया कवरेज लगातार तेज़ बनी हुई हैं।

