Home पॉजिटिव न्यूज़ कर्तव्य से बढ़कर मानवता: दीघा घाट पर महिला ट्रैफिक सिपाही की बहादुरी...

कर्तव्य से बढ़कर मानवता: दीघा घाट पर महिला ट्रैफिक सिपाही की बहादुरी ने जीता दिल

पटनाः अपनी कर्तव्यों को लेकर हमेशा पब्लिक के निशाने पर रहने वाली पटना ट्रैफिक पुलिस की इस महिला सिपाही तारा कुमारी  ने न सिर्फ विभाग का मान बढ़ाया, बल्कि आम आदमी की धारणा भी बदल दी। पटना के दीघा घाट पर गंगा नदी में दो युवकों के डूबने की सूचना मिलते ही ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात महिला सिपाही तारा कुमारी (कांस्टेबल संख्या-3150) ने जो किया, वह केवल ड्यूटी नहीं बल्कि मानवता का जीवंत उदाहरण बन गया।

अफरा-तफरी के बीच लिया साहसिक फैसला

घटना के समय घाट पर हजारों की भीड़ मौजूद थी। माहौल बेचैनी और घबराहट से भरा था। लोग चिंतित थे, शोर था, लेकिन पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डालने का साहस किसी ने नहीं दिखाया। ऐसे नाजुक पल में तारा कुमारी ने बिना एक पल गंवाए अपनी निर्धारित ट्रैफिक ड्यूटी की सीमाओं से आगे बढ़ने का फैसला किया।

वर्दी में ही गंगा में लगाई छलांग

बिना किसी सुरक्षा उपकरण के, बिना राहत दल का इंतज़ार किए और पूरी वर्दी में ही तारा कुमारी गंगा नदी में कूद पड़ीं। उनका लक्ष्य स्पष्ट था – डूब रहे युवकों को तलाशना और उनकी जान बचाने की हरसंभव कोशिश करना। यह कदम जोखिम भरा जरूर था, लेकिन उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा ने उस पल उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला दी।

पुलिस का मानवीय चेहरा आया सामने

यह केवल एक बचाव प्रयास नहीं था, बल्कि उस संवेदनशील पुलिस चेहरे की झलक थी, जिसे अक्सर लोग देख नहीं पाते। ट्रैफिक संभालने वाली एक सिपाही ने साबित कर दिया कि वर्दी का असली अर्थ सिर्फ नियम लागू करना नहीं, बल्कि संकट में खड़े इंसानों की मदद करना भी है।

सोशल मीडिया पर सराहना, विभाग को गर्व

पटना ट्रैफिक पुलिस ने इस साहसिक घटना को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर साझा करते हुए गर्व व्यक्त किया है। आमतौर पर चालान और सख्ती को लेकर आलोचना झेलने वाली ट्रैफिक पुलिस के लिए यह क्षण सम्मान और गर्व का बन गया। तारा कुमारी ने न केवल अपने विभाग का मान बढ़ाया, बल्कि पुलिस के प्रति आम लोगों की सोच को भी सकारात्मक दिशा दी है।

बहादुरी की मिसाल बनीं तारा कुमारी

यह घटना याद दिलाती है कि पुलिसकर्मी सिर्फ कानून लागू करने वाले अधिकारी नहीं होते, बल्कि संकट की घड़ी में सबसे पहले मदद के लिए आगे आने वाले इंसान भी होते हैं। तारा कुमारी की बहादुरी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कर्तव्य की कोई सीमा नहीं होती – और जब मानवता पुकारती है, तो असली नायक वही बनते हैं जो बिना हिचक आगे बढ़ते हैं। पटना आज अपनी इस बहादुर बेटी पर गर्व कर रहा है।

Exit mobile version