गुप्तेश्वर पाण्डेय बने बिहार के नए DGP, सेवानिवृत्त हुए के एस द्विवेदी

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पटनाः कौन होगा बिहार का नया DGP इसे लेकर लगाई जा रही तमाम अटकलों पर अब विराम लग चुका है। बिहार सरकार ने बिहार पुलिस के नए चीफ के तौर पर 1987 बैच के IPS  अधिकारी गुप्तेश्व पाण्डेय के नाम पर मुहर लगा दी है। उनकी नियुक्ति के एस द्विवेदी के सेवानिवृति के बाद की गई है। पदभार ग्रहण कर चुके पाण्डेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक होगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होने कहा कि क्राइम कंट्रोल हमारी प्राथमिकता है। काम नहीं करने वाले पुलिस पदाधिकारी नपेंगे।

बक्सर जिले के गेरूआबांध गांव के एक साधारण से किसान परिवार में जन्मे गुप्तेश्व पाण्डेय की गिनती प्रदेश हीं नहीं देश के चंद चुनिंदा IPS अधिकारियों में होती है। इससे पहले वे कई महत्वपुर्ण पदों पर रह चुके गुप्तेश्वर को जानने वाले बताते हैं कि वे आमलोंगों के उतने हीं करीब हैं जितना अपराध उनसे दूर। सर्वसुलभ पाण्डेय का स्वभाव आमलोगों के प्रति बेहद मृदुल है। आमतौर पर पुलिस के प्रति गलत धारणा रखने वालों की सोच पाण्डेय के लिए बिल्कुल अलग हो जाती है। उनके मातहत काम कर रहे या काम कर चुके पुलिस अधिकारी की माने तो ऐसे अधिकारी विरले ही मिलते हैं।

कम्युनिटी पुलिसिंग के विशेषज्ञ

कम्युनिटी पुलिसिंग के विशेषज्ञ गुप्तेश्व पाण्डेय इससे पहले जिस किसी भी पद पर रहे उन्होने अपनी क्षमता का परचम लहराए रखा। उनकी कार्यशैलि और क्षमता का अंदाजा इस बात से सहज ही लगाया जा करता है कि कई बार उन्होने सरकार को ऐसे संकट से उबारा है जिसने सरकार को सोंचने पर विवश कर दिया था।

बिहार सरकार के संकटमोचन

बात सुबे में अपराध नियंत्रण की हो, दंगा या फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों कम्युनिटी पुलिसिंग की उन्होने हर जगह अपनी उपयोगिता सिद्ध की है। यही कारण है कि उन्हे लोग बिहार सरकार के संकटमोचन के नाम से भी जानते हैं। पाण्डेय को सांप्रदायिक सद्भाव का मैसेंजर और स्मार्ट पुलिसिंग का जनक माना जाता है। बिहार में जब भी कहीं हिंसक झड़प और तनाव का माहौल पैदा हो है तो वहां की स्थिति को संभालने के लिए सरकार गुप्तेश्व पाण्डेय पर ही भरोसा करती है।

अपराध पर अंकुश

आम आदमी के लिए सहज, मृदुभाषी, गरीबों के दुःख से द्रवित हो जानेवाले गुप्तेश्व पाण्डेय के नाम से ही अपराधियों की पतलूनें गीली हो जाती हैं। चतरा, बेगुसराय, जहानाबाद, हजारीबाग, औरंगाबाद, रांची और नालन्दा में बतौर SP अपराध और नक्सल समस्या पर नियंत्रण के लिए आज भी लोग इनके कामकाज को याद करते हैं। मुंगेर, तिरहूत, बेतिया और रेल DIG के पद पर काम कर चुके पाण्डेय की स्मार्ट पुलिसिंग और कम्युनिटी पुलिसिंग के लिए वे मिशाल हैं।

चलाया नशामुक्ति अभियान

अभी गुप्तेश्व पाण्डेय ने ‘नशामुक्ति अभियान’ के लिए पूरे प्रदेश में आन्दोलन की शुरुवात की है। वे बिहार में घूम घूमकर डेढ़ सौ से ज्यादा सभाएं कर जन-जागरूकता अभियान चला चुके हैं। उनके इस अभियान की सफलता का आलम ये है कि आज शराबबंदी एक जन-आन्दोलन बन गया है। आज हर बिहारी की जुबान पर एक ही नारा है-‘ जय बिहार-जय बिहार, नशामुक्त हो बिहार’। अपने इस जन-जागरण अभियान को जनता का अभियान बनाने के लिए गुप्तेश्व पाण्डेय ने हर जिले में यूथ ब्रिगेड का गठन कर कम्युनिटी पुलिसिंग को एक नया आयाम दिया है।

DGP के रूप में कई तरह की चुनौतियां

बहरहाल संपुर्ण सेवाकाल में किए गए उनके कार्यों के बदौलत सरकार ने उन पर विश्वास किया है और उन्हे अब पुरे प्रदेश पुलिस की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में उनके लिए जरुरी है कि पहले की तरह हीं वे इस जिम्मेदारी का भी निष्ठा पूर्वक निर्वहन करें और पुलिसिंग को एक नई दिशा दें।

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