अगर आपको भी डराती है पुलिस तो डरना छोड़ समझिए अपने कानूनी अधिकारों को

कायदे कानून बहुत हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम में से कई लोग उसे हीं नियम कानून मान लेते हैं जो आम तौर पर देखने को मिलता है। पुलिस वर्दी का रौब झाड़कर कानून का हवाला देते हुए जैसे चाहे वैसे पेश आती है और हम हैं कि हाथ पर हाथ रखकर सबकुछ देखते रह जाते हैं। इसलिए कानून को समझिए और कानून के दायरे में रहकर अपनी और अपने देश के कनून की रक्षा कीजिए।

आम तौर पर लोगों के अंदर ऐसी धारणा है कि पुलिस चाहे तो किसी को भी महज शक के बिनाह पर 24 घंटे तक हवालात में रख सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है।  पुलिस किसी भी व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने पर हीं उसे गिरफ्तार कर सकती है। केवल शिकायत अथवा शक के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।

बिना कारण बताए गिरफ्तार नहीं कर सकती पुलिस

CRPC दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 150 के मुताबिक पुलिस बिना कारण बताए किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। अगर पुलिस किसी को भी गिरफ्तार करती है तो वह व्यक्ति पुलिस से अपनी गिरफ्तारी का कारण पुछ सकता है और पुलिस को गिरफ्तारी का कारण बताना होता है। अगर पुलिस गिरफ्तारी का कारण नहीं बताती तो यह अपराध माना जाएगा। ऐसे में अगर पीड़ित चाहे तो इसके विरुद्ध अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

24 घंटे से ज्यादा थाने में नहीं रख सकती पुलिस

इतना हीं नहीं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 के मुताबिक पुलिस गिरफ्तार किए गए किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा वक्त तक हवालात में नहीं रख सकती और ना तो उसकी आजादी से उसे महरुम कर सकती है। अगर पुलिस किसी व्यक्ति को किसी भी आधार पर गिरफ्तार करती है, तो उसे उस व्यक्ति को तत्काल किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों के साथ प्रस्तुत करना होता है। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की अधिकतम समयावधि 24 घंटे होती है। अगर पुलिस 24 घंटे से ज्यादा किसी व्यक्ति को थाने में रखती है तो यह अपराध माना जाएगा।

वीचाराधीन कैदी को हथकड़ी नहीं पहना सकती पुलिस

इसके अलावे सुप्रिमकोर्ट के आदेश के मुताबिक पुलिस किसी वीचाराधीन कैदी को एक जगह से दुसरे जगह स्थानांतरित करते वक्त हथकड़ी नहीं लगा सकती। हथकड़ी लगाने के लिए उसे बकायदा न्यायालय से अनुमति लेनी होती है। बगैर अनुमति हथकड़ी लगाना कानूनन अपराध माना जाएगा।

48 घंटों के भीतर कैदी का मेडिकल जांच जरुरी

पुलिस अगर किसी विचाराधीन कैदी को रिमांड पर लेती है, तो रिमांड पर लेने के 48 घंटों के भीतर कैदी का मेडिकल जांच कराना जरुरी है। पुलिस अगर ऐसा नहीं करती तो यह अदालति आदेश का अवमानना है। जिसपर अदालत पुलिस के विरुद्ध कानूनि कार्रवाई कर सकता है।

आम आदमी को सर्वोच्च न्यायालय से मिले विशेष आधिकारों के तहत अगर पुलिस द्वारा किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उस व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने परिजनों को देने की पुरी आजादी है।

कैदी को खाना देना पुलिस की जिम्मेदारी

साथ हीं पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक ये प्रावधान है कि पुलिस अगर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर थाने लाती है और हितासत में रखती है तो गिरफ्तार किए गए यक्ति को समय पर खाना देना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके लिए बकायदा उसे सरकार की तरफ से विशेष भत्ता भी मिलता है।

बहरहाल कायदे कानून बहुत हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम में से कई लोग उसे हीं नियम कानून मान लेते हैं जो आम तौर पर देखने को मिलता है। पुलिस वर्दी का रौब झाड़कर कानून का हवाला देते हुए जैसे चाहे वैसे पेश आती है और हम हैं कि हाथ पर हाथ रखकर सबकुछ देखते रह जाते हैं। इसलिए कानून को समझिए और कानून के दायरे में रहकर अपनी और अपने देश के कनून की रक्षा कीजिए।

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