लोकसभा चुनाव 2019ः जानिए बिहार में किस जाति के हैं कितने वोटर

पटनाः बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण (Caste equation in Bihar politics) बहुत मायने रखता है। यहां चुनाव के मैदान में उतरने वाली लगभग हर छोटी-बड़ी पार्टी इसका खयाल जरुर रखती है। पार्टियों की कोशिश रहती है कि वे ज्यादा से ज्यादा उन उम्मीदवारों को टिकट दें जो प्रदेश भर में अपनी जातियों को रिझाने का कुब्बत रखते हैं। साथ ही इस बात का भी खयाल रखा जाता कि किस सीट पर किस जाती का कितना वोट है। ऐसे में ये जानना बेहद जरुरी है कि बिहार में किस जाति के पास कितना वोट है।

बिहार में जातियों की संख्या

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक (According to census 2011) बिहार में कुल वोटरों के 16.9 प्रतिशत मुस्लिम, 14.4 प्रतिशत यादव, 6.4 प्रतिशत कुशवाहा, 4 प्रतिशत कुर्मी, 4 प्रतिशत दुशाध, 2.8 प्रतिशत मुशहर, 4.7 प्रतिशत भूमिहार, ब्राम्हण 5.7 प्रतिशत, राजपूत 5.2 प्रतिशत, कायस्थ 1.5 प्रतिशत, आदिवासी 1.3 प्रतिशत जबकी 0.4 प्रतिशत आबादी अन्य की है जिनमें इसाई, जैन और सिख समुदाय शामिल है। 26 प्रतिशत आबादी EBC कोटे से आने वाले लोगों की है जिनमें 18 प्रतिशत हिन्दू और 8 प्रतिशत मुस्लिम हैं।

बिहार में जातीय राजनीति (Caste politics in Bihar)

वैसे तो राजनीति में जातीय समीकरण (Caste equation) लगभग हर जगह मायने रखती है, लेकिन बिहार में कुछ ज्यादा है। यहां के राजनीतिक दलों (Political parties of Bihar) और उनके नेताओं पर तो कई बार खुलकर जातीगत राजनीति करने का आरोप भी लगते रहे हैं। इनमें राजद सूप्रीमों लालू प्रसाद यादव का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। बिहार में जातीय राजनीति को हवा देने के लिए खुलकर सामने आए लालू यादव ने पिछड़े वर्ग के वोटरों को रिझाने के लिए कथित तौर पर एक से बढ़कर एक नारे दीए हैं जो आज भी लोगों के जुबान और ज़ेहन में है।

लालू यादव के बारे में कही जाती हैं ये बातें

प्रत्यक्ष रुप से सवर्णों के खिलाफ पिछडों की अगुवाई करते हुए लालू यादव के बारे में ये कहा जाता है कि उन्होंने एक बार खुले मंच से कहा था कि “भूरा बाल साफ करों”। लालू के इस कथन का मतलब क्या था ये कह पाना मुश्किल है लेकिन  लोगों के मुताबिक इसका संबंध बिहार चार उच्च जातियों से है जिसका अर्थ है भू-भूमिहार, रा-राजपूत, बा-ब्राम्हण और ल-लाला है। हालांकि लालू के इस कथन का कोई प्रमाण अभी तक सामने नहीं आया है।

MY समीकरण से लालू को बड़ा फायदा

इसके अलावे भी उन्होने कई बार ऐसे द्विअर्थीय वक्तव्य दिए जिसके एक अर्थ से उनके अंदर की जातीगत राजनीति की भावना झलकती रही है। MY (मुस्लिम-यादव)समीकरण भी लालू यादव की जातीगत राजनीति का ही एक हिस्सा है। MY समीकरण से आज भी उनकी पार्टी RJD को भरपूर समर्थन मिलते रहता है। आलम यह है कि आज पूरे प्रदेश में यादव समुदाय का एक ही नेता है लालू यादव।

समय-समय पर मोदी के बारे में भी होती रही है चर्चा

इधर प्रधान मंत्री मोदी के नाम पर वोट मांगने वाले NDA के नेताओं ने भी कई बार मंच से उन्हे पिछड़ा वर्ग का कहकर वोटरों से वोट की अपील की है। इसी तरह सभी दलों में कई और खास चेहरे हैं जो अपनी जाती के वोटरों को रिझाने के काम आते हैं।

मीरा कुमार के लिए प्रचलित है ये कहावत

लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार के बारे में उनके संसदीय क्षेत्र में एक कहावत लोगों के बीच अक्सर कही और सुनी जाती रही है ‘आधा कोईरी आधा चमार-अबकी बार मीरा कुमार’। दरअसल सासाराम संसदीय क्षेत्र एक सुरक्षित क्षेत्र है।यहां कोइरी और चमार जाति का वोट अगर किसी उम्मीदवार को ठीक से मिल गया तो जित पक्की है। ऐसे में वोट बैंक को लेकर मीरा कुमार के पिता जगजीवन राम की जाति और उनकी सास  सुमित्रा देवी की जाति कोइरी को जोड़कर मीरा कुमार को आधा-आधा माना जाता है।

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