भारतीय सेना का एक जवान, जिसकी यादों से आज भी थर्रा जाती है पाकिस्तान की ज़मीन

नई दिल्लीः भारतीय इतिहास के पन्ने योद्धाओं की वीर गाथाओं से भरे पड़े हैं। यहां हर काल में एक ऐसा योद्धा हुआ है, जिसकी वीरता ने पुरे विश्व में भारत का मष्तक गर्व से ऊंचा किया है।

सेना दिवस पर आज हम आपको एक ऐसे हीं वीर योद्धा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसकी यादों से आज भी पाकिस्तान की ज़मीन थर्रा जाती हैं।

ये किस्सा सन् 1965 का है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भारत में अस्थिरता उत्पन्न करने और शासन-व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह भड़काने की योजना बना रहा था। इसके लिए उसने ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ के तहत जम्मू-कश्मीर में लगातार घुसपैठ करने की गतिविधियां शुरू कर दीं थी। तब 5 से 10 अगस्त के बीच भारतीय सेना ने भारी तादाद में पाकिस्तानी नागरिकों के घुसपैठ को उजागर किया था।

पकड़े गए घुसपैठियों से मिले दस्तावेजों के जरिए इस बात के पुख्ता सबूत भी मिले थे कि पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा जमाने के वास्ते गुरिल्ला हमले की योजना बनाई है। उस योजना को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान ने  30,000 छापामार हमलावरों को प्रशिक्षित किया था।

पाकिस्तान ने 8 सितम्बर 1965 की रात में भारत पर हमला बोल दिया। उस हमले का जवाब में भारतीय सेना के जवान मुकाबला करने के लिए खड़े हो गए। तब अब्दुल हमीद नाम का एक जवान पंजाब के तरनतारन जिले के खेमकरण सेक्टर में सेना की अग्रिम पंक्ति में तैनात था। पाकिस्तान ने उस समय के अपराजेय माने जाने वाले अमेरिकन पैटन टैंकों के साथ खेम करन सेक्टर के असल उताड़ गाँव पर हमला कर दिया।

उस वक्त भारतीय सैनिकों के पास न तो टैंक थे और ना बड़े हथियार, लेकिन उनके पास था भारत माता की रक्षा के लिए लड़ते हुए मर जाने का अडिग हौसला। भारतीय सैनिक अपनी साधारण थ्री नॉट थ्री रायफल और LMG के साथ पैटन टैंकों का सामना करने लगे। हवलदार वीर अब्दुल हमीद के पास “गन माउनटेड जीप” थी । वह जीप पैटन टैंकों के सामने मात्र एक खिलौने के सामान थी।

गन माउनटेड जीप से  नष्ट किए 7 पाकिस्तानी पैटन टैंक

वीर अब्दुल हमीद ने अपनी जीप में बैठ कर अपनी गन से पैटन टैंकों के कमजोर अंगों पर एकदम सटीक निशाना लगाकर एक-एक कर धवस्त करना शुरु कर दिया। उनको ऐसा करते देख दुसरे सैनिकों का भी हौसला बढ़ गया और देखते ही देखते पाकिस्तान फ़ौज में भगदड़ मच गई। अकेले वीर अब्दुल हमीद ने अपनी “गन माउनटेड जीप” से 7 पाकिस्तानी पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया।

देखते ही देखते भारत का असल उताड़ गाँव “पाकिस्तानी पैटन टैंकों” की कब्रगाह बन गया। लेकिन भागते हुए पाकिस्तानियों का पीछा करते वीर अब्दुल हमीद की जीप पर एक गोला गिरा और वे बुरी तरह से जख्मी हो गए। जख्म इतना गहरा था कि उसके अगले दिन 9 सितम्बर को उनका स्वर्गवास हो गया। हालांकि इसकी अधिकारिक घोषणा 10 सितम्बर को की गई थी।

बता दें इस युद्ध में साधारण गन माउनटेड जीप के हाथों हुई पैटन टैंकों की बर्बादी को देख अमेरीका भी परेशान हो गया था। उसे अपने बनाए पैटन टैंकों के डिजाइन को लेकर पुन: समीक्षा करनी पड़ी थी। लेकिन वे पैटन टैंकों के सामने केवल साधारण गन माउनटेड जीप को देखकर हीं समीक्षा कर रहे थे, उसको चलाने वाले वीर अब्दुल हमीद के हौसले को नहीं।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here