जानिए क्या है चुनाव आचार संहिता जिसके प्रति राजनेता रहते हैं सजग

नई दिल्लीः आचार संहिता (Code of conduct), चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए वे खास नियम हैं, जिनका पालन करना हर राजनीतिक दल और हर उम्मीदवार के लिए बेहद जरूरी होता है। आचार संहिता का उल्लंघन करने पर सख्त से सख्त सजा हो सकती है। उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। एफआईआर (FIR) हो सकती है और उम्मीदवार को जेल भी जाना पड़ सकता है। देश में अब तक कई राजनेता आचार संहिता उल्लंघन मामले में आदालतों का चक्कर काट चुके हैं।

सबसे बड़ी और अहम बात ये है कि आचार संहिता (Code of conduct) लागू होने के बाद सरकार कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकती और न ही सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल चुनाव कार्यों के लिए कर सकती है। इसमें चुनावी भाषणों, बैठकों, मतदान केंद्रों, चुनावी घोषणा पत्रों, चुनावी रैलियों और प्रदर्शनों से जुड़े नियम भी खास तौर से शामिल होते हैं।

चुनाव आयोग द्वारा लागू की जाने वाली आचार संहिता (Code of conduct) का मकसद हर हाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष और साफ-सूथरा चुनाव संपन्न करवाना है। आचार संहिता लागू होने से लाकर खत्म होने तक चुनाव आयोग मजबूत और निर्णायक भूमिका में होता है।

बता दें चुनाव आचार संहिता पहली बार 1960 में केरल विधानसभा चुनाव में लागू की गई थी। जबकि, 1962 के चुनाव के बाद से इसे सभी पार्टियों ने विस्तार से अपनाना शुरू कर दिया। यह नियम चुनाव तारीख की घोषणा के साथ ही लागू हो जाते हैं और तब तक प्रभावी रहते हैं, जब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से समपन्न न हो जाए।

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