सावधन! आपका कंप्यूटर तबाह कर सकता है आपकी जिन्दगी

कंप्यूटर, Computer

नई दिल्लीः आजकल कंप्यूटर मशीन बनते इंसान की जिंदगी का एक अहम हिस्सा हो गया है।लटेक्नोलॉजी के इस युग में लैपटॉप या कम्प्यूटर के बगैर हम अपने बजूद की कल्पना भी नहीं कर सकते। हमारे रोजमर्रा के ज्यादातर काम और यहां तक कि व्यक्ति का भविष्य और जॉब कंप्यूटर पर ही बेस्ड है। लिहाजा कंप्यूटर का अधिकाधिक उपयोग होना लाजिमी है। लेकिन कंप्यूटर के अधिक इस्तेमाल के कारण बीमारियां भी उतनी ही तेजी से पनप रही हैं जितनी तेजी से कंप्यूटर हमारे काम को अंजाम देता है।

कंप्यूटर के इस्तेमाल से शरीर को नुकसान

अगर कंप्यूटर एक साथ कई कामों को अंजाम देता है तो वह एक साथ कई बिमारियों को निमंत्रण भी देता है। डॉक्टरों के पास मांसपेशियों नें अकड़न, जोड़ों, कमर दर्द, स्ट्रेस जैसी समस्याओं के मरिजों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इन मरिजों में ज्यादातर वैसे लोग शीमिल हैं जो कंप्यूटर पर चार घंटे से अधिक देर तक काम करते हैं।

सिरदर्द और माइग्रेन जैसी बिमारियों का जन्मदाता

कंप्यूटर या लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का उपयोग सिरदर्द और माइग्रेन जैसी बिमारियों का एक बड़ा कारण है। यदि आप लंबे वक्त तक कंप्यूटर पर काम करते हैं तो आपको सिरदर्द और माइग्रेन जैसी बिमारियों का सामना करना पड़ सकता। माना जाता है कि कंप्यूटर के स्क्रीन की रोशनी, पैटर्न और छवियां व्यक्ति के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं जिसके कारण ज्यादातर लोग सिरदर्द से ग्रसित हो जाते हैं।

बढ़ती हैं मांसपेशियों की समस्या

वैसे तो लैपटॉप या कंप्यूटर का उपयोग करने के कई तरीके हैं, लेकिन आमतौर पर लोग कुर्सी पर बैठकर हीं कंप्यूटर या लैपटॉप चलाते हैं। एक रिसर्च के मुताबिक लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर पर काम करते रहने से मांसपेशियां थक जाती हैं जिससे मांसपेशियों में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है और धिरे-धिरे इंसान उससे पिड़ित हो जाता है। इसके अलावा पैर, सीना, भुजाएं और कंधें सुन्न हो जाते हैं। कंप्यूटर के सामने देर तक बैठकर काम करने का यह एक बड़ा नुकसान है।

कंप्यूटर से आंखों को नुकसान

कंप्यूटर पर काम करते समय लगातार स्क्रीन पर देखते रहने से आंखें प्रभावित होती हैं। अमेरिका में हुई एक स्टडी में पाया गया है कि लंबे समय तक स्क्रीन पर देखते रहने से लोगों को आंखों में थकान, खुजली, आंखों से पानी गिरना और आंखों में भारीपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण आंखों की रोशनी समय से पहले कमजोर हो जाती है।

तनाव में वृद्धि

आम तौर पर ऐसा देखा गया है कि बेहतर से बेहतर माहौल में भी अधिक देर तक लैपटॉप या कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाले लोग अकारण हीं तनाव से ग्रसित होते हैं। घंटों कंप्यूटर पर काम करने के कारण व्यक्ति की एकाग्रता में कमी आती है, उसे धीमा सिरदर्द चौबीस घंटे होता है और एक स्थिति ऐसी आती है जब व्यक्ति गंभीर स्ट्रेस, डिप्रेशन और विभिन्न मानसिक समस्याओं से ग्रसित हो जाता है।

कंप्यूटर चलाने से बढ़ता है मोटापा

लैपटॉप, कंप्यूटर और टैबलेट का अधिक देर तक इस्तेमाल करना आजकल लोगों की जीवनशैली में शामिल हो गया है। कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करने वाले लगभग 30 प्रतिशत लोग बहुत तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटर का इस्तेमाल सभी उम्र के लोगों, खास कर बच्चों को सुस्त और आलसी बना रहा है। आलस की वजह से उनमें मोटापे की संभावना बढ़ जाती है जिससे डायबिटीज और हृदय रोगों जैसी घातक बिमारियों का भी खतरा बना रहता है।

कंप्यूटर चलाने वातों के कमर में दर्द

हम अक्सर देखते हैं कि कंप्यूटर पर देर तक काम करने वाले लोग शरीर को लचीला कर और झुकाकर हीं बैठते हैं। चूंकि लंबे समय तक बैठना होता है इसलिए इतनी देर तक शरीर को सीधा नहीं रखा जा सकता है। इस कारण कमर और रीढ की हड्डी में अधिक तनाव उत्पन्न होता है जिसके कारण गंभीर दर्द शुरू हो जाता है। इसके अलावा जोड़ों, कंधों, पैरों, घुटनों, हाथ की उंगलियों और कंधों में भी देर तक कंप्यूटर पर काम करने के कारण गंभीर दर्द होता है।

गर्दन, कंधा और उंगलियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव

कंप्यूटर के कारण शरीर के मस्कुलोस्केलेटल हिस्सों में लगातार तनाव बने रहने के कारण रिपिटेटिव स्ट्रेस इंजरी की समस्या हो जाती है। इससे गर्दन, कंधा और उंगलियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं और इनमें लगातार अकड़न और ऐंठन बनी रहती है। इसलिए इस समस्या से बचने के लिए बीच बीच में ब्रेक लेना जरूरी माना जाता है।

गर्भपात और नपुंसकता

कंप्यूटर से विकिरण (radiation) निकलता है क्योंकि ज्यादातर कंप्यूटरों में कैथोड रे ट्यूब (CRT)) लगी होती है और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते समय इसमें से एक्सरे किरण निकलती है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती है। इन किरणों की चपेट में आने से कैंसर, माइग्रेन, अनिद्रा और ट्यूमर जैसी कई गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। कई बार गर्भवती महिलाओं को गर्भपात भी हो जाता है। यह पुरुषों में नपुंसकता को भी बढ़ाता है।

 स्लो मेटाबोलिज्म का खतरा

अधिक देर तक एक जगह बैठकर कंप्यूटर पर काम करने के कारण वयस्कों में मृत्युदर बढ़ी है। डॉक्टरों का मानना है कि लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने के कारण मांसपिशयां संकुचित हो जाती हैं जिसके कारण ब्लड स्ट्रीम से वसा बहुत धीमी गति से निकलती है और शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है। मेटाबोलिज्म धीमा पड़ जाता है जो एक साथ कई बिमारियों का सबसे बड़ा कारण है।

कंप्यूटर के दुष्प्रभाव से बचने का तरीका

बहरहाल आज के दौर में आप कहीं भी चले जाओ कंप्यूटर से पिठा नहीं छुड़ा सकते, लेकिन कसावधानियों को बरतते हुए कुछ हद तक आप इन बिमारियों के गिरफ्त में आने से बच सकते हैं। इसके प्रकोप से पचने केलिए आपको अपने खानपान पर विशेष ध्यन रखना होगा। साथ हीं आपको लगातार कंप्यूटर पर बैठने के बजाय समय-समय पर ब्रेक भी लेना भी लेना होगा।

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