मकर संक्रांति पर जानिए क्या हैं इसके वैज्ञानिक महत्व और धार्मिक मान्यताएं

पटनाः (मकर संक्रांति 2019) सनातन धर्म में पर्व और त्योहारों का महत्व है। हर पर्व और त्योहार के पीछे आस्था जुड़ी है। इसे लेकर पाश्चात्य विचारधाराएं भारतीय रीति रिवाजों पर अक्सर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती रहती हैं। लेकिन अगर आप हिंदू धर्म से जुड़े त्योहारों को देखें, तो कहीं न कहीं मौसम और महीनों से इनका गहरा ताल्लुक है, जिसका वैज्ञानिक आधार है।

मकर संक्रांति और वैज्ञानिक नज़रिया

वैसे तो सनातन धर्म में सभी त्योहारों का आधार विज्ञान है, लेकिन आज बात मकर संक्रांति पर। जैसा कि हम सभी जानते हैं जनवरी माह में लगभग संपूर्ण उत्तर भारत में ठंड का प्रकोप चरम पर रहता है। जनवरी के मध्य यानी 14 या 15 जनवरी से इसमें गिरावट आने लगती है। मौसम में बदलाव की वजह से शरीर की अंदरुनि क्रियाएं हद तक कम हो जाती हैं और पाचन तंत्र अपना काम पुरी तरह से नहीं कर पाता। लिहाजा रोगों के पनपने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इन रोगों पर नियंत्रण करने के लिए जीवनशैलि जैसे रहन-सहन और खान पान पर विशेष ध्यान रखना होता है जो इन त्योहारों के रूप में हमसे जुड़ते हैं।

बढ़ने लगता है वातावरण में गर्मी का अंश

मकर संकांति के दिन लोग सुबह सुबह स्नान करते हैं। इसके साथ तिल और गुड़ के लड्डू का सेवन करते हैं। ये एक वैज्ञानिक तथ्य भी है कि मकर संक्रांति या खिचड़ी के बाद से सूरज अपनी दिशा को बदलना शुरू कर देता है। दक्षिरायण से सूरज उत्तरायण होने लगता है। वातावरण में धीरे धीरे गर्मी का अंश बढ़ने लगता है।

क्यों खाते हैं  तिल-गुड़

मकर संक्रांति में हम तिल-गुड़ का सेवन करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।

मकर संक्रांति के दिन तिल के लड्डू खाने की भी परंपरा हैं। वजह है तिल और गुड़ का अद्भुत गुंड़। तिल के लड्डू में बड़ी मात्रा में गुड फैट पाया जाता है, जो हृदय, त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है। ये बेहतर एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करते हैं और सर्दियों में रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। इसके साथ ही इनमें पाए आयरन एनीमिया को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है।

गर्म होती है गुड़ की तासीर

जैसा की हम सभी जानते हैं तिल में तेल की प्रचुरता रहती है और गुड़ की तासीर गर्म मानी जाती है। लिहाजा तिल और गुड़ को मिलाकर जो खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं उससे हमारे शरीर को जरूरत के हिसाब से गर्मी मिलती रहती है।

तिल में पाया जाता है पर्याप्त फाइबर

ठंड के कारण पाचन शक्ति भी मंद हो जाती है। तिल में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन शक्ति को बढ़ाता है। तिल में कई प्रकार के पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्‍प्‍लेक्‍स और कार्बोहाइट्रेड आदि पाए जाते हैं, जो इस मौसम में शरीर को तंदरुस्त बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। वहीं गुड़ मैग्नीशियम का एक बेहीतरीन स्रोत है जिसकी आवश्यकता ठंड में शरीर को होती है।

मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान का महत्व

मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। माना जाता है कि इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का बहुत बड़ा महत्व है।

मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व

इस दिन खिचड़ी का सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है। इसमें अदरक और मटर मिलाकर बनाने पर यह शरीर को रोग-प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here