RLSP चीफ उपेन्द्र कुशवाहा को नाग से खतरा, मणि नीतीश के पास है

पटनाः RLSP चीफ उपेन्द्र कुशवाहा को नाग से खतरा है। एक नाग उनको डंसने पर अड़ा है और बकायदा इसका ऐलान भी कर चुका है। अपने साथ किए उनके व्यवहार से आहत नाग अब हर पल बस एक ही फिराक में है कि कब उपेन्द्र कुशवाहा उसके लपेटे में आएं और वो उनको मजे चखाए। हो सकता है ये बात आपको फिजूल लगे, लेकिन सोलह आने सही है, क्योंकि वो नाग कोई और नहीं बिहार के सियाससत में गहरी पैठ रखने वाले नागमणि हैं।

RLSP छोड़ JDU का दामन थाम चुके नागमणि ने न्यूज़ स्टंप (News Stump) से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में कहा कि लोग कहते हैं कि जहां नाग होता है वहीं मणि होता है, लेकिन इस बार नाग और मणि अलग-अलग हैं। जहां मणि नीतीश  कुमार के साथ है और JDU  की ताकत बढ़ा रहा है वहीं नाग RLSP चीफ उपेन्द्र कुशवाहा  के सामने फन उठाए उनकी राजनीति जीवन की चिता सजा रहा है।

उपेन्द्र कुशवाहा को अपना सबसे बड़े दुश्मन मानते हैं नागमणि

उपेन्द्र कुशवाहा को व्यक्तिगत रुप से अपना दुश्मन मान चुके नागमणि की माने तो उनका अब एक ही मकसद रह गया है RLSP चीफ उपेन्द्र कुशवाहा को हर मोर्चे पर धुल चटाना। इसके लिए वो पुरी तरह कमर कस चुके हैं और इसका असर इसी लोकसभा चुनाव में दीखा जाने का दावा भी कर रहे हैं।

कुशवाहा जाति के लिए बद्नुमा दाग हैं उपेन्द्र कुशवाहा- नागमणि

नागमणि की माने तो उपेन्द्र कुशवाहा ने अब तक कुशवाहा समाज के पीठ में छुरा भोंकने का काम किया है। उपेन्द्र कुशवाहा जैसै मौकापरस्त लोग अपने सामाज और जाति के लिए महज बद्नुमा दाग हैं जो शिर्फ और शिर्फ कुशवाहा समाज को छलने का काम करते है।

उपेन्द्र कुशवाहा पर नागमणि ने लगाया था पैसा लेकर टिकट बेचने का आरोप

बता दें कुछ माह पहले जब RLSP में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उम्मिदवारों की चयन प्रक्रिया चल रही थी उसी दौरान उपेंन्द्र कुशवाहा और नागमणि के बीच भारी तनाव पैदा हो गया था। नागमणि ने RLS चीफ उपेन्द्र कुशवाहा पर पैसे लेकर कर्यकर्ताओं की अनदेखी करने और पैसे लेकर टिकट बेचने का आरोप लगाया था। बात शुर्खियों में आई तो नागमणि ने RLSP से किनारा लिया।

उपेन्द्र कुशवाहा के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं नागमणि

नागमणि फिलहाल JDU का दामन थाम चुके हैं और उपेन्द्र कुशवाहा के खिलाफ NDA के लिए कुशवाहा जाति को गोलबंद करने में जुटे हैं। उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी RLSP बिहार के 5 सिटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकी अकेले उपेंद्र कुशवाह दो सीट उजियारपुर और काराकाट से चुनाव लड़ रहे हैं। उजियारपुर में चुनाव संपन्न हो चुका है जबकि काराकाट में चुनाव 19 मई को होना है।

काराकाट में सजातिय JDU उम्मीदवार महाबली सिंह से है उपेन्द्र कुशवाहा का मुकाबला

काराकाट में उपेन्द्र कुशवाहा का सिधा मुकाबला NDA के JDU  उम्मीदवार महाबली सिंह से है। महाबली भी कुशवाहा समाज से आते हैं और वे दो बार इस सीट से सांसद रह चुके हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें (ओबरा, गोह, नबीनगर, नोखा, डेहरी और काराकाट) हैं। 6 विधानसभा क्षेत्रों में से 4 पर RJD, 1 पर BJP और एक पर JDU का कब्जा है।

उपेन्द्र कुशवाहा को यादव और मुसलमान वोट का मिल सकता है फायदा

दोनों उम्मीदवार अपनी-अपनी जातीय स्थिति और उसके आधार पर बनने वाली जातीय गोलबंदी को ध्यान में रखते हुए जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। RLSP के उपेन्द्र कुशवाहा को कोईरी, यादव और मुसलमान के वोटों का गठजोड़ मजबूत बनाता है। वहीं JDU के महाबली सिंह सवर्ण और JDU के अतिपिछड़े वोटर्स के सहारे हैं।

काराकाट लोकसभा क्षेत्र का जातीय समीकरण

बात यहां के जातीय समीकरण की करें तों इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी यादव जाति की है। प्राप्त आंकड़े के मुताबिक कुल जनसंख्या में यादव 17.39 %, राजपूत 10.76 %, कोइरी 8.12 %, मुसलमान 8.94 %, ब्राह्मण 4.28 % और भूमिहार 2.94 % हैं। ऐसे में ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नागमणि की नाराजगी उपेन्द्र कुशवाहा को कितनी छति पहुंचा पाती है।

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