विंग कमांडर अभिनंदन की सकुशल वापसी को इमरान की दरियादिली न समझें

पटनाः जब से विंग कमांडर अभिनंदन की देश वापसी का ऐलान हुआ है पूरे देश में खुशी का माहौल बन गया है। खुशी ऐसी कि लोग पाक के नापाक हरकतों को भी नज़रअंदाज कर गए हैं। आलम ये है कि खुशी से पागल कुछ लोग इसे पाक पीएम इमरान की दरियादिलि समझ कर धन्यवाद दे रहे हैं तो कुछ लोग मान रहे हैं कि पाकिस्तानीयों का हृदय परिवर्तन हो गया है और वे सम्राट अशोक की तरह बुद्ध की शरण की तरफ बढ़ चले है।

ये सोचने वाली बात है कि कल तक जो पाकिस्तान हिन्दुस्तानियों के लहु से श्रृंगार करने में यकिन रखता था अचानक उसे कौन सा स्वप्न आया जिसने उसका अंदाज बदल दिया। साक्षात देवदूत के आने पर डाकू रत्नाकर को भी वाल्मीकि बनने में वक्त लगा था। लेकिन इमरान तो उनसे भी बढ़कर निकले, एक रात में ही इमान बदल लिया।

खैर सबकी अपनी अपनी समझ होती है, अपना-अपना तर्क होता है, लेकिन मेरी समझ से ये सब उतना ही झूठ है जितना पत्थर पर दूब का उगना और कुत्ते की दुम का सिधा होना है। दरअसल अभिनंदन की सकुशल रिहाई उस खौफ का नतिजा है जिसे हिन्दुस्तान के जवानों ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के दील में पैदा किए हैं उसके घर में घुसकर।

गौर करें पाकिस्तान बनने से लेकर आज तक पाकिस्तान ने हमारे साथ क्या किया। हमने जब भी उसे प्यार से पुचकारा  उसने आंख दिखाई। हमने अमन की बात की उसने जहर उगला। हमने दोस्ती का हाथ बढाया उसने उंगली ही काट ली। आज आलम यह है कि कल वो क्या करेगा इस बात की गारंटी दे पाना भी बेमानी है।

अगर इमरान का दिल इतना ही नरम होता, तो क्या हमारे 40 जवान एक साथ इस तरह से मौत के घाट उतार दिए गए होते, क्या एक साथ 40 घर इस तरह से तबाह हुए होते, क्या 40 मांगे इस तरह से सुनी हुई होती? क्या इन सबकी जानकारी इमरान को नहीं थी?

साहब ये वो पाकिस्तान है जो शिर्फ एक ही भाषा समझता है… मारकाट का। इसलिए फिर कहता हूं विंग कमांडर अभिनंदन की सकुशल वापसी को इमरान की दरियादिली न समझें यह उस खौफ का नतिजा है जिसे हिन्दुस्तान के जवानों ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के दील में पैदा किए हैं उसके घर में घुसकर।

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