General election 2019- चुनावी बेला, महागठबंधन में कोहराम

पटनाः बिहार में चुनावी परिदृश्य साफ होने लगा है। चुनाव की अधिसूचना जारी होने में वक्त नहीं है। भाजपा, जदयू और लोजपा ने आपस में क्रमशः 17, 17 और 6 सीटें बांट ली है। लेकिन महागठबंधन में कोहराम है। रोज इसके नेता विरोधियों पर तंज कसने में पीछे नहीं रहते किंतु भीतर में ज्यादा से ज्यादा सीटें लेने की होड़ मची है। सजायाफ्ता लालू प्रसाद का रांची में दरबार सजता है…मंथन होता है…फोन पर तेजस्वी को निर्देंश मिलते हैं…लेकिन पेंच सुलझ नहीं पाता।

राजद का मनोबल हाई क्यों?

परिस्थितियां बता रही हैं कि राजद इस भरोसे है कि जमानत पर लालू बाहर आ जायें तो उनकी आंधी में सारे धुंध खत्म हो जायेंगे लेकिन जिस तरह मामला लटक गया, उसमें राहत जैसी बात की गुंजाईश कम है। लालू की हुंकार पर एमवाई का संयुक्त होकर बीजेपी को भगाने जैसी बात के भरोसे राजद निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच रहा है जबकि लालू के बूते ही उसने मनोबल हाई रखा हुआ है।

कभी रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा का बिदकना, टिकट के लिए 90 लाख एडवांस लेना, कभी मांझी का कांग्रेस की ओर से गर्मजोशी का अभाव…सब मिलकर महागठबंधन में रायता फैलाये है। बीच में धनपति मुकेश सहनी से लेकर पप्पू यादव व शरद यादव, कन्हैया कुमार जैसे झोल भी हैं।

भाजपा भी है परेशान

उधर भाजपा भी कम परेशानी में नहीं है। शत्रुघ्न सिंन्हा को बेटिकट करने के बाद पटना साहिब में कौन प्रत्याशी होगा, समझ में नहीं आ रहा। एक दिन पहले तक रास सांसद आरके सिन्हा का नाम आ रहा था। उस इलाके में उनका काम भी बोल रहा है, सामाजिक सरोकार भी रहा है। एक दिन बाद ही रविशंकर प्रसाद का नाम उछल गया। बड़बोले गिरिराज सिंह की सीट बदल रही है।

लोजपा कैंप निश्चिंत

एकलौता लोजपा खेमा है जो 6 सीट लेकर कोहराम से परे है। उसे मालूम है कि 6 प्रत्याशी या तो परिवारीजन होंगे या धनकुबेर बाहुबली।

सधी नीति जदयू की

सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू एनडीए का प्रमुख पार्टनर है। हाथ में सत्ता है, सधी रणनीति है, पैसा से लेकर उम्मीदवारों की कमी नहीं तो भला चिंता काहे की। अगला फेज जब उम्मीदवारों के एलान का आयेगा, महागठबंधन से भी तब सबकुछ साफ होगा…कौन कितने पानी में।

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