अयोध्या पर सियासत से किसका बढ़ेगा कद, शिवसेना या संघ का

1992 और अब 2018 राम की अयोध्या तब भी किले में तब्दील थी और लोगों में खौफ था आज भी है। 1992 में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद ढाह दी थी शिवसैनिकों ने और आज भी शिवसैनिकों का जमावड़ा हो रहा है। बदला है तो शासन। तब केंद्र में कांग्रेस और यूपी में मुलायम की सरकार थी, आज दोनों जगह भाजपा की है। विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के लिए आखिरी कोशिश कर रही है, तो शिवसैनिक भी निणार्यक मोड में हैं।

अयोध्या, शिवसेना

लखनऊः 1992 और अब 2018 राम की अयोध्या तब भी किले में तब्दील थी और लोगों में खौफ था, आज भी है। 1992 में 6 दिसंबर को शिवसैनिकों ने बाबरी मस्जिद ढाह दी थी। आज भी शिवसैनिकों का जमावड़ा हो रहा है। बदला है तो शासन।

तब केंद्र में कांग्रेस और यूपी में मुलायम की सरकार थी, आज दोनों जगह भाजपा की है। विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के लिए आखिरी कोशिश कर रही है, तो शिवसैनिक भी निणार्यक मोड में हैं।

लोकसभा चुनाव को लेकर सबमें है बेचैनी

दरअसल मंदिर की आकांक्षा के साढ़े चार साल बीत जाने और पांच राज्यों में चुनाव व अगले साल लोकसभा चुनाव की आहट को लेकर सबमें बेचैनी है। हिंदुत्व से विमुख हो रहे वोटरों को एकजुट करने की कवायद है, तो एक वर्ग में भारी डर भी।

राम मंदिर के सहारे महाराष्ट्र के बाहर निकलने की तैयारी में शिवसेना

जानकार बता रहे हैं कि अयोध्या में राम मंदिर के सहारे शिवसेना अब महाराष्ट्र के बाहर निकलने की तैयारी कर रही है। पार्टी को इस बात का पूरा अंदाजा हो गया है कि महाराष्ट्र में अब बीजेपी नंबर-2 की पार्टी बनकर नहीं रह सकती है।

ऐसे में अस्तित्व बचाए रखने के लिए अब शिवसेना ने अयोध्या का मुद्दा थामा है। लेकिन इस बात की भनक संघ और भाजपा को पहले ही लग चुकी है।

उद्धव ठाकरे के निशाने पर संघ प्रमुख

विजयादशमी के मौके पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे 25 नवंबर को अयोध्या जाने का ऐलान करते कि उससे पहले हीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग कर दी।

मोहन भागवत के इस बयान ने उद्धव ठाकरे की रणनीति पर पानी फेर दिया और इसके बाद से उद्धव ठाकरे के निशाने पर संघ प्रमुख भी आ गए।

विश्व हिंदू परिषद ने किया धर्म संसद का ऐलान

संघ से जुड़े संगठन विश्व हिंदू परिषद ने भी 25 नवंबर को अयोध्या में धर्म संसद का ऐलान कर दिया। विश्व हिंदू परिषद के ऐलान के बाद पूरे देश से लाखों कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचने को तैयार हुए।

जितनी तेजी से उद्धव ठाकरे 25 नवंबर को अयोध्या आने के पहले बयान और कार्यक्रम कर रहे थे उसी तरह विहिप भी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में सक्रिय हो चुकी थी।

अयोध्या में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की रैली

धर्म संसद को देखते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का एक दिन पहले ही यानी 24 नवंबर को अयोध्या पहुंचने का कार्यक्रम हो गया।

ठाकरे ने अयोध्या में रैली को संबोधित कर साधु-संतों के साथ बैठक भी की। यूपी में शिवसेना का कैडर इतना मजबूत नहीं है, इसलिए ठाकरे के साथ महाराष्ट्र से शिवसैनिक भी आए।

अयोध्या मामने पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई

जानकार कहते हैं कि इस पूरी कवायद के पीछे सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई भी हो सकती है, ताकि जनवरी में जब कोर्ट इसकी तारीख तय करने के लिए बैठे तो उसको इस मुद्दे की अहमियत के बारे में भी बताया जा सके।

फिलहाल 1992 के बाद अयोध्या एक बार फिर से गरम है। वैसे प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी है। सपा के अखिलेश यादव सेना तैयार रखने की मांग भी कर चुके हैं। देखना है कि संघ और शिवसेना में कौन बढ़त बनाता है।

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