हार से आहत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की सलाह

नई दिल्लीः कांग्रेस को अगले पांच सालों के लिए भंग कर देना चाहिए और उसे अगले 10 सालों तक कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। यह काम सिर्फ राहुल गांधी कर सकते हैं। अगर आजादी के बाद के लगभग 7 दशक तक कांग्रेस की गद्दी को अपने परिवार की बपौती बनाकर रखने के बाद उनके भीतर इस पार्टी के प्रति थोड़ी भी कृतज्ञता बाकी है तो उन्हें यह कर देना चाहिए।

जिस पार्टी ने आपके परिवार को इतना कुछ दिया हो उसके प्रति इतनी कृतज्ञता तो बनती ही है। अगर गांधी, सुभाष, तिलक जैसे राष्ट्रनायकों की विरासत वाली इस महान पार्टी के प्रति उनके कलेजे में ज़रा भी श्रद्धा बाकी है तो उन्हें यह कर देना चाहिए। उन्हें यह कर देना चाहिए कि सारे कांग्रेसी सांसद जो जीत कर आए हैं, इन 5 सालों के लिए बतौर निर्दलीय सांसद काम करें। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें चल रही हैं उनको आज़ादी हो कि वह जिस पार्टी का चाहें, दामन थाम लें। या तो कांग्रेस से मुक्त हो जाएं या सत्ता से मुक्त हो जाएं।

यह उसी तरह से है जिसे आयुर्वेद की पंचकर्म पद्धति में विरेचन कहते हैं। विरेचन यानी शरीर से सारा विष बाहर निकाल देना। उसे औषधियों को ग्रहण करने के अनुकूल बना देना। बेहतर स्वास्थ्य की ओर धीरे-धीरे आगे ले जाना। 1885 में स्थापित पार्टी पर ये एक ऐतिहासिक कर्ज़ भी है। ये कर्ज़ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अंतिम इच्छा का है। अपनी हत्या के तीन दिन पहले यानी 27 जनवरी 1948 को गांधी ने एक नोट में लिखा था कि अपने वर्तमान स्वरूप में कांग्रेस अपनी भूमिका पूरी कर चुकी है। इसे भंग करके एक लोकसेवक संघ में तब्दील कर देना चाहिए। यह  नोट एक लेख के रूप में 2 फ़रवरी 1948 को ‘उनकी अंतिम इच्छा और वसीयतनामा’ शीर्षक से ‘हरिजन’ में प्रकाशित हुआ। यही समय है जब राहुल गांधी को इस कर्ज़ को चुका कर स्वयं को इतिहास में अमर कर लेना चाहिए।

राहुल जी, इस देश में एक मजबूत विपक्ष की बड़ी सख्त जरूरत है। कांग्रेस के अलावा यह काम दूसरी कोई पार्टी नहीं कर सकती। 5 सालों के बाद नए सिरे से इस पार्टी में चुनाव कराए जाएं। किसी जमीन से जुड़े हुए करिश्माई व्यक्ति को पार्टी का अध्यक्ष चुना जाए और नए सिरे से आम जनता के संघर्षों में जुटा जाए। बीजेपी भी कभी 2 सीटों वाली पार्टी हुआ करती थी आज 303 सीटों के साथ चमक रही है। चमत्कार एक रात में नहीं होते पर चमत्कार होते जरूर हैं। अब इस पार्टी को परिवार की छाया से मुक्त करके देश के हवाले कर दीजिए। देश परिवार जरूर होता है पर परिवार कभी देश नही होता।

आप लोग की सबसे बड़ी दिक्कत यही रही है कि आप सालों साल इस परिवार को ही देश समझते आए हैं। आप तो आज़ादी के नारों के बहुत बड़े समर्थक हैं। समर्थन करने जेएनयू तक गए थे। अब आप आज़ादी के असली मायने समझिए। आपकी ये कांग्रेस अरसे से इसी बात का नारा लगा रही है कि आज़ादी! आज़ादी!! हमे चाहिए आज़ादी!!! आप कांग्रेस के दर्द को समझिए। इसे अब आज़ाद कीजिए। ये देश एक मजबूत विपक्ष का इंतज़ार कर रहा है। सत्ता कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, विपक्ष की ज़रूरत हमेशा रहेगी क्योंकि मजबूत विपक्ष ही लोकतंत्र का प्राण होता है।

यह विचार देश के वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक वाल से साभार प्रस्तुत किया गया है। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके अभिषेक प्रखर राजनीतिक विश्लेषक हैं।
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