क्या कुछ दिनों के लिए विरोधी दल अपने सुर बदल नहीं सकते

नई दिल्लीः भारत का विपक्ष अपनी मर्यादा को भूलता जा रहा हैं। कल भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर 1000 kg का बम गिराया था, जिसमें 300 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। निश्चय ही इसके लिए भारतीय वायुसेना प्रशंसा के पात्र हैं। सम्पूर्ण विपक्ष ने भारतीय वायुसेना के साहसिक कारनामों को सलाम किया था। परन्तु जिस प्रधानमंत्री ने यह साहसिक निर्णय लिया, उसकी प्रशंसा में विपक्ष के मुख से दो शब्द तक नहीं निकले। प्रधानमंत्री को इस ऐतिहासिक साहस भरे निर्णय के लिए बधाई तक नहीं दी। ऐसा करके विपक्ष ने खुद की प्रतिष्ठा को कलंकित किया।

राजनीति में आलोचनाओं का दौर चलता रहता हैं और चलते रहने भी चाहिए। परन्तु राष्ट्रहित में आपसी वैमनस्यता का त्याग भी करना चाहिए। विपक्ष को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी से सीखना चाहिए, जो भारत में लम्बे समय तक लोकसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। वे सत्ता पक्ष की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे, लेकिन राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ खड़े दीखते थे जिससे हमारा शत्रु भी दहल जाता था। 1971ई. में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जीतने पर उन्होंने इंदिरा गाँधी को दुर्गा का विशेषण दिया था।

आज के दौर में विपक्ष को स्व. वाजपेयी जी से प्रेरणा लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ राष्ट्रहित हेतु खड़े रहने चाहिए ताकि शत्रु राष्ट्र भारत की एकता देखकर दहल उठे। युद्ध तो सेना को करने हैं लेकिन युद्ध जीतने के लिए कुशल व मजबूत नेतृत्व की भी आवश्यकता पड़ती हैं। इस समय हमारा यह सौभाग्य हैं कि हमारे देश में इंदिरा के बाद एक ऐसा प्रधानमंत्री हुआ है जो शत्रु राष्ट्र के किसी भी मंसूबों को ध्वस्त करने में सक्षम है तथा राष्ट्र के सभी नागरिकों का विकास करते हुए विकसित श्रेणी की ओर पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं।

मुझे पता है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सब मुझे क्या समझेंगे, लेकिन इसकी परवाह नहीं क्योंकि हकीकत तो उनके दिल भी जानते हैं जो नाम सुनना भी पसंद नहीं करते।

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here