सीट बंटवारे से खुश हुए नीतीश कुमार को अब देनी होगी असली अग्नि परीक्षा

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पटना: बिहार एनडीए में सीटें तो तय हो गईं। कहिये कि भाजपा के सीने पर चढ़कर यह काम कराया गया, लेकिन इसके सूत्रधारों की अग्नि परीक्षा अब होगी। उन्हें 40 में से कम से कम 30 सीटें तो कब्जानी ही होगी।

सब कह रहे हैं कि इसमें सबसे ज्यादा फायदा लोजपा को हुआ। उनके सुप्रीमो रामविलास पासवान की अगले कैबिनेट में जगह तो फाइनल है ही, उनके सभी परिजन संसद का टिकट हाथ में लहराते नजर आयेंगे। लेकिन असली फायदा तो जदयू को हुआ। उसके अभी 2 सांसद हैं जबकि लड़ने को 17 सीटें मिली हैं।

17 सीटों पर लड़ेगा जदयू

ऐसे में घाटा भाजपा को है क्योंकि अभी उसके 22 सांसद हैं लेकिन उसे 17 पर ही लड़ना होगा। उसे बेदखल होने वालों सांसदों की नाराजगी झेलनी होगी। लेकिन नीतीश कुमार के जदयू को सबसे अधिक चुनौती झेलनी होगी। लंबे समय तक के शासन में स्थायी रूप से दिखाई देने वाले तो कई काम हैं। शराबबंदी और दहेजमुक्ति जैसे अभियान से समाज सुधारक की छवि तो जरूर बनी, ब्रांडिंग भी हुई लेकिन इनकी विफलताओं की कहानी भी लंबी है। सबसे अधिक तो शराबबंदी है।

शराबबंदी की विफलता

दो साल से अधिक हो गये शराबबंदी को लेकिन अभी भी सूबे के काफी अंदर तक ब्रांडेड दारु की बड़ी—बड़ी खेप मिल ही रही है। पुलिस वाले खुद दारु की मस्ती लेते नपे हैं। मालखाने से हजारों बोतलें पिछले दरवाजे से बेची गई और बता दिया गया कि चूहे पी गये। शराबबंदी की विफलता के दो साल बाद एक आईजी रैंक के आईपीएस का वर्दी पहन कर शराबमुक्ति के लिए राज्य का भ्रमण करना भी राजनीति का ही हिस्सा बन गई है।

पीके के भरोसे क्या-क्या होगा

नीतीश कुमार सफलता के मोर्चे पर चाहे जिस पायदान पर हों, उनके सामने दहाड़ता हुआ महागठबंधन और उसके अघोषित नेता तेजस्वी यादव हैं जिनके पीछे लालू प्रसाद का शातिराना दिमाग है। उधर चुनाव प्रबंधन में माहिर रह चुके पीके हैं जिनको नीतीश कुमार ने चुनावी बेड़ा पार कराने के लिए अहम पद दे दिया है। लेकिन यूपी चुनाव में मिली विफलता का भूत भी उनके पीछे है।

PU छात्रसंघ चुनाव में दिखा PK दम

हालांकि पटना विवि छात्रसंघ के चुनाव में उन्होंने अपनी रणनीति जरूर दिखा दी है लेकिन जंगे मैदान में यह अब कितना कारगर होगा, कहना कठिन है। दारोमदार नीतीश—पीके पर ही है क्योंकि भाजपा के राज्यस्तीय नेता अपने बौनेपन से बिहार में मोदी लहर नहीं ला सकते। उसके कुछ नेता नीतीश सरकार में मंत्री पद भी संभाले बैठे हैं लेकिन उनकी उपलब्धि रेखांकित करने लायक नहीं है।

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