पशोपेश में लालू का कुनबा, बरसेगा कोप या पलटी मारेंगे तेज प्रताप ?

पटनाः याद कीजिए न्यूज स्टंप पर नवंबर 2018 में आयी वह खबर जिसमें तेजप्रताप के साइकिल से गिरने के बहाने कुछ चर्चा हुई थी। आज चुनावी महासमर की बेला में फिर तेज प्रताप ने अपने बयानों से अपने पिता के द्वारा स्थापित पार्टी राजद संभाल रहे छोटे भाई तेजस्वी को चुनौती देकर राजद को नुकसान पहुंचाने की मुहिम चला रखी है।

दिमाग में है घरेलू पार्टी का वहम

दरअसल, राजद को बनाकर लालू ने खुद तो राज भोगा ही, बुरे वक्त में पत्नी राबड़ी देवी को भी सत्ता भोगने का सुख दिया। स्थापना काल से खुद लालू प्रसाद ही सुप्रीमो रहे। बिल्कुल रामविलास पासवाल के लोजपा की तरह। फर्क ये रहा पासवान की आकांक्षा अपने भाई—बंधुओं तक सीमित रही जबकि लालू प्रसाद ने गरीबों—पिछड़ों में राजनीतिक चेतना जगाकर कई नेताओं को पैदा किया। हालांकि वे सवर्णों के प्रति कठोर रहे लेकिन उनकी छतरी के नीचे कई दिग्गज भी जांत—पांत के दायरे से निकलकर साथ हो लिए।

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सबको भा रहा था सामाजिक न्याय का नारा

सामाजिक न्याय का नारा सबको भा रहा था। रघुवंश प्रसाद सिंह, रघुनाथ झा, जगदानंद सिंह आदि ऐसे ही लोगों में थे जो गंभीरता के साथ राजपाट चलाते रहे। तब तेज प्रताप व तेजस्वी बचपन के दौर में थे। कहा जाता है कि नरसिंह राव के वक्त ये दानों जब लालू के साथ मिलने जाते थे तब नाना कहकर परिचय कराया जाता था और इनको टॉफी दी जाती थी।

समय बदला लेकिन ​विचार नहीं

वक्त ने जब करवट ली तब लालू न केवल उखड़ गये बल्कि सजायाफ्ता होकर सलाखों के पीछे भी हो गये। शिफ्ट तो हो गये रांची लेकिन वहीं दरबार सजने लगा। लोकसभा के लिए उनकी सलाह पर राबड़ी—तेजस्वी को आगेकर गठबंधन से लेकर उम्मीदवार तक का फैसला हुआ। इस फैसले से तेज प्रताप बिदक गये और अपने समर्थकों के लिए भी सीट मांग दी।

चुनावी माहौल में पारिवारिक विवाद ने पारा गरमा दिया। जब पंचायत लगाकर तेज लोगों से लिते और समस्या सुलझाते तो सबको लगता था कि राजद को मजबूती मिल रही है लेकिन अपने समर्थकों के लिए सीट को लेकर अड़ने पर पार्टी की भी भवें तनने लगीं।

चिंगारी से आग लगने का खतरा

तेज प्रताप के तेवर से फैली चिंगारी आग का रूप लेने लगी है। कई खुलासों के साथ अशरफअली फातमी भी टिकट से वंचित होते ही आग—बबूला हो गये। धमकी तक दे डाली। खबर ऐसी आ चुकी है कि तेज को पार्टी इग्नोर करती रहेगी। लालू भी खिसियाये बताये जा रहे है। लेकिन क्षेत्र में तेज समर्थक पार्टी को कितना नुकसान पहुंचा पाते हैं, यह देखना होगा। यह भी हो सकता है कि पारिवारिक दबाव से तेज प्रताप यू टर्न भी ले लें।

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