विश्‍व व्‍यापार संगठन (WTO) की मंत्रीस्‍तरीय बैठक का उद्घाटन सत्र नयी दिल्‍ली में शुरु

WTO

नई दिल्लीः बहुपक्षीय व्‍यापार प्रणाली से जुड़े अहम मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा के लिए विश्‍व व्‍यापार संगठन की मंत्रीस्‍तरीय बैठक का उद्घाटन सत्र सोमवार को नयी दिल्‍ली में शुरु हुआ। यह दो दिवसीय बैठक WTO में सुधार के एजेंडे में विकास को केन्‍द्र में रखते हुए वार्ता को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने का विकासशील देशों का एक प्रभावी प्रयास है। इस दो दिवसीय बैठक में विकासशील और बेहद कम विकसित देशेां के प्रतिनिधिमंडल हिस्‍सा ले रहे हैं। बैठक में शीर्ष अधिकारियों के बीच आज हो रही वार्ताओं के आधार पर मंगलवार को मंत्रीस्‍तरीय बातचीत होगी।

वाणिज्‍य सचिव डॉक्‍टर अनूप वाधवन ने प्रतिनिधिमंडल में आए वरिष्‍ठ अधिकारियों का स्‍वागत किया। बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉक्‍टर वाधवन ने कहा कि बहुपक्षीय नियमों पर आधारित व्यापार प्रणाली के समक्ष मौजूद चुनौतियों की प्रमुख वजह एकपक्षीय उपायों और इसकी प्रतिक्रिया में उठाए गए कदमों तथा प्रमुख मुद्दों से जुड़ी वार्ताओं और अपीलीय निकायों में आने वाला गतिरोध है।

उन्‍होंने कहा कि अपीलीय निकाय में गतिरोध WTO की विवाद निबटारा प्रणाली तथा संगठन के कार्यनिष्‍पादन के लिए एक बड़ा खतरा है। उन्‍होंने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद वाला मौजूदा वैश्विक आर्थिक वातावरण, व्‍यवस्‍था के मूल सिद्धांतों के लिए परीक्षा की घड़ी है। विकासशील और कम विकसित देशों की सेहत के लिए यह कतई अच्‍छा नहीं है।

बकौल वाधवन अपीलीय निकाय की विफलता का असर कम विकसित और विकासशील देशों में अधिक महसूस किया जाएगा, जहां विकसित देशों की तुलना में नियम आधारित प्रणाली के संरक्षण की ज्‍यादा आवश्यकता है। ऐसे में इस प्रणाली को संरक्षित रखने और समस्या का रचनात्मक समाधान तलाशने की तत्‍काल आवश्‍यकता है।

उन्होने कहा कि विश्व व्यापार संगठन की मौजूदा स्थिति के कारण उसमें नए सिरे से सुधार की आवश्‍यकता और अधिक महसूस की जा रही है। अब तक सुधार के लिए जिस एजेंडे को बढ़ावा दिया जा रहा था उससे विकासशील देशों की समस्‍याओं का समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में नयी दिल्‍ली की बैठक सुधार एजेंडे में विकास के मुद्दे को केन्‍द्र में रखने के संकल्‍प की फिर से पुष्टि किए जाने का अवसर प्रदान करती है।

सुधार की इन पहलों में  समावेशिता और  बिना भेदभाव वाले वातावरण को प्रोत्‍साहित करने, परस्‍पर विश्वास का निर्माण करने तथा मौजूदा समझौतों में विद्यमान असमानताओं और गंभीर विषमताओं को दूर करने के उपाय शामिल किए जाने चाहिए, क्‍योंकि ये विषमताएँ कम विकसित और विकासशील देशों के हितों और उनकी प्राथमिकताओं के विरुद्ध हैं।

बातचीत के एजेंडे में कम विकसित और विकासशील देशों की प्रमुख चिंताओं से जुड़े विषयों पर अबतक गंभीरता के साथ चर्चा नहीं की गई। WTO में विकासशील विश्‍व का प्रतिनिधित्‍व करने वाले ज्‍यादातर  देशों के लिए कृषि सब्सिडी बड़ी प्राथमिकता है। इस सोच और व्‍यवस्‍था को मौजूदा जनादेश के जरिए बदलने की मजबूत कोशिश हो रही है।

WTO में इस समय मत्स्य पालन सब्सिडी पर गहनता से बातचीत चल रही है ताकि इस मुद्दे को बेहतर तरीके से समझा जा सके और दिसंबर 2019 तक इसपर एक सार्थक समझौता किया जा सके। मत्स्य सब्सिडी पर एमसी 11 का निर्णय स्पष्ट रूप से यह कहता है कि इस बारे में विकासशील देशों के लिए एक उचित और प्रभावी तथा विभेदक उपाय होने चाहिएं। कम विकसित देशों  सहित विकासशील देशों के लिए भी यह जरूरी समझा जा रहा है कि वे मत्स्य सब्सिडी जो कि हमारे देश में मछुआरों की आ‍जीविका और जमीनी वास्‍तविकताओं से गहरे जुड़ा है पर एक निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते के लिए काम करें।

भारत का मानना ​​है कि विकासशील देशों को WTO के मूलभूत सिद्धांतों के संरक्षण के माध्यम से WTO की वार्ता में अपने हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। दो दिवसीय बैठक , भाग लेने वाले सदस्‍य देशों को विकासशील देशों की  प्राथमिकता और हितों से जुड़े  मुद्दों पर साझा WTO सुधार प्रस्ताव विकसित करने का अवसर प्रदान कर रही है। यह विकसित और विकासशील देशों दोंनो को उनसे जुड़े महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर एक साझा विचार विकसित करने में मदद करेगी।

दो दिवसीय बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है

  • अपीलीय निकाय में गतिरोध को समाप्‍त करने के लिए तत्‍काल उपाय।
  • सुधार एजेंडे में बहुत कम विकसित और विकासशील देशों से जुड़े अहम और प्राथमिकता वाले मुद्दों पर चर्चा।
  • विकासशील देशों से जुड़े अहम मुद्दों को बातचीत के एजेंडे में शामिल किये जाने के उपाय।
  • कम विकसित देशों सहित सभी विकाशील देशों के लिए प्रभावी एस एंड डी सुनिश्चित करना।
Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here