नहीं रहे पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, देश भर में शोक की लहर

नई दिल्लीः पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का आज लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होने सुबह 7 बजे दिल्ली में अंतिम सांस ली। वे 88 साल के थे और लंबे समय से अल्जाइमर नामक बिमारी से पीड़ित थे। फर्नांडिस के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। पीएम मोदी समेत देश के कई नेताओं ने जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

पीएम ने ट्वीट कर कहा, ‘ जॉर्ज साहब ने भारत की बेहतरीन लीडरशिप का प्रतिनिधित्व किया। वह बेबाक ऐर निर्भिक थे। उन्होने देश के लिए अमूल्य योगदान दिया। वह गरीबों की सबसे मजबूत आवाज थे। उनके निधन से दुखी हूं।‘

बतका दें अटल बिहारी की सरकार में रक्षामंत्री रहे फर्नांडिस ने सेना का मनोबल बढ़ाने की दिशा में कई बेहतरीन कदम उठाए थे। जॉर्ज फर्नांडिस ने रक्षा मंत्रालय के अलावे उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग भी संभाले थे।

जॉर्ज फर्नांडिस व्यक्तिगत जीवन में  काफी सहज और सुलझे हुए व्यक्ति थे, जिसकी छाप ताउम्र उनके राजनीतिक जीवन पर भी देखने को मिलती रही। आम आदमी के लिए सहज उपल्ब्ध जॉर्ज अपने मुल्यों पर अडिग थे।

10 भाषाओं के जानकार थे जॉर्ज

फर्नांडिस का जन्म 3 जून 1930 को कर्नाटक में हुआ था। वे 10 भाषाओं के जानकार थे। वे हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन भाषा जानते थे। उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं। उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था।

जेल में सुनाए गीता के उपदेश

1975 की इमर्जेंसी के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज फर्नांडिस को पगड़ी पहन और दाढ़ी रख कर सिख का भेष धारण किया था। गिरफ्तारी के बाद वे तिहाड़ जेल में कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे। 1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया था।

1977 में मुजफ्फरपुर से बने सांसद

इमर्जेंसी खत्म होने के बाद फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही लड़े। और बिहार के मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से रेकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। जनता पार्टी की सरकार में वह उद्योग मंत्री बनाए गए थे।

बाद में जनता पार्टी टूटी, फर्नांडिस ने अपनी पार्टी समता पार्टी बनाई और बीजेपी का समर्थन किया। फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक जीवन में कुल तीन मंत्रालयों का कार्यभार संभाला – उद्योग, रेल और रक्षा मंत्रालय।

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