IFFI 2018 में इजरायल पर विशेष फोकस, इन 10 चुनिंदा फिल्मों का होगा प्रदर्शन

मुंबईः हर वर्ष भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफी/IFFI) में एक ऐसा देश केंद्र में होता है जो अपने देश की सिनेमाई उत्कृष्टता और योगदानों को सामने लाता है। इस बार IFFI 2018 के 49वें संस्करण में वो फोकस देश इजरायल होगा। मुंबई में इजरायल के वाणिज्य दूतावास के सहयोग से ‘कंट्री फोकस’ श्रेणी में इस देश की 10 फिल्में चुनी गई हैं।

इस ‘कंट्री फोकस’ श्रेणी में प्रदर्शित होने वाली पहली फिल्म होगी अवी नेशेर की ‘द अदर स्टोरी।’ इस श्रेणी में दिखाई जाने वाली अन्य फिल्मों में ‘फुटनोट’, ‘द अदर स्टोरी’, ‘द बबल’, ‘वर्किंग वुमन’, ‘द अनऑर्थोडॉक्स’, ‘लॉन्गिंग’, ‘पैरा अडूमा’, ‘रिडेंप्शन’, ‘शालोम बॉलीवुडः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन सिनेमा’ और ‘वॉल्ट्ज विद बशीर’ शामिल हैं।

इजरायली अभिनेता अलॉन अबाउटबाउल होंगे विशेष अतिथि

‘रैंबो-3’, स्टीवन स्पीलबर्ग की ‘म्यूनिख’, रिडली स्कॉट की ‘बॉडी ऑफ लाइज़’, ‘लंडन हैज़ फॉलन’ और ‘द डार्क नाइट राइजेज़’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों में अपने काम के लिए पहचाने जाने वाले प्रसिद्ध इजरायली अभिनेता अलॉन अबाउटबाउल इजरायल के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर इस महोत्सव में विशेष अतिथि होंगे।

अपनी गहरी खनकदार आवाज़ के लिए मशहूर अनुभवी अभिनेता अलॉन अबाउटबाउल ने एक लंबे अरसे में हबीमा थियेटर समेत कई जगहों पर रंगमंच के नाटक किए हैं जिनमें हैमलेट, कैवियार एंड लैंटिल्स, ब्लड ब्रदर्स, क्लोज़र और फॉरगिवनेस जैसे नाटक शामिल हैं।

अलॉन अबाउटबाउल को जो सबसे चर्चित काम है उसमें इजरायली फिल्म ‘शिवा’ (2008) और रिडली स्कॉट की अमेरिकी फिल्म ‘बॉडी ऑफ लाइज़’ शामिल है जिसमें उन्होंने लियोनार्डो डिकैप्रियो और रसल क्रो जैसे अभिनेताओं के साथ काम किया।

अबाउटबाउल ने उसके बाद यीगल बर्स्टाइन की फिल्म ‘हैंड ऑफ गॉड’ में मोशे इवगी और डॉरिट बर-ओर के साथ अभिनय किया। मोशे इवगी के साथ उनके प्रदर्शन के लिए दोनों को यरूशलम फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला।

इसके अलावा अबाउटबाउल को गोवा में हुए 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफी) में इफी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार भी प्रदान किया गया था।

डैन वोलमैन को मिलेगा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

हाइड एंड सीक, टाइड हैंड्स के लिए पहचाने जाने वाले इजरायली फिल्मकार डैन वोलमैन को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया जाएगा डैन वोलमैन इजरायल के अनुभवी लेखक, निर्देशक और फिल्मकार हैं जिन्हें ‘हाइड एंड सीक’ (1980), ‘टाइड हैंड्स’ (2006) और ‘बेन्स बायोग्राफी’ (2003) जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।

वोलमैन की फिल्मों को केन, वैनिस, बर्लिन, शंघाई, गोवा और मॉस्को जैसे कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शित किया जा चुका है और उनकी फिल्मों ने पूरी दुनिया में पुरस्कार जीते हैं।

अपने विशिष्ट दृष्टिकोण और अभिनव काम के लिए डैन ने यरूशलम अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार और शिकागो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘सिल्वर ह्यूगो’ पुरस्कार प्राप्त किया। इजरायली सिनेमा और संस्कृति में उनकी उपलब्धियों और योगदान के लिए जनवरी 2015 में उन्हें ‘एरिक आइंस्टाइन’ पुरस्कार दिया गया था। वर्ष 2016 में इजरायली फिल्म अकादमी द्वारा डैन को ‘ओफिर लाइफ टाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार प्रदान किया गया।

वोलमैन इस साल मार्च में भी गोवा में आए हुए थे जब पणजी में आयोजित एक कला महोत्सव में उनकी फिल्म ‘एन इजरायली लव स्टोरी’ का प्रदर्शन किया गया था। साल 2017 में आई इस फिल्म के केंद्र में 1947 के दौरान की एक प्रेम कहानी है जब इजरायल का निर्माण हुआ था। डैन वोलमैन गोवा में 2011 में आयोजित 42वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफी) की ज्यूरी का भी हिस्सा थे।

22 नवंबर  को भारत-इजरायल सह-निर्माण सम्मेलन का होगा आयोजन

इजरायल की 10 चुनी गई फिल्मों के प्रदर्शन के अलावा 49वें इफी में 22 नवंबर 2018 को भारत-इजरायल सह-निर्माण सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा।

‘कंट्री फोकस पैकेज’ में चुनी गई फिल्मों का हुआ है चयन

फुटनोट

वर्ष 2011 में आई इस इजरायली ड्रामा फिल्म का लेखन और निर्देशन जोसेफ सीडर ने किया, और इसमें अभिनय श्लोमो बारबा व लियोर अशकेनाज़ी का है। इसकी कहानी एक पिता और पुत्र के बिगड़े हुए रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है जो दोनों ही यरूशलम के हीब्रू विश्वविद्यालय के टैल्मड विभाग में पढ़ाते हैं।

इस फिल्म को 2011 में केन फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिला था। उसी साल हुए ओफिर पुरस्कारों में ‘फुटनोट’ ने नौ पुरस्कार जीते थे और 84वें एकेडमी अवॉर्ड्स में विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में भेजी गई इजरायल की ये आधिकारिक प्रविष्टि बनी। 18 जनवरी 2012 को इस फिल्म ने ऑस्कर श्रेणी की नौ छांटी गई फिल्मों में जगह बनाई।

द अदर स्टोरी

लेखक, निर्माता अवी नेशेर के निर्देशन में बनी वर्ष 2018 की ये फिल्म बहुत संवेदनशीलता और प्यार के साथ ऐसे किरदारों का चित्रण करती है जो एक अव्यवस्थित परिवार में होने के दर्द का सामना कर रहे हैं और दिखाती है कि कैसे ये परिवार अपनी बेटी के धार्मिक पश्चाताप को संभालने की कोशिश करता है। ये एक भावुक करने वाला मानवीय ड्रामा है जो इजरायली समाज की जटिल सच्चाई को उसके सबसे अंधेरे कोनों में जाकर दिखाती है।

‘द अदर स्टोरी’ इस महोत्सव की ‘कंट्री फोकस’ श्रेणी में दिखाई जाने वाली पहली फिल्म होगी। 2018 के टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की समकालीन विश्व सिनेमा श्रेणी में भी इस फिल्म का प्रदर्शन किया गया था। इसके अलावा इसी साल हाइफा फिल्म महोत्सव में भी प्रदर्शित होने वाली ये पहली फिल्म थी।

लॉन्गिंग

‘लॉन्गिंग’ 2017 में आई इजरायली कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है जो मुख्य रूप से इजरायल के एकर शहर में घटती है।  इस फिल्म के निर्देशक सावी गैबिज़ॉन है ये फिल्म एक अधेड़ अविवाहित इजरायली आदमी की कहानी दिखाती है जिसे तब अपने जीवन के फैसलों का मूल्यांकन करने को मजबूर होना पड़ता है जब उसे पता चलता है कि उसकी पूर्व-गर्लफ्रेंड ने 20 साल पहले उसके पुत्र को जन्म दिया था।

इस फिल्म का प्रदर्शन 2017 को टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की समकालीन विश्व सिनेमा श्रेणी में किया गया था। 2017 के ओफिर पुरस्कारों में ‘लॉन्गिंग’ को 13 नामांकन मिले और इसने सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार भी जीता।

पैरा अडूमा (रेड काऊ)

यह फिल्म सिविया बरकाइ याकोव निर्देशन में बनी है। पूर्वी यरूशलम में पुराने नगर से कुछ ही दूरी वाले इलाके में स्थित ‘रेड काऊ’ एक 16 साल की लड़की बेनी (एवीगेल कोवारी) और उसके धार्मिक पिता येहोशुवा (गैल टोरेन) के बीच के रिश्ते पर केंद्रित होती है।

उसका पिता चरमपंथी इजरायलियों के एक समूह का नेतृत्व करता है जो फिल्म के नाम के अनुरूप ही एक पवित्र लाल बछिया को पाल रहे हैं और उनका मानना है कि ये यहूदियों के लिए नए युग का सवेरा लेकर आएगी जिसके बाद वे माऊंट मंदिर में लौट सकेंगे जहां जाना उनके लिए लंबे समय से वर्जित है।

‘रेड काऊ’ जवां दौर की फिल्म है जो उन दिनों में घटती है जब रैबिन की हत्या होती है। इसमें बेनी की जिंदगी का चित्रण किया गया है जिसके जन्म के समय ही मां मर गई थी और वो अनाथ हो गई थी। उसका पिता येहोशुवा एक धार्मिक, दक्षिणपंथी चरमपंथी है। और इस जटिल दौर में वो अपनी यौनिक, धार्मिक और राजनीतिक जागरूकता का निर्माण कर रही है।

रिडेंप्शन

इस फिल्म के निर्देशक जोसेफ मैडमॉनी, बोएज़ येहोनेटन याकोव हैं। साल 2018 में प्रदर्शित इस फिल्म की कहानी मेनाचेम के बारे में है जो एक रॉक बैंड का प्रमुख सदस्य रहा है और अब एक धार्मिक आदमी है। उसकी एक छह साल की बच्ची है। जब उसकी बच्ची को कैंसर होता है तब उसे कोई ऐसा रचनात्मक रास्ता खोजना होगा जिससे वो उसके महंगे इलाज के लिए पैसे जुटा सके।

ऐसे में वो एक आखिरी दौरे के लिए अपने बैंड के साथ फिर से जुड़ता है। अपनी बेटी को बचाने की इस यात्रा से उसके पुराने घाव खुलते हैं और वो अपने धर्मनिरपेक्ष अतीत से फिर से जुड़ पाता है। मेनाचेम समझता है कि सिर्फ उसके अतीत और संगीत के साथ एक नए जुड़ाव से ही उसके मोक्ष के लिए रास्ता बन सकता है।

शालोम बॉलीवुडः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन सिनेमा

‘शालोम बॉलीवुडः द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियन सिनेमा’  डैनी बेन-मोशे के निर्देशन में बनी एक फीचर फिल्म जितनी लंबाई की डॉक्यूमेंट्री है, जिसमें दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योग के नाचते, गाते इतिहास का उत्सव मनाया गया है। इसमें भारतीय यहूदी समुदाय की 2000 साल लंबी कहानी और दुनिया के सबसे बड़े फिल्म उद्योग को आकार देने में उनके मजबूत स्थान को उद्घाटित किया गया है।

ये फिल्म कुछ ऐसी अच्छी यहूदी लड़कियों की जिंदगियों के जरिए अपनी कहानी कहती है जो 20वीं सदी की शुरुआत से लेकर मौजूदा समय तक भारतीय सिनेमा के दिल पर राज करने वाली सितारा बनीं। 1920 के मूक फिल्मों के दौर से हम सुलोचना (रूबी मायर्स) से मिलते हैं जो भारतीय सिनेमा की महान महिला सुपरस्टार थीं।

फिर 1930 के दौर में मिस रोज़ (रोज़ एज़रा) थीं जो बॉलीवुड के पार्टी परिदृश्य में भड़कता हुआ नाम थीं। 1940 के दौर में प्रमिला (एश्थेर अब्राहम) थीं जो देश की पहली मिस इंडिया बनीं। उसके बाद 1950 और 1960 के दौर में जब भारतीय सिनेमा का स्वर्ण युग था तब नादिरा (फरहत एज़कील) बॉलीवुड की सबसे बड़ी वैंप थीं।

इस फिल्म का विश्व प्रीमियर मामी मुंबई फिल्म महोत्सव 2017 में किया गया था और 2018 के यहूदी, भारतीय व दक्षिण-पूर्व एशियाई फिल्म महोत्सव क्षेत्र में ये हिट रही। मौजूदा जमाने में बॉलीवुड के वरिष्ठ लोग भी इस फिल्म में नजर आते हैं, जैसे ऋषि कपूर जो सामान्य लिहाज से फिल्म उद्योग पर बात करते हैं और खास तौर पर इस पर यहूदी सितारों के असर को बताते हैं।

द बबल

आइटन फॉक्स के निर्देशन में बनी ये फिल्म तेल अवीव शहर में युवा दोस्तों के एक समूह का पीछा करती है और इसके अलावा ये इस शहर के लिए एक प्रेम गीत भी है और उस दावे की पड़ताल करने की कोशिश भी है कि तेल अवीव के लोग बाकी सारे देश से कटे हुए हैं और यहां पर क्या उथल पुथल चल रही है। ये फिल्म समलैंगिकों व विषमलैंगिकों, यहूदियों व अरबों, महिलाओं व पुरुषों के नजरिए से तेल अवीव में युवा लोगों की जिंदगियों पर नजर डालती है।

कहानी नोम नाम के एक युवा इजरायली सैनिक से शुरू होती है जो आरक्षित सुरक्षा बलों में काम करता है और एक दिन एक जांच चौकी पर फिलिस्तीनी आदमी अशरफ से मिलता है। एक घटना के दौरान नोम अपना पहचान पत्र जांच चौकी पर खो देता है और उसके बाद अशरफ उसके घर के दरवाजे पर पहुंचता है जहां नोम एक समलैंगिक आदमी और एक विषमलैंगिक युवती के साथ रहता है।

द अनऑर्थोडॉक्स

एलिरन माल्का के निर्देशन में बनी ये फिल्म 1983 में स्थित है और याकोव कोहेन के इर्द गिर्द घूमती है जो एक यरूशलम प्रिंटिंग प्रेस का मालिक है और उसकी बेटी को नस्ली कारणों से स्कूल से निष्कासित कर दिया जाता है। याकोव इस अन्याय के खिलाफ लड़ने का फैसला करता है।

याकोव उसके पास कोई ज्ञान, कोई पैसा, कोई संपर्क और राजनीतिक अनुभव नहीं है। मगर उसके पास इसके खिलाफ कदम उठाने के लिए इच्छाशक्ति है, जुनून है और ये सोच है कि उसे और उसके जैसे दूसरे सेफार्डिक नस्ल के यहूदियों को अपना सिर सम्मान से ऊंचा रखने में सक्षम होना चाहिए।

याकोव दो दोस्तों को भी साथ लेता है और यरूशलम में पहला नस्ल आधारित राजनीतिक दल शुरू करता है जिसकी चारीत्रिक विशेषताएं वैसी ही हैं जैसे लोगों का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सूट पहनने वालों जैसे नहीं बल्कि निचले स्तर से संघर्ष करके ऊपर आने की कोशिश करने वाले लोग हैं। इनकी गतिविधियां अनौपचारिक होती हैं, अपने साथी इंसानों के लिए प्यार से भरी, जिसमें हास्य का भी एक अंदाज है और बहुत सारा गुस्सा है।

वॉल्ट्ज विद बशीर

एरी फोल्मैन के निर्देशन में बनी ‘वॉल्ट्ज विद बशीर’ 2008 में आई एक इजरायली एनिमेटेड युद्ध डॉक्यूमेंट्री फिल्म है जो फोल्मैन को दिखाती है जो 1982 के लेबनान युद्ध में एक सैनिक के तौर पर अपने अनुभव की खोई यादों को ढूंढने में लगा है। एक रात एक बार में एक पुराना दोस्त निर्देशक एरी को बार-बार आने वाले एक बुरे सपने के बारे में बताताहै जिसमें 26 खूंखार कुत्ते उसका पीछा कर रहे हैं।

हर रात इन जानवरों की संख्या इतनी ही होती है। अब ये दोनों आदमी ये निष्कर्ष निकालते हैं कि इसका ताल्लुक 80 के दशक के शुरू में पहले लेबनान युद्ध में उनके इजरायली सैन्य मिशन से है। एरी इस बात से हैरान है कि वो अपनी जिंदगी की उस अवधि से कोई भी चीज याद नहीं कर पा रहा है।

इस पहेली के कौतुहल के कारण वो पूरी दुनिया में अपने पुराने दोस्तों और साथियों से मिलने और उनके साक्षात्कार लेने का फैसला करता है। उसे उस दौर और अपने बारे में सच का खुलासा करना है। जैसे जैसे एरी इस रहस्य की गहराई में जाता है, उसकी याद्दाश्त में असली तस्वीर उभरने लगती है।

2008 के केन फिल्म महोत्सव में ‘वॉल्ट्ज विद बशीर’ का प्रदर्शन किया गया था जहां उसने पाम दॉर प्रतिस्पर्धा में प्रवेश किया। उसके बाद से इस फिल्म ने आलोचकों की भारी प्रशंसा पाते हुए कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों में नामांकन पाया और जीते।

इसने सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म का गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ फिल्म का एनएसएफसी पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म के लिए सीज़र पुरस्कार और फीचर डॉक्यूमेंट्री के लिए आईडीए पुरस्कार जीता है। इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म के लिए एकेडमी पुरस्कार, गैर-अंग्रेजी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए बाफ्टा पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फीचर के लिए एनी पुरस्कार में नामांकित भी हो चुकी है।

वर्किंग वुमन

इस फिल्म के निर्देशक माइकल अवियाद हैं। ये इजरायली फिल्म कार्यस्थल पर शोषण के विषय पर बनी है और इसमें मुख्य भूमिका करने वाली लिरोन बेन सुल्श का अभिनय बहुत ताकतवर है। कहानी ओर्ना की है जिसके लिए कार्यस्थल पर जिंदगी तब असहनीय हो जाती है जब उसका बॉस उसकी पदोन्नति कर देता है और उसका अनुचित फायदा उठाने की कोशिश करता है।

उसका पति अपने नए रेस्त्रां को चालू रखने के लिए जूझ रहा है, ऐसे में ओर्ना ही अपने तीनों बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करने वाली रह जाती है। जब उसकी दुनिया तबाह हो जाती है तब उसे खुद को संभालना होगा ताकि अपनी नौकरी के लिए और अपने आत्म-सम्मान के लिए अपने ही तरीके से लड़ सके।

इस फिल्म का प्रदर्शन 2018 के टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की समकालीन विश्व सिनेमा श्रेणी में किया गया था। टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के बाद उसे बुसान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी प्रशंसा मिली।

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