थानेदार ने चलाई आरा के भाजपा प्रत्याशी आरके सिंह के सचिव पर गोली

भोजपुरः लोकसभा चुनाव के आखिरी दिन आरा से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां भाजपा प्रत्याशी आरके सिंह के सचिव संदीप कुमार मिंटू पर गोली चलाए जाने की बात कही जा रही है। मिंटू पर गोली आरा मुफस्सिल थानाध्यक्ष रविन्द्र राम ने चलाई है। इस हमले में संदीप कुमार मिंटू बाल-बाल बच गए।

मिंटू पर गोली चलाने के अलावें थानाध्यक्ष पर मिंटू के साथ गए कई भाजपा कार्यकर्ताओं को भी बुरी तरह पिटने की भी बात कही जा रही है। थानाध्यक्ष द्वारा जिन कार्यकर्ताओं की पिटाई गी गई है उनमें, शम्भू चौरसिया, भारतीय जनता युवा मोर्चा के आरा जिला के संयोजक राघवेंद्र कुमार एवं भाजपा के नगर उपाध्यक्ष आनंद कुमार सिंह  शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक संदीप कुमार मिंटू पार्टी के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाबत जानकारी लेने के लिए थाने पर गए थे।  इसी क्रम में पूछताछ करने के दौरान थानाध्यक्ष आपा खो बैठे और सामने खड़े मिंटू पर गोली दाग दी।

इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आरके सिंह ने थानाध्यक्ष को आविलंब बर्खास्त करते हुए गिरफ्तार करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि वोटों की गिनती जिले के डीएम व एसपी का स्थानांतरण करने के बाद ही शुरू हो। बकौल आरके ऐसे डीएम और एसपी के रहते ईवीएम सुरक्षित नहीं है।

आरके सिंह का कहना है कि स्थानीय प्रशासन के कुछ पदाधिकारी बेवजह भाजपा कार्यकर्ताओं को परेशान कर रहे हैं। इस मामले को लेकर उनकी बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय से हुई है। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन भी दिया है। आरके सिंह ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा है कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं होती है, तो वे मतगणना के दौरान अनशन करेंगे।

बता दें रविन्द्र राम पर पहले भी जनप्रतिनिधियों पर हमले करने का आरोप लगता रहा है। जून 2018 में उन्होंने एक पंचायत समिति सदस्य से भी मारपीट की थी तथा अकारण 2 घंटे तक हाजत में रखा था। ऐसे में भाजपा कार्यकार्ताओं की माने तो उनका चुनाव के दौरान थानाध्यक्ष बने रहना एक सवाल खड़ा करता है।

वैसे ये बात भी गौर करने वाली है कि एक थानाध्यक्ष क्या अकारण ही आपा खो सकता है और इस तरह से बात-बात पर किसी पर भी गोली चला सकता है। बहरहाल गोली चली है तो मामला संवेदनशिल है, लेकिन कार्वाई से पहले मामले की जांच भी जरूरी है कि आखिर वो कौन सी परिस्थिति रही होगी जब एक पुलिस वाले ने ऐसा कदम उठाया होगा।

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